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Rang Panchami 2026

Rang Panchami 2026 Mein Kab: हिंदू धर्म में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले होली महापर्व का उल्लास केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता है। रंग और उमंग का यह त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि तक पूरे हर्षोल्लास के साथ जारी रहता है। सनातन परंपरा में इस पावन पंचमी तिथि को ‘रंग पंचमी’ के रूप में जाना जाता है।

इस वर्ष Rang Panchami 2026 का पर्व बहुत ही खास होने वाला है। इसे ‘देवताओं की होली’ (Dev Panchami) के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और अदृश्य रूप में भक्तों के साथ होली खेलते हैं। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और भारत के कई अन्य हिस्सों में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, होली के ठीक पांच दिन बाद यह त्योहार आता है। Rang Panchami 2026 जहाँ होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर सांसारिक खुशियां मनाते हैं, वहीं इस दिन की छटा पूरी तरह से आध्यात्मिक और दैवीय होती है। इस दिन हवा में रंग और गुलाल उड़ाया जाता है ताकि वह रंग देवताओं तक पहुँच सके।

ऐसा माना जाता है कि वातावरण में उड़ने वाले रंग और गुलाल से ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के नकारात्मक दोष नष्ट हो जाते हैं। आइए हम Rang Panchami 2026 से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण जानकारी, सही तिथि, शुभ मुहूर्त, राधा-कृष्ण की विशेष पूजा विधि और इस त्योहार के पीछे की पौराणिक कथाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

Rang Panchami 2026 की सही तिथि और पंचांग (Date and Timings)

हर साल लोगों में इस बात को लेकर थोड़ा संशय रहता है कि यह पंचमी किस दिन मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है।

पंचमी तिथि की शुरुआत: 07 मार्च 2026 को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर होगी।

पंचमी तिथि का समापन: अगले दिन, 08 मार्च 2026 को रात 09 बजकर 10 मिनट पर होगा।

चूँकि हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार को मनाने के लिए उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को आधार माना जाता है, इसलिए Rang Panchami 2026 का यह महापर्व 08 मार्च 2026 (रविवार) को पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

पूजा के लिए Rang Panchami 2026 पर बन रहे शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

किसी भी देवी-देवता की पूजा यदि शुभ मुहूर्त में की जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। Rang Panchami 2026 ज्योतिषीय पंचांगों के अनुसार, 08 मार्च को पूजा-अर्चना के लिए कई अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की आराधना कर सकते हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 01 मिनट से लेकर 05 बजकर 50 मिनट तक। (यह समय ध्यान, मंत्र जाप और मानसिक शांति के लिए सबसे उत्तम है)।

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक। (यह दिन का सबसे पवित्र और दोषमुक्त समय माना जाता है)।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 06 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक।

रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानें इसका पौराणिक महत्व

इस पर्व को देव पंचमी या कृष्ण पंचमी भी कहा जाता है। इसके पीछे कई गहरी पौराणिक कथाएं और मान्यताएं छिपी हुई हैं।

कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन माता राधा रानी और अन्य गोपियों व ग्वालों के साथ एक बहुत ही अद्भुत और अलौकिक होली खेली थी। Rang Panchami 2026 भगवान श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम और इस होली को देखने के लिए स्वर्ग लोक से सभी देवी-देवता भी पृथ्वी पर प्रकट हुए थे और उन्होंने राधा-कृष्ण पर आकाश से सुंदर पुष्पों की वर्षा की थी।

यही कारण है कि आज भी लोग इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की विशेष रूप से पूजा करते हैं और हवा में अबीर-गुलाल उड़ाकर देवी-देवताओं का स्वागत करते हैं।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस दिन वातावरण में उड़ने वाले गुलाल से देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और अपार सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। विशेष रूप से जो लोग दांपत्य जीवन (Married Life) में सुख, प्रेम और सौभाग्य की कामना करते हैं, उनके लिए Rang Panchami 2026 का दिन बहुत ही फलदायी साबित होने वाला है।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में रंग पंचमी की भव्यता (Regional Celebrations)

यद्यपि यह त्योहार पूरे भारत में मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसका एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में इस दिन एक विश्व प्रसिद्ध ‘गेर’ (Ger) निकाली जाती है, Rang Panchami 2026 जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। सड़कों पर पानी और रंगों की बौछार की जाती है, Rang Panchami 2026 जो कि आपसी भाईचारे और उल्लास का एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन) में होली का यह 5वां दिन कृष्ण-भक्ति के सबसे चरम पर होता है। मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन होते हैं और ठाकुर जी (श्री कृष्ण) को विशेष छप्पन भोग लगाए जाते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण को कौन सा रंग अर्पित करें? (Lucky Colors)

