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Published October 16, 2023
Updated July 29, 2024

श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के 108 नामों की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तोत्र 14वीं शताब्दी के भक्त कवि, श्री मधुसूदन सरस्वती द्वारा रचित है।

श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् के श्लोक:**

1. हे कृष्ण, आप मेरे आराध्य हैं। मैं आपके 108 नामों का गुणगान करता हूँ, और आपके चरणों में लीन रहना चाहता हूँ।

2. हे पार्थसारथी, आप धनुर्विद्या के महान गुरु हैं। आपने अर्जुन को धनुर्विद्या सिखाई, और उन्हें एक महान योद्धा बनाया।

3. हे गोवर्धनधारी, आपने गोवर्धन पर्वत को अपनी उँगली पर उठा लिया था। आपने देवताओं और असुरों को बचाया, और अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

4. हे लीलाधर, आपने गोपियों के साथ अनेक लीलाएँ की हैं। आपने उन्हें प्रेम और आनंद का उपहार दिया, और उनकी रक्षा की।

5. हे पूर्ण पुरुष, आप ही पूर्ण परमात्मा हैं। आप सभी जीवों में निवास करते हैं, और सभी जीवों को प्रेम और करुणा प्रदान करते हैं।

6. हे कृष्ण, आप सभी जीवों के लिए एक आशीर्वाद हैं। मैं आपकी कृपा से मोक्ष प्राप्त करना चाहता हूँ, और आपकी चरणों में निवास करना चाहता हूँ।

श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् के कुछ महत्वपूर्ण श्लोकों का अर्थ:**

  • पहला श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि वे भगवान कृष्ण के 108 नामों का गुणगान करते हैं, और वे उनके चरणों में लीन रहना चाहते हैं।
  • दूसरा श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की शक्ति और दया का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण धनुर्विद्या के महान गुरु हैं, और उन्होंने अर्जुन को एक महान योद्धा बनाया।
  • तीसरा श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उँगली पर उठा लिया था, और उन्होंने गोपियों के साथ अनेक लीलाएँ की हैं।
  • चौथा श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की पूर्णता का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण ही पूर्ण परमात्मा हैं, और वे सभी जीवों में निवास करते हैं।
  • पाँचवाँ श्लोक: इस श्लोक में, भक्त भगवान कृष्ण की कृपा का अनुरोध करते हैं। वे कहते हैं कि वे भगवान कृष्ण की कृपा से मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं, और उनकी चरणों में निवास करना चाहते हैं।

श्रीपार्थसारथीष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान कृष्ण के 108 नामों में निमग्न होने में मदद कर सकती है। यह भक्तों को प्रेम, आनंद और मोक्ष की प्राप्ति में मदद कर सकती है।

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