KARMASU

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Published October 4, 2023
Updated October 4, 2023

मारुतिकवचम् एक हिंदू मंत्र है जो भगवान हनुमान की रक्षा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। यह मंत्र संस्कृत में लिखा गया है और इसमें 11 श्लोक हैं।

मारुतिकवचम् का पाठ इस प्रकार है:

ॐ नमो भगवते मारुते
अंजनिसुताय वायुनाय
श्रीशक्त्या सहिताय
सर्वकार्यसिद्धये

ॐ हनुमान नमस्तुभ्यं
शक्तिहस्ते नमस्तुभ्यं
अष्टसिद्धि नमामि ते
नवनिध्यो नमामि ते

ॐ हनुमान नमस्तुभ्यं
रुद्रावतार नमस्तुभ्यं
पांचमुख नमस्तुभ्यं
शंखचक्रगदाधर नमस्तुभ्यं

ॐ हनुमान नमस्तुभ्यं
पवनपुत्र नमस्तुभ्यं
गदाधारी नमस्तुभ्यं
सर्वशत्रुविनाशक नमस्तुभ्यं

ॐ हनुमान नमस्तुभ्यं
संकटमोचन नमस्तुभ्यं
सर्वव्याधिविनाशक नमस्तुभ्यं
सर्वसुखप्रदायक नमस्तुभ्यं

ॐ हनुमान नमस्तुभ्यं
श्रीरामदूत नमस्तुभ्यं
सर्वकार्यसिद्धये

सर्वमंगलमांगल्ये
शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यंबके गौरी
नाम्नस्तुभ्यं नमो नमः॥

मारुतिकवचम् का अर्थ इस प्रकार है:

  • पहला श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो अंजनी के पुत्र हैं और वायु के देवता हैं। मैं उनको श्रीशक्ति के साथ साथ प्रणाम करता हूं, ताकि सभी कार्यों की सिद्धि हो।
  • दूसरा श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो शक्तिमान हैं और हाथ में गदा धारण करते हैं। मैं उनको आठ सिद्धियों और नौ निधियों के लिए प्रणाम करता हूं।
  • तीसरा श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो रुद्र के अवतार हैं। मैं उनको पांचमुख के रूप में प्रणाम करता हूं, जो हाथ में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं।
  • चौथा श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो वायु के पुत्र हैं। मैं उनको गदाधारी के रूप में प्रणाम करता हूं, जो सभी शत्रुओं का नाश करते हैं।
  • पांचवां श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो संकटों को दूर करने वाले हैं। मैं उनको सभी व्याधियों को दूर करने वाले के रूप में प्रणाम करता हूं। मैं उनको सभी सुखों को देने वाले के रूप में प्रणाम करता हूं।
  • छठा श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो श्रीराम के दूत हैं। मैं उनको सभी कार्यों की सिद्धि के लिए प्रणाम करता हूं।
  • सातवां श्लोक: मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं, जो मंगल के रूप में हैं। मैं उनको शिव के रूप में प्रणाम करता हूं, जो सभी कामनाओं को पूर्ण करते हैं। मैं उनको शरण देने वाले, त्रिशूल धारी और पार्वती के नाम में प्रणाम करता हूं।

मारुतिकवचम् का पाठ आमतौर पर मंगलवार को पढ़ा जाता है, जो भगवान हनुमान का दिन माना जाता है। यह मंत्र भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है।

मारुतिकवचम् के लाभों में शामिल हैं:

  • भगवान हनुमान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना
  • सभी कार्यों की सिद्धि प्राप्त करना
  • शत्रुओं से रक्षा प्राप्त करना
  • अभीष्ट प्राप्ति करना
  • सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त करना

मारुतिकवचम् एक शक्तिशाली मंत्र है जो भक्तों को कई लाभ प्रदान कर सकता है।

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