अम्बुविचिक्तृतम सरस्वती स्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी सरस्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र ऋग्वेद के 10वें मंडल के 125वें सूक्त में पाया जाता है।
स्तोत्र का आरंभ इस प्रकार है:
अम्बुविचिक्तृतम सरस्वती स्तोत्रम्
नमस्ते सरस्वती देव्ये विद्यारूपिण्ये सदा वाग्देव्ये ज्ञानदायिने नमस्ते नमस्ते नमस्ते
अर्थ: हे सरस्वती देवी, आपको नमस्कार। हे ज्ञान की देवी, आपको नमस्कार। हे वाणी की देवी, आपको नमस्कार। हे ज्ञान प्रदान करने वाली, आपको नमस्कार।
स्तोत्र में, देवी सरस्वती को ज्ञान, वाणी, कला और बुद्धि की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। गायक देवी सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
स्तोत्र के कुछ प्रमुख पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
- "नमस्ते सरस्वती देव्ये, विद्यारूपिण्ये सदा"
- "वाग्देव्ये ज्ञानदायिने, नमस्ते नमस्ते नमस्ते"
- "सर्वविद्यास्वरूपे, सर्वशक्तिस्वरूपे"
- "सर्वभूतेषु विद्यमाने, नमस्ते नमस्ते नमस्ते"
अम्बुविचिक्तृतम सरस्वती स्तोत्रम् एक शक्तिशाली साधन है जो ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता को बढ़ावा दे सकता है। यह स्तोत्र छात्रों, विद्वानों, कलाकारों और सभी ज्ञान के अनुरागी लोगों के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है।
स्तोत्र का पाठ निम्नलिखित विधि से किया जाता है:
- सबसे पहले, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर हाथ जोड़कर देवी सरस्वती का ध्यान करें।
- फिर, स्तोत्र का पाठ करें, प्रत्येक पंक्ति का ध्यानपूर्वक अर्थ समझते हुए।
- स्तोत्र का पाठ 108 बार या अधिक बार करना लाभदायक होता है।
अम्बुविचिक्तृतम सरस्वती स्तोत्रम् का पाठ करने से ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। यह स्तोत्र छात्रों, विद्वानों, कलाकारों और सभी ज्ञान के अनुरागी लोगों के लिए लाभकारी है।
KARMASU