Ganesh Stotra

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र…..

Sankatnashan Ganesh Stotra : संकट नाशन गणेश स्तोत्र: संकट नाशन गणेश स्तोत्र एक बहुत ही मददगार और फायदेमंद स्तोत्र है। इसके पाठ से आप अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, मुश्किल समय से बाहर निकल सकते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी पसंद के अनुसार खुशहाल बना सकते हैं।

यह भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह सभी तरह की परेशानियों को दूर करता है। रोज़ाना संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से इंसान हर तरह की मुश्किलों से आज़ाद हो जाता है। भगवान गणेश सभी परेशानियों को हल करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और संतोष लाते हैं। Ganesh Stotra किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। प्राचीन पूजा-पद्धति में भगवान गणेश का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वेदों और पुराणों में भगवान गणेश की पूजा के कई फायदों के बारे में बताया गया है।

सुबह-सुबह भगवान गणेश को दूर्वा (एक प्रकार की घास) चढ़ाने से इंसान सभी बाधाओं को पार कर सकता है। Ganesh Stotra घर के मुख्य दरवाज़े पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति लगाना फायदेमंद होता है। भगवान गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाने चाहिए। इससे समृद्धि आती है और इंसान कभी गरीब नहीं रहता।

संकट नाशन गणेश स्तोत्र के फायदे:

भगवान गणेश का संबंध ब्रह्मा, विष्णु और शिव से माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी मुश्किलों पर जीत हासिल करने में सक्षम होता है। भगवान गणेश अपार ज्ञान के स्वामी हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं।

हिंदू धर्म में, किसी भी काम को पूरा करने के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। Ganesh Stotra शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं। इन्हीं में से एक तरीका यह स्तोत्र है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, सिंदूर, घी, दीपक और मोदक ज़रूर अर्पित करने चाहिए।

यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए:

जो व्यक्ति जीवन में सफलता पाना चाहता है, Ganesh Stotra उसे बेहतर नतीजों के लिए ‘संकट नाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए।

नारद उवाच –

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।। 1 ।।

प्रथमं वक्रतुंडं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।। 2 ।।

लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाऽष्टमम् ।। 3 ।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।। 4 ।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम् ।। 5 ।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ।। 6 ।।

जपेदगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।। 7 ।।

अष्टानां ब्राम्हणानां च लिखित्वा य: समर्पयेत ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।। 8 ।।

।। इति संकट नाशन गणेश…….

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