श्री लक्ष्मी नामावली स्तोत्रम्, भगवान विष्णु की पत्नी और धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी, श्रीमती लक्ष्मी के 108 नामों का एक संग्रह है। यह स्तोत्र पद्म पुराण में वर्णित है।
स्तोत्र के अनुसार, श्रीमती लक्ष्मी के नामों का जाप करने से धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह स्तोत्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो धन और समृद्धि की कमी से पीड़ित हैं।
स्तोत्र का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है:
श्री लक्ष्मी नामावली स्तोत्रम्
अथ श्री लक्ष्मी नामावली स्तोत्रम्
देव्युवाच
ऊँ प्रकृत्यै नम:
अर्थ:
मैं प्रकृति को नमन करती हूं।
ऊँ विकृत्यै नम:
अर्थ:
मैं विकृति को नमन करती हूं।
ऊँ विद्यायै नम:
अर्थ:
मैं ज्ञान को नमन करती हूं।
...
इति श्री लक्ष्मी नामावली स्तोत्रम् समाप्तम्।
स्तोत्र का पाठ करने की विधि:
इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए, सबसे पहले एक साफ और शांत स्थान चुनें। फिर, एक आसन पर बैठें और अपने सामने एक श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, हाथ में एक माला लें और स्तोत्र का पाठ शुरू करें। स्तोत्र का पाठ करते समय, श्रीमती लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तोत्र का पाठ करने का सबसे अच्छा समय शुक्रवार है। आप इसे किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन सुबह जल्दी या शाम को सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है।
स्तोत्र का पाठ करने से पहले, स्नान करके स्वच्छ हो जाएं। फिर, साफ कपड़े पहनें और एक पवित्र स्थान पर जाएं। वहां, एक आसन पर बैठें और अपने सामने एक श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें। अब, अपने हाथों में एक माला लें और स्तोत्र का पाठ शुरू करें। स्तोत्र का पाठ करते समय, श्रीमती लक्ष्मी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।
स्तोत्र का पाठ करने के बाद, श्रीमती लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को प्रसाद अर्पित करें। आप फूल, धूप, दीप, फल और मिठाई आदि अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद, श्रीमती लक्ष्मी से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करें।
स्तोत्र का पाठ करने से श्रीमती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए फायदेमंद है।
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