अम्बास्तोत्र एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 19वीं शताब्दी के भारतीय आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखा गया था।
अम्बास्तोत्र के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में देवी पार्वती के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है।
अम्बास्तोत्र का पहला श्लोक इस प्रकार है:
का त्वं शुभ्रवस्त्रेण देवी चित्तिभिः सुशोभितैः । सर्वशत्रुविनाशिनीं भक्तानुग्रहकारिणीम् ॥ १ ॥
इस श्लोक में, स्वामी विवेकानंद देवी पार्वती को "सर्वशत्रुविनाशिनीं" कहते हैं, जिसका अर्थ है "सभी शत्रुओं का नाश करने वाली"। वे कहते हैं कि देवी पार्वती भक्तों के लिए अनुग्रहकारी हैं।
अम्बास्तोत्र के 10 श्लोकों का अर्थ है:
- श्लोक 1: हे देवी पार्वती, आप शुभ्र वस्त्र पहने हुए हैं, और आपके चेहरे पर भक्तों के लिए अनुग्रह की मुस्कान है। आप सभी शत्रुओं का नाश करने वाली हैं।
- श्लोक 2: आप ज्ञान और विवेक की दाता हैं।
- श्लोक 3: आप करुणा और दया के सागर हैं।
- श्लोक 4: आप भक्तों के रक्षक हैं।
- श्लोक 5: आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
- श्लोक 6: आप ब्रह्मांड की कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं।
- श्लोक 7: आप सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं।
- श्लोक 8: आप भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
- श्लोक 9: आप सभी के लिए प्रेरणा हैं।
- श्लोक 10: हे देवी पार्वती, आपकी स्तुति करने के लिए हमें शक्ति दें।
अम्बास्तोत्र एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में देवी पार्वती के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन देवी पार्वती की महिमा और गुणों को दर्शाता है।
अम्बास्तोत्र के 10 श्लोकों का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
- हे देवी पार्वती, आप शुभ्र वस्त्र पहने हुए हैं, और आपके चेहरे पर भक्तों के लिए अनुग्रह की मुस्कान है। आप सभी शत्रुओं का नाश करने वाली हैं।
- आप ज्ञान और विवेक की दाता हैं।
- आप करुणा और दया के सागर हैं।
- आप भक्तों के रक्षक हैं।
- आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
- आप ब्रह्मांड की कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं।
- आप सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं।
- आप भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
- आप सभी के लिए प्रेरणा हैं।
- हे देवी पार्वती, आपकी स्तुति करने के लिए हमें शक्ति दें।
अम्बास्तोत्र एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों के दौरान पढ़ा जाता है। यह भजन भक्तों को देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह से सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
अम्बास्तोत्र का एक उदाहरण है:
का त्वं शुभ्रवस्त्रेण देवी चित्तिभिः सुशोभितैः ।
इस श्लोक का अर्थ है:
हे देवी पार्वती, आप शुभ्र वस्त्र पहने हुए हैं, और आपके चेहरे पर भक्तों के लिए अनुग्रह की मुस्कान है।
यह श्लोक देवी पार्वती की सुंदरता और करुणा को दर्शाता है।
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