इस दिन रंगों का बहुत बड़ा महत्व होता है। भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को कुछ विशेष रंग बहुत प्रिय हैं। यदि आप इस दिन लाल या गुलाबी रंग का गुलाल उन्हें अर्पित करते हैं, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। Rang Panchami 2026 लाल रंग प्रेम, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है, Rang Panchami 2026 जबकि गुलाबी रंग करुणा और स्नेह को दर्शाता है।

ऐसा करने से शीघ्र ही भगवान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन काले या गहरे नीले रंगों का प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह एक अत्यंत पवित्र और सात्विक त्योहार है।

Rang Panchami 2026 की पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

इस पवित्र पर्व का पूरा पुण्य और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सही विधि-विधान से पूजा करना आवश्यक है। आइए जानते हैं कि इस दिन कैसे पूजा करनी चाहिए:

सुबह की शुरुआत: सूर्योदय से पूर्व (संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में) उठकर स्नान कर लें और स्वच्छ, धुले हुए वस्त्र धारण करें। तन और मन से पूरी तरह पवित्र हो जाएं।

पूजा स्थल की तैयारी: अपने घर के पूजा कक्ष या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक साफ चौकी रखें। उस चौकी पर एक लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं।

मूर्ति स्थापना: इस चौकी पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की सुंदर मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। आप चाहें तो लक्ष्मी-नारायण (भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी) की तस्वीर भी रख सकते हैं।

स्नान और वस्त्र: भगवान की मूर्ति को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और सुंदर पुष्पमाला अर्पित करें।

रंग और गुलाल अर्पण: अब भगवान के चरणों में लाल और गुलाबी रंग का सुगंधित अबीर और गुलाल, तथा सुगंधित पुष्प अर्पित करें। यह भावना रखें कि आप साक्षात भगवान के साथ होली खेल रहे हैं।

नैवेद्य और भोग: पूजा के दौरान भगवान को रोली, चंदन, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान श्री कृष्ण को माखन और मिश्री बहुत प्रिय है, इसलिए इसका भोग अवश्य लगाएं। इसके अलावा आप मौसमी फल और मिठाइयां भी अर्पित कर सकते हैं।

मंत्र जाप: भगवान के सामने बैठकर उनके मंत्रों का या स्तोत्र का पाठ करके मंगलकामना करें।

आरती और प्रसाद: अंत में विधिपूर्वक आरती करें और प्रसाद सभी परिवारजनों में बांटें।

    श्री कृष्ण की विशेष आरती (Aarti Kunj Bihari Ki)

    पूजा के समापन पर भगवान की आरती गाना बहुत ही कल्याणकारी माना जाता है। यहां इस पवित्र आरती के कुछ अंश दिए जा रहे हैं, जिन्हें आपको Rang Panchami 2026 की पूजा में जरूर शामिल करना चाहिए:

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला । गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक । चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥

    आरती पूरी होने के बाद भगवान से अपने घर-परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    प्रश्न 1: यह पर्व होली के कितने दिन बाद आता है ?

    उत्तर: हिंदू धर्म में यह पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो मुख्य होली (धुलंडी) के ठीक 5 दिन बाद आता है।

    प्रश्न 2: इस दिन हवा में गुलाल क्यों उड़ाया जाता है ?

    उत्तर: धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हवा में उड़ाए गए अबीर-गुलाल से देवी-देवता आकर्षित होते हैं और प्रसन्न होकर भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

    प्रश्न 3: इस दिन किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है ?

    उत्तर: इस दिन विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण, राधा रानी और लक्ष्मी-नारायण की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

    प्रश्न 4: राधा-कृष्ण को कौन सा रंग चढ़ाना शुभ होता है ?

    उत्तर: इस दिन राधा-कृष्ण को लाल और गुलाबी रंग का गुलाल अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    रंग पंचमी मात्र एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति हमारे प्रेम, समर्पण और ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा के साथ जुड़ने का एक बहुत ही सुंदर माध्यम है। यह दिन हमें सिखाता है कि जिस प्रकार रंग आपस में मिलकर एक नई छटा बिखेरते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन से सारे गिले-शिकवे भुलाकर प्रेम और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। हवा में उड़ता हुआ रंग हमारी प्रार्थनाओं को सीधे देवताओं तक पहुँचाने का कार्य करता है।

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