पुत्रप्राप्तिकरं श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् putrapraptikaram shrimahalakshmistotram

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Published October 7, 2023
Updated July 29, 2024

पुत्रप्राप्तिकर श्रीमहालक्ष्मी स्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो पुत्र प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी की आराधना करता है। यह स्तोत्र सात श्लोकों का है, और प्रत्येक श्लोक में महालक्ष्मी से पुत्र प्राप्ति की कामना की जाती है।

पुत्रप्राप्तिकर श्रीमहालक्ष्मी स्तोत्रम की रचना पराशर मुनि ने की थी। यह स्तोत्र करवीर क्षेत्र में स्थित महालक्ष्मी मंदिर में स्थित है।

पुत्रप्राप्तिकर श्रीमहालक्ष्मी स्तोत्रम के श्लोक इस प्रकार हैं:

  1. अनाद्यनन्तरूपां त्वां जननीं सर्वदेहिनाम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप सभी प्राणियों की जननी हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. नामजात्यादिरूपेण स्थितां त्वां परमेश्वरीम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप नाम, जाति आदि रूपों में स्थित हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. व्यक्ताव्यक्तस्वरूपेण कृत्स्नं व्याप्य व्यवस्थिताम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप व्यक्त और अव्यक्त रूपों में स्थित हैं। आप संपूर्ण ब्रह्मांड को व्याप्त और व्यवस्थित रखती हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. भक्तानन्दप्रदां पूर्णां पूर्णकामकरीं पराम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप भक्तों को आनंद प्रदान करती हैं। आप पूर्ण हैं और सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. अन्तर्याम्यात्मना विश्वमापूर्य हृदि संस्थिताम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप अपने आत्मा से संपूर्ण ब्रह्मांड को भर देती हैं। आप मेरे हृदय में स्थित हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. सर्पदैत्यविनाशार्थं लक्ष्मीरूपां व्यवस्थिताम्। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप सर्प और दैत्यों का नाश करने के लिए लक्ष्मी रूप में अवतरित हुई हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

  1. भुक्तिं मुक्तिं च या दातुं संस्थितां करवीरके। श्रीविष्णुरूपिणीं वन्दे महालक्ष्मीं परमेश्वरीम्॥

अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप करवीर क्षेत्र में स्थित हैं। आप भक्ति और मोक्ष प्रदान करती हैं। आप श्रीविष्णु की पत्नी हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूं।

पुत्रप्राप्तिकर श्रीमहालक्ष्मी स्तोत्रम का पाठ करने से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, और यह भक्तों को पुत्र प्राप्ति का वरदान देती है।

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