Pitru Paksha

Pitru Paksha 2025 Date: पितृ पक्ष जानें क्या करें और क्या न करें, ताकि पितर रहें प्रसन्न और घर में आए सुख-समृद्धि !

Pitru Paksha 2025: सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है और यह अवधि हमारे पूर्वजों को समर्पित होती है। साल में ये 15 दिन पितरों के लिए होते हैं। मान्यता है कि इन दिनों हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि Pitru Paksha पितृपक्ष में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे खुश होकर अपने वंशज को आशीर्वाद भी देते हैं।

अगर पितृपक्ष के दौरान कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए, तो पूर्वज नाराज़ हो सकते हैं, जिससे घर में कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। ये परेशानियां शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से नज़र आ सकती हैं। आइए जानते हैं Pitru Paksha पितृ पक्ष 2025 कब से शुरू हो रहा है, क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

पितृ पक्ष 2025 कब से शुरू हो रहा है?(When does Pitru Paksha 2025 start)

Pitru Paksha: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि को हो रही है। 7 सितंबर को रात 1:41 बजे पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगा और इसका समापन 21 सितंबर को अमावस्या तिथि के दिन होगा। यह भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक चलता है।

पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए? (Pitru Paksha mein kya karna chahiye)

पितृपक्ष Pitru Paksha में पितरों की कृपा प्राप्त करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष कार्य करने चाहिए:

1. श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान: पितृपक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार, इससे पितरों को मोक्ष मिलता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

2. दान-पुण्य: इस दौरान दान-पुण्य का विशेष विधान है। दान-पुण्य और तर्पण करने से परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है और सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं।

    ब्राह्मणों को भोजन: श्राद्ध के दिन किसी ब्राह्मण को घर पर बुलाकर भोजन कराना चाहिए। भोजन के बाद उन्हें अपनी समर्थ अनुसार दक्षिणा दें और उनकी पूजा-अर्चना करें। ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है।

    गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद: गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपनी समर्थ अनुसार दान देना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए।

    पक्षियों को दाना-पानी: पितृपक्ष के दौरान पक्षियों को कुछ दान देना भी बहुत शुभ माना जाता है।

3. दैनिक अनुष्ठान: प्रतिदिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके जल में काला तिल डालकर तर्पण करना चाहिए।

4. सात्विक जीवन: पितृपक्ष के 15 दिनों तक घर में सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इस दौरान घर में साफ-सफाई रखें और मन को पवित्र रखें।

5. पितृ दोष से मुक्ति: मान्यता है कि इस दौरान पितरों से जुड़े अनुष्ठान करने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

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पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये काम! (Pitru Paksha mein kya na karein)

पितृपक्ष में कुछ ऐसे काम हैं जो बिल्कुल भी नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पूर्वज नाराज़ हो सकते हैं और घर पर बुरा असर पड़ सकता है:

1. तामसिक भोजन और मदिरा सेवन: लहसुन, प्याज और मांसाहार से पूरी तरह बचना चाहिए। पितृपक्ष के दौरान इन चीजों का सेवन और मदिरापान वर्जित माना जाता है।

2. मांगलिक कार्य: पितृपक्ष के दौरान जनेऊ, शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश इत्यादि जैसे कोई भी मांगलिक कार्य बिल्कुल भी नहीं करने चाहिए। इसका बुरा प्रभाव झेलना पड़ सकता है.

3. नया निर्माण या खरीदारी: अगर आपने कहीं ज़मीन ली हो और नए घर का निर्माण करना चाह रहे हैं, तो पितृपक्ष में बिल्कुल भी शुरुआत न करें। नया घर, प्रॉपर्टी या नया वाहन भी बिल्कुल भी न खरीदें, इससे पितर नाराज़ हो सकते हैं।

4. पशु-पक्षियों को भूखा न लौटाएं: अगर पितृपक्ष के दौरान आपके घर की चौखट पर गाय, काला कुत्ता या काला कौवा आ जाए तो उन्हें भूखे बिल्कुल भी न लौटाएं। ऐसा करने से पितर नाराज़ हो सकते हैं।

5. केश और नख कर्तन: पितृपक्ष में दाढ़ी, मूंछ, बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। यह अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितर नाराज़ हो जाते हैं।

6. जमीन में उगने वाली सब्जियां: पितृपक्ष में जमीन में उगने वाली सब्जियां जैसे आलू, बैंगन, खीरा, मूली, अरबी, साग ये सब नहीं खाना चाहिए।

निष्कर्ष

इन नियमों और सावधानियों का पालन करके आप पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को प्रसन्न कर सकते हैं। इससे आपको पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होगा और घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी। इन दिनों श्रद्धा और विश्वास के साथ पितरों का स्मरण करना अत्यंत ज़रूरी है

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