श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की पत्नी पार्वती की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 108 श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक में पार्वती के एक अलग नाम का उल्लेख किया गया है।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली की रचना 17वीं शताब्दी में हुई थी, और इसका श्रेय संत तुलसीदास को दिया जाता है। यह स्तोत्र पार्वती की दिव्य शक्तियों और गुणों का वर्णन करता है।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली के श्लोक इस प्रकार हैं:
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जय श्री पार्वती! आप देवी दुर्गा हैं, आप संसार की रक्षक हैं।
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आप देवी काली हैं, आप अज्ञान का नाश करती हैं। आप देवी लक्ष्मी हैं, आप सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं।
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आप देवी सरस्वती हैं, आप ज्ञान और विद्या प्रदान करती हैं। आप देवी गौरी हैं, आप सभी के लिए आशीर्वाद हैं।
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आप देवी उमा हैं, आप भगवान शिव की पत्नी हैं। आप देवी पार्वती हैं, आप सभी के लिए आदर्श हैं।
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आप देवी अन्नपूर्णा हैं, आप सभी को भोजन प्रदान करती हैं। आप देवी भवानी हैं, आप सभी को मोक्ष प्रदान करती हैं।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने से कई लाभ होते हैं। यह स्तोत्र भक्तों को पार्वती की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति में भी मदद करता है।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने के कई तरीके हैं। इसे ध्यान में बैठकर या मंत्र की तरह दोहराया जा सकता है। इसे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर पढ़ा जा सकता है।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को कई लाभ प्रदान कर सकता है। यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए पढ़ने के लिए उपयुक्त है।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली का अर्थ निम्नलिखित है:
- श्लोक 1: पार्वती देवी दुर्गा हैं, जो संसार की रक्षक हैं।
- श्लोक 2: पार्वती देवी काली हैं, जो अज्ञान का नाश करती हैं।
- श्लोक 3: पार्वती देवी लक्ष्मी हैं, जो सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं।
- श्लोक 4: पार्वती देवी सरस्वती हैं, जो ज्ञान और विद्या प्रदान करती हैं।
- श्लोक 5: पार्वती देवी उमा हैं, जो भगवान शिव की पत्नी हैं।
- श्लोक 6: पार्वती देवी पार्वती हैं, जो सभी के लिए आदर्श हैं।
- श्लोक 7: पार्वती देवी अन्नपूर्णा हैं, जो सभी को भोजन प्रदान करती हैं।
- श्लोक 8: पार्वती देवी भवानी हैं, जो सभी को मोक्ष प्रदान करती हैं।
श्री अङ्गदेव्याष्टोत्तरशतनामावली एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को कई लाभ प्रदान कर सकता है। यह स्तोत्र सभी भक्तों के लिए पढ़ने के लिए उपयुक्त है।
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