एकाविंशति गणेश मंत्र भगवान गणेश के 21 नामों से बना एक शक्तिशाली मंत्र है। यह मंत्र गणेश पुराण में भगवान गणेश द्वारा स्वयं बताया गया है।
एकाविंशति गणेश मंत्र का पाठ निम्नलिखित है:
गणञ्जयाय नमः
गणपतये नमः
हेरम्बाय नमः
धरणीधराय नमः
महागणपतये नमः
लक्षप्रदाय नमः
क्षिप्रप्रसादनाय नमः
अमोघसिद्धये नमः
अमिताय नमः
मंत्राय नमः
चिन्तामणये नमः
निधये नमः
सुमंगलाय नमः
बीजाय नमः
आशापुरकाय नमः
वरदाय नमः
शिवाय नमः
काश्यपाय नमः
नन्दनाय नमः
वाचासिद्धये नमः
ढुण्ढिविनायकाय नमः
भावार्थ:
मैं उस गणञ्जया को प्रणाम करता हूं, मैं उस गणपतये को प्रणाम करता हूं, मैं उस हेरम्बाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस धरणीधराय को प्रणाम करता हूं, मैं उस महागणपतये को प्रणाम करता हूं, मैं उस लक्ष्प्रदाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस क्षिप्रप्रसादनाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस अमोघसिद्धये को प्रणाम करता हूं, मैं उस अमिताय को प्रणाम करता हूं, मैं उस मंत्राय को प्रणाम करता हूं, मैं उस चिन्तामणये को प्रणाम करता हूं, मैं उस निधये को प्रणाम करता हूं, मैं उस सुमंगलाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस बीजाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस आशापुरकाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस वरदाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस शिवाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस काश्यपाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस नन्दनाय को प्रणाम करता हूं, मैं उस वाचासिद्धये को प्रणाम करता हूं, मैं उस ढुण्ढिविनायकाय को प्रणाम करता हूं।
एकाविंशति गणेश मंत्र का नियमित रूप से जाप करने से भक्तों को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त हो सकती है। यह मंत्र भक्तों को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों स्तरों पर सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
एकाविंशति गणेश मंत्र को पढ़ने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:
- मंत्र को पढ़ने से पहले, भक्त को भगवान गणेश को प्रणाम करना चाहिए और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।
- मंत्र को धीरे-धीरे और ध्यान से पढ़ना चाहिए।
- मंत्र को पढ़ते समय, भक्त को भगवान गणेश की छवि या मूर्ति के सामने बैठना चाहिए और उनकी स्तुति करनी चाहिए।
एकाविंशति गणेश मंत्र को नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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