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Published October 6, 2023
Updated October 6, 2023

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो हिंदू देवी दुर्गा की स्तुति करता है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का एक हिस्सा है और इसे देवी दुर्गा की 32 नामों की एक सूची के रूप में माना जाता है।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली के कुछ प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:

  • स्तोत्र की शुरुआत में, भक्त देवी दुर्गा को नमस्कार करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
  • स्तोत्र के शेष श्लोकों में, देवी दुर्गा के 32 नामों की एक सूची दी गई है। इन नामों में, देवी को विभिन्न रूपों और गुणों में वर्णित किया गया है।
  • स्तोत्र के अंत में, भक्त देवी दुर्गा से आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली के पाठ से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:

  • यह स्तोत्र भक्तों को देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र भक्तों को जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र भक्तों को सभी बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
  • यह स्तोत्र भक्तों को मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली को पढ़ने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:

  1. एकांत स्थान में एक स्वच्छ आसन पर बैठ जाएं।
  2. देवी दुर्गा का ध्यान करें।
  3. स्तोत्र का पाठ करें।
  4. स्तोत्र के अंत में, देवी दुर्गा से प्रार्थना करें।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली के कुछ प्रमुख श्लोक इस प्रकार हैं:

  • प्रथम श्लोक:

ॐ अस्य श्री दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली महामंत्रस्य शिव ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः महासरस्वती देवता श्री दुर्गा नमस्कार मंत्र बीजम् नवार्णो मंत्रशक्तिः श्री दुर्गा स्तवनार्थे जपे विनियोगः

अर्थ:

ॐ इस श्री दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली महामंत्र का ऋषि शिव हैं, छंद अनुष्टुप् है, देवता महासरस्वती हैं, बीज मंत्र श्री दुर्गा नमस्कार मंत्र है, शक्ति नवार्ण मंत्र है, और इस मंत्र का जप श्री दुर्गा की स्तुति के लिए किया जाता है।

  • द्वितीय श्लोक:

नमस्ते अखिलभूताधिपतये, सर्वशक्तिमते, सर्वदुष्टनिवारिणी, सर्वसुखप्रदायिनि।

अर्थ:

हे अखिलभूताधिपतये, हे सर्वशक्तिमान, हे सभी दुष्ट शक्तियों को दूर करने वाली, हे सभी सुखों को प्रदान करने वाली।

  • अंतिम श्लोक:

नमस्ते सर्वकारणात्मने, सर्वगुणात्मने, सर्वमंगलमङ्गल्ये, सर्वकामप्रदायिनि।

अर्थ:

हे सर्वकारणात्मने, हे सर्वगुणात्मने, हे सर्वमंगलमङ्गल्ये, हे सभी कामनाओं को पूरा करने वाली।

दुर्गाद्वात्रिंशन्नामावली एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

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