श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में भगवान राम के जन्म के बाद ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें स्तुति करते हुए कहा था:
सुखमय, मंगलमय, मंगलकारी,
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम।
तुम हो ज्ञान के सागर,
तुम हो नीति के आधार,
तुम हो करुणा के सागर,
तुम हो धर्म के आधार।
तुम हो त्रेता के अवतार,
तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम,
तुम हो राम, तुम हो राम,
तुम हो रामचंद्र।
तुम हो लक्ष्मण के भाई,
तुम हो सीता के पति,
तुम हो अयोध्या के राजा,
तुम हो अखिल सृष्टि के स्वामी।
तुम हो सबके आराध्य,
तुम हो सबके प्रिय,
तुम हो सबके रक्षक,
तुम हो सबके उद्धारक।
श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम,
सुखमय, मंगलमय, मंगलकारी।
इस स्तुति में, ऋषि वशिष्ठ ने भगवान राम के सभी गुणों की प्रशंसा की है। उन्होंने उन्हें ज्ञान, नीति, करुणा, धर्म, और मर्यादा के सागर बताया है। उन्होंने उन्हें त्रेता के अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम, राम, और रामचंद्र के नाम से भी संबोधित किया है। उन्होंने बताया है कि भगवान राम लक्ष्मण के भाई, सीता के पति, अयोध्या के राजा, और अखिल सृष्टि के स्वामी हैं। उन्होंने कहा है कि भगवान राम सभी के आराध्य, सभी के प्रिय, और सभी के रक्षक और उद्धारक हैं।
श्रीरामचरितमानस में, भगवान राम को एक आदर्श पुरुष और एक आदर्श राजा के रूप में चित्रित किया गया है। वे सभी गुणों के सागर हैं, और वे सभी के लिए एक प्रेरणा हैं।
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