श्रीसीतारामदशश्लोकी Shri Sita Ram Dashashloki

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Published October 11, 2023
Updated October 11, 2023

श्री सीता राम दशश्लोकी (Shri Sita Ram Dashashloki) भगवान श्री राम और माता सीता की स्तुति में लिखी गई एक दस श्लोकों की कविता है। यह कविता गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है और रामचरितमानस में पाई जाती है।

श्री सीता राम दशश्लोकी में तुलसीदास भगवान श्री राम और माता सीता को आदर्श पुरुष और आदर्श महिला के रूप में चित्रित करते हैं। वह कहते हैं कि भगवान श्री राम सभी गुणों के प्रतिनिधि हैं और माता सीता पवित्रता और त्याग की मूर्ति हैं।

श्री सीता राम दशश्लोकी का पाठ इस प्रकार है:

श्रीरामचन्द्र कृपाला
रघुकुल रीति निभाए।
जाके हृदय अनुरागा
केवल नाम समाए।

रामचन्द्र के चरणों में
नित्य निवास करो मैं।
पारिजात तरु छाया में
आनन्द मंगल करो मैं।

सीतापति रामचन्द्र की
जो गुण गावै नित्य।
तुलसीदास कहहिं सोई
सकल दुखों से रहित्य।

सियाराममय सब जग
जानि राम को ध्यान।
करहुँ प्रणाम सियाराम को
मन वचन अरु तन।

मैं तो सेवक सियाराम का
तिनहीं को भजता हूँ।
जो सियाराम के सेवक
तिनको प्रणाम करता हूँ।

सियाराम गुण गावताँ
तन मन होय प्रसन्न।
सकल पाप तजि जायँ
मन वचन अरु तन।

राम नाम गुण गावत
तन मन होय निराल।
तुलसीदास कहहिं सोई
पावन हृदय सतगुरु।

सियाराममय सब जग
जानि राम को ध्यान।
करहुँ प्रणाम सियाराम को
मन वचन अरु तन।

अनुवाद:

हे कृपालु श्रीरामचन्द्र, आप रघुकुल की रीति को निभाते हैं। आपके हृदय में केवल अनुराग और नाम समाए रहते हैं।

हे भगवान श्रीरामचन्द्र के चरणों में मैं नित्य निवास करूँ। पारिजात तरु की छाया में मैं आनन्द और मंगल करूँ।

हे सीतापति श्रीरामचन्द्र के गुण जो नित्य गाते हैं, तुलसीदास कहते हैं कि वे सभी दुखों से रहित हो जाते हैं।

सारा जग सीता और राममय है। राम को ध्यान में रखकर मन, वचन और कर्म से सियाराम को प्रणाम करूँ।

मैं तो सियाराम का सेवक हूँ, मैं केवल उनकी ही भक्ति करता हूँ। जो सियाराम के सेवक हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

सियाराम के गुण गाते हुए तन-मन प्रसन्न हो जाता है। मन, वचन और कर्म से सभी पाप दूर हो जाते हैं।

राम नाम और गुण गाते हुए तन-मन निराल हो जाता है। तुलसीदास कहते हैं कि वही सच्चा गुरु है जिसका हृदय पवित्र है।

सारा जग सीता और राममय है। राम को ध्यान में रखकर मन, वचन और कर्म से सियाराम को प्रणाम करूँ।

व्याख्या:

श्री सीता राम दशश्लोकी एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण कविता है जो भगवान श्री राम और माता सीता की महिमा का वर्णन करती है। इस कविता के पाठ से भक्तों को भगवान श्री राम और माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख और शांति आती है।

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