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Published October 10, 2023
Updated October 10, 2023

श्री योगमब्शटकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की योगमूर्ति की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में विभाजित है, और प्रत्येक श्लोक भगवान शिव के एक अलग गुण या रूप का वर्णन करता है।

श्री योगमब्शटकम् का पहला श्लोक इस प्रकार है:

नमो योगिने चतुर्मुखाय, चंद्रशेखराय मुनीन्द्रार्चिताय। नमस्तेऽस्तु योगनिद्रिहराय, परब्रह्म स्वरूपाय शंकाय।

इस श्लोक में, भक्त भगवान शिव को नमस्कार करते हैं और उन्हें "योगिने" कहते हैं, जिसका अर्थ है "योग में निपुण"।

श्री योगमब्शटकम् के 8 श्लोकों का अर्थ है:

  1. हे भगवान शिव, आप योग में निपुण हैं। आपको नमस्कार।
  2. आप चार मुख वाले हैं। आपको नमस्कार।
  3. आप चंद्रमा के मुकुट वाले हैं। आपको नमस्कार।
  4. आप मुनियों द्वारा पूजित हैं। आपको नमस्कार।
  5. आप योगनिद्रा को हराने वाले हैं। आपको नमस्कार।
  6. आप परब्रह्म के स्वरूप हैं। आपको नमस्कार।
  7. आप भगवान हैं। आपको नमस्कार।
  8. आप सभी के कष्टों को दूर करने वाले हैं। आपको नमस्कार।

श्री योगमब्शटकम् एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में भगवान शिव के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन भगवान शिव की महिमा और गुणों को भी दर्शाता है।

श्री योगमब्शटकम् के 8 श्लोकों का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:

  1. हे भगवान शिव, आप योग में निपुण हैं। आपको नमस्कार।
  2. आप चार मुख वाले हैं। आपको नमस्कार।
  3. आप चंद्रमा के मुकुट वाले हैं। आपको नमस्कार।
  4. आप मुनियों द्वारा पूजित हैं। आपको नमस्कार।
  5. आप योगनिद्रा को हराने वाले हैं। आपको नमस्कार।
  6. आप परब्रह्म के स्वरूप हैं। आपको नमस्कार।
  7. आप भगवान हैं। आपको नमस्कार।
  8. आप सभी के कष्टों को दूर करने वाले हैं। आपको नमस्कार।

श्री योगमब्शटकम् एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों के दौरान पढ़ा जाता है। यह भजन भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह से सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

यहां श्री योगमब्शटकम् का एक उदाहरण है:

नमो योगिने चतुर्मुखाय, चंद्रशेखराय मुनीन्द्रार्चिताय। नमस्तेऽस्तु योगनिद्रिहराय, परब्रह्म स्वरूपाय शंकाय।

इस श्लोक का अर्थ है:

हे भगवान शिव, आप योग में निपुण हैं। आपको नमस्कार।

यह श्लोक भगवान शिव की शक्ति और दया को दर्शाता है।

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