चतुर्शिष्टिवैष्णवानवलिस्तोत्रम् एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के चार रूपों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र अष्टम शताब्दी के वैष्णव संत श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है।
स्तोत्र में, श्री शंकराचार्य भगवान विष्णु के चार रूपों की महिमा का वर्णन करते हैं:
- नारायण: भगवान विष्णु के चार रूपों में से पहला रूप नारायण है। नारायण को जल में निवास करने वाले देवता माना जाता है।
- वासुदेव: भगवान विष्णु के चार रूपों में से दूसरा रूप वासुदेव है। वासुदेव को कृष्ण के रूप में भी जाना जाता है। कृष्ण को भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में माना जाता है।
- परमधाम: भगवान विष्णु के चार रूपों में से तीसरा रूप परमधाम है। परमधाम को भगवान विष्णु के परम धाम के रूप में जाना जाता है।
- पुरुषोत्तम: भगवान विष्णु के चार रूपों में से चौथा रूप पुरुषोत्तम है। पुरुषोत्तम को भगवान विष्णु के सर्वोच्च रूप के रूप में जाना जाता है।
चतुरशीतिवैष्णवनामावलीस्तोत्रम् Chaturshittivaishnavanamvalistotram
स्तोत्र में, श्री शंकराचार्य भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें उनके चार रूपों में दर्शन दें। वे भगवान विष्णु से यह भी प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें मोक्ष प्रदान करें।
यहाँ चतुर्शिष्टिवैष्णवानवलिस्तोत्रम् का हिंदी अनुवाद दिया गया है:
श्लोक 1:
हे नारायण! हे वासुदेव! हे परमधाम! हे पुरुषोत्तम! आप चारों रूपों में ही एक हैं, और आप ही इस संसार के सृष्टिकर्ता, धारणकर्ता और संहारकर्ता हैं।
श्लोक 2:
हे नारायण! आप जल में निवास करते हैं, और आप सभी जीवों के पालनहार हैं। हे वासुदेव! आप कृष्ण के रूप में अवतरित हुए, और आपने दुष्टों का नाश किया। हे परमधाम! आप परम धाम के स्वामी हैं, और आप सभी जीवों को मोक्ष प्रदान करते हैं। हे पुरुषोत्तम! आप सर्वोच्च देवता हैं, और आप सभी जीवों के लिए आदर्श हैं।
श्लोक 3:
हे नारायण! आपके रूप अत्यंत सुंदर हैं, और आपके चरणों में सभी जीवों की भक्ति है। हे वासुदेव! आपके रूप अत्यंत आकर्षक हैं, और आपके प्रेम में सभी जीव लीन हो जाते हैं। हे परमधाम! आपका निवास अत्यंत आनंदमय है, और आप सभी जीवों को सुख प्रदान करते हैं। हे पुरुषोत्तम! आपका ज्ञान अत्यंत गहन है, और आप सभी जीवों को ज्ञान प्रदान करते हैं।
श्लोक 4:
हे नारायण! हे वासुदेव! हे परमधाम! हे पुरुषोत्तम! मैं आपके चारों रूपों में आपकी स्तुति करता हूं। कृपया मुझे अपने चारों रूपों में दर्शन दें, और मुझे मोक्ष प्रदान करें।
चतुर्शिष्टिवैष्णवानवलिस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के चार रूपों की महिमा का वर्णन करता है, और यह भगवान विष्णु से प्रार्थना करता है कि वे भक्तों को मोक्ष प्रदान करें।
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