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Published October 4, 2023
Updated October 4, 2023

श्रीवानर गीता एक प्राचीन ग्रंथ है जो भगवान हनुमान के बारे में है। यह ग्रंथ वानरों द्वारा भगवान हनुमान की स्तुति में रचित भजनों का एक संग्रह है। यह ग्रंथ महर्षि अगस्त्य द्वारा इंद्र की उपस्थिति में सभी ऋषियों को सुनाई गई थी।

श्रीवानर गीता में भगवान हनुमान की स्तुति निम्नलिखित है:

  • भगवान हनुमान एक महान शक्तिशाली देवता हैं। वे पवन देवता के पुत्र हैं और वे अष्टसिद्धि और नवनिधि के स्वामी हैं।
  • भगवान हनुमान एक महान भक्त हैं। वे भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और उन्होंने अपने जीवन को भगवान राम की सेवा में समर्पित कर दिया है।
  • भगवान हनुमान एक महान योद्धा हैं। उन्होंने भगवान राम की सहायता से रावण पर विजय प्राप्त की और सीता को लंका से मुक्त कराया।

श्रीवानर गीता में भगवान हनुमान की स्तुति के माध्यम से, वानरों ने भगवान हनुमान की शक्ति, भक्ति और वीरता की प्रशंसा की है।

श्रीवानर गीता एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो भगवान हनुमान के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह ग्रंथ भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

श्रीवानर गीता के कुछ प्रमुख भजनों का अर्थ निम्नलिखित है:

  • भजन 1:

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

अर्थ:

गुरुदेव के चरण कमल की रज से अपने मन को शुद्ध करूं। भगवान राम के निर्मल यश का वर्णन करूं, जो चारों फल प्रदान करता है।

  • भजन 2:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।

अर्थ:

जय हो ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान जी, जय हो कपीस के रूप में तीनों लोकों को उजागर करने वाले हनुमान जी। रामदूत, अतुलनीय बल वाले हनुमान जी, अंजनी पुत्र, पवन के पुत्र हनुमान जी।

  • भजन 3:

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी। कृपा करहु गुरुदेव की, ज्ञान बुद्धि दो हमको दे।

अर्थ:

महावीर, विक्रम, बजरंगी, बुद्धिहीनता को दूर करने वाले और बुद्धि के साथी। कृपा करें गुरुदेव की, हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करें।

  • भजन 4:

राम चरण में ध्यान लगाए, जपहु हनुमान चालीसा। तेहि पर राम कृपा भारी, होए सिद्धि सकल अमराई।

अर्थ:

राम के चरणों में ध्यान लगाकर, हनुमान चालीसा का जप करें। उस पर राम की कृपा बहुत होती है, और सभी सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं।

  • भजन 5:

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परम शक्ति धामा। तुम सम कोउ नहीं जगत में, तुम हो एक राम दूता।

अर्थ:

चारों युगों में तुम्हारा प्रताप, है परम शक्ति का धाम। तुम जैसा कोई नहीं है इस संसार में, तुम एक राम के दूत हो।

श्रीवानर गीता एक शक्तिशाली ग्रंथ है जो भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

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