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Published October 10, 2023
Updated July 4, 2024

मानवकृत देवेस्तूति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के कवि और संत, श्रीपदाचार्य द्वारा लिखा गया था।

मानवकृत देवेस्तूति के 10 श्लोक हैं, और प्रत्येक श्लोक में तीनों देवताओं के एक अलग गुण या रूप का वर्णन किया गया है।

मानवकृत देवेस्तूति का पहला श्लोक इस प्रकार है:

नमस्ते विष्णवे, नमस्ते शिवाय, नमस्ते दुर्गाय।

इस श्लोक में, श्रीपदाचार्य तीनों देवताओं को नमस्कार करते हैं।

मानवकृत देवेस्तूति के 10 श्लोकों का अर्थ है:

  • श्लोक 1: भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी दुर्गा को नमस्कार।
  • श्लोक 2: भगवान विष्णु को सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 3: भगवान शिव को सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 4: देवी दुर्गा को सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 5: तीनों देवताओं को ज्ञान और विवेक के दाता के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 6: तीनों देवताओं को करुणा और दया के सागर के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 7: तीनों देवताओं को भक्तों के रक्षक के रूप में वर्णित किया गया है।
  • श्लोक 8: तीनों देवताओं की पूजा और आराधना का महत्व।
  • श्लोक 9: तीनों देवताओं की कृपा से प्राप्त होने वाले लाभ।
  • श्लोक 10: तीनों देवताओं की स्तुति के लिए एक प्रार्थना।

मानवकृत देवेस्तूति एक शक्तिशाली भक्ति भजन है जो भक्तों के दिलों में तीनों देवताओं के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह भजन तीनों देवताओं की महिमा और गुणों को दर्शाता है।

मानवकृत देवेस्तूति के 10 श्लोकों का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:

  1. हे भगवान विष्णु, आपको नमस्कार।
  2. हे भगवान शिव, आपको नमस्कार।
  3. हे देवी दुर्गा, आपको नमस्कार।
  4. आप तीनों सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं।
  5. आप तीनों ज्ञान और विवेक के दाता हैं।
  6. आप तीनों करुणा और दया के सागर हैं।
  7. आप तीनों भक्तों के रक्षक हैं।
  8. आपकी पूजा और आराधना करना सभी के लिए लाभदायक है।
  9. आपकी कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  10. हे तीनों देवता, आपकी स्तुति करने के लिए हमें शक्ति दें।

मानवकृत देवेस्तूति एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों के दौरान पढ़ा जाता है। यह भजन भक्तों को तीनों देवताओं की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह से सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

यहां मानवकृत देवेस्तूति का एक उदाहरण है:

नमस्ते विष्णवे, नमस्ते शिवाय, नमस्ते दुर्गाय।

इस श्लोक का अर्थ है:

हे भगवान विष्णु, आपको नमस्कार।

यह श्लोक तीनों देवताओं को नमस्कार करता है।

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