श्रीजगदीशशतकम् shrijagadishshatakam

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Published October 16, 2023
Updated October 16, 2023

श्री जगदीश शतकम् एक वैष्णव स्तोत्र है जो भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र १०० श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक में भगवान विष्णु के एक अलग गुण या रूप की स्तुति की गई है।

श्री जगदीश शतकम् की रचना श्री वल्लभाचार्य ने की थी। यह स्तोत्र श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके भक्तों द्वारा नियमित रूप से पढ़ा और गाया जाता है।

श्री जगदीश शतकम् के कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • भगवान विष्णु समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं।
  • भगवान विष्णु परमार्थ का स्वरूप हैं।
  • भगवान विष्णु मोक्ष का मार्ग हैं।
  • भगवान विष्णु अपने भक्तों के रक्षक हैं।

श्री जगदीश शतकम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने और मोक्ष प्राप्त करने में भी मदद कर सकता है।

श्री जगदीश शतकम् का पाठ हिंदी में इस प्रकार है:

श्री जगदीश शतकम्

श्लोक १

जगदीश हरि, सर्वेश्वर, तुम ही हो परम स्वरूप। तुम ही हो परम आनंद, तुम ही हो परम सत्य।

श्लोक २

तुम ही हो समस्त ब्रह्मांड के स्वामी, तुम ही हो परमार्थ का स्वरूप। तुम ही हो मोक्ष का मार्ग, तुम ही हो अपने भक्तों के रक्षक।

श्लोक ३

तुम हो अजर-अमर, तुम हो सर्वव्यापी। तुम हो सर्वशक्तिमान, तुम हो पूर्ण ज्ञान।

श्लोक ४

तुम हो करुणा के सागर, तुम हो प्रेम के धाम। तुम हो ज्ञान के प्रकाश, तुम हो भक्ति के मार्ग।

श्लोक ५

जो भक्त तुम्हारी शरण में जाता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। वह मोक्ष प्राप्त करता है, और तुम्हारे दर्शन प्राप्त करता है।

श्री जगदीश शतकम् का पाठ संस्कृत में इस प्रकार है:

श्री जगदीश शतकम्

श्लोक १

जगदीश हरि, सर्वेश्वर,
त्वं एव परम स्वरूपम्।
त्वं एव परम आनन्द,
त्वं एव परम सत्यम्।

श्लोक २

त्वं एव सर्वब्रह्माण्ड स्वामी,
त्वं एव परमार्थ स्वरूपम्।
त्वं एव मोक्ष मार्ग,
त्वं एव भक्तानां रक्षकः।

श्लोक ३

त्वं एव अजर-अमर,
त्वं एव सर्वव्यापी।
त्वं एव सर्वशक्तिमान,
त्वं एव पूर्ण ज्ञानम्।

श्लोक ४

त्वं एव करुणा सागर,
त्वं एव प्रेम धामः।
त्वं एव ज्ञान प्रकाश,
त्वं एव भक्ति मार्गः।

श्लोक ५

यः भक्तः त्वत् शरणं गच्छति,
तस्य सर्वदुःखानि,
दूरं गच्छन्ति।
स मोक्षं प्राप्नोति,
त्वत् दर्शनं च।

श्री जगदीश शतकम् के तीन खंड हैं:

  • प्रथम खंड: भगवान विष्णु के गुणों का वर्णन करता है।
  • द्वितीय खंड: भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है।
  • तृतीय खंड: भगवान विष्णु की भक्ति के मार्ग का वर्णन करता है।

श्री जगदीश शतकम् एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के बारे में जानने के लिए एक अनिवार्य है। यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने और मोक्ष प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

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