July 9, 2026

Hanuman Bahuk

Hanuman Bahuk : हनुमान बाहुक

Hanuman Bahuk हनुमान बाहुक: भगवान हनुमान को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, माता सीता के आशीर्वाद से भगवान हनुमान अमर हैं। माना जाता है कि आज भी जब-जब हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामचरितमानस या रामायण का पाठ किया जाता है, भगवान हनुमान वहां जरूर आते हैं। Hanuman Bahuk हनुमान बाहुक, हनुमान जी को समर्पित एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली प्रार्थना है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा था। श्री तुलसीदास ने हनुमान बाहुक तब लिखा था जब उन्हें हाथ में असहनीय दर्द हो रहा था और किसी भी दवा या मंत्र से उन्हें आराम नहीं मिल रहा था; फिर भगवान हनुमान जी की कृपा से वह भयानक दर्द दूर हो गया। इसमें 44 छंद हैं। माना जाता है कि 40 दिनों तक लगातार इस बाहुक का पाठ करने से कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों को ठीक करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है। एक बार, तुलसीदास को अपने एक हाथ और कंधे में असहनीय दर्द हुआ था और वात (वायु दोष) तथा त्वचा पर निकले दानों के कारण वे बहुत कष्ट में थे। दवा, ताबीज और मंत्र जैसे कई उपाय किए गए, लेकिन हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। Hanuman Bahuk तब उन्होंने हनुमान जी की महिमा और महानता का गुणगान करते हुए हनुमान बाहुक की रचना की और उनसे अपने शारीरिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना की। चमत्कारिक रूप से हनुमान जी की कृपा से तुलसीदास को उस असहनीय दर्द से तुरंत राहत मिल गई। इसे हनुमान बाहुक के नाम से जाना जाता है। इसमें 44 छंद हैं। इसमें छप्पय, झूलना, सवैया और घनाक्षरी छंदों में क्रमशः दो, एक, पांच और 36 छंद हैं। हनुमान चालीसा को ध्यान से पढ़ने और समझने पर पता चलता है Hanuman Bahuk कि हनुमान इस कलयुग के जागृत देवता हैं, जो भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। शर्त यह है कि भक्त को अपने कर्मों के प्रति सावधान रहना चाहिए। Hanuman Bahuk बुरे काम करने वाले का कोई साथ नहीं दे सकता। हनुमान बाहुक के लाभ: जब कलयुग शुरू हुआ और तुलसीदास को दर्द हुआ, तब उन्होंने हनुमान बाहुक लिखा। माना जाता है Hanuman Bahuk कि यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में बहुत फायदेमंद है। दर्द में इससे कई लाभ मिल सकते हैं। Hanuman Bahuk यह तब भी फायदेमंद है जब आपको चलने-फिरने में समस्या हो। Hanuman Bahuk यह किसी भी ऐसी बीमारी या छिपी हुई बीमारी में फ़ायदेमंद है जो आपकी मेडिकल रिपोर्ट में नहीं आती है। किसे करना चाहिए इस ‘बाहुक’ का पाठ: जो लोग पुरानी बीमारियों से परेशान हैं, Hanuman Bahuk उन्हें नियमित रूप से हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए। हनुमान बाहुक : Hanuman Bahuk ।। श्रीगणेशाय नमः ।। श्रीजानकीवल्लभो विजयतेश्रीमद्-गोस्वामि-तुलसीदास-कृतहनुमान बाहुक: सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु ।भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।। गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ।जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।। कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट ।गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट ।। 1 ।। भावार्थ/हनुमान बाहुक: जिनके शरीर का रंग उदयकाल के सूर्य के समान है, जो समुद्र लाँघकर श्रीजानकीजी के शोक को हरने वाले, आजानु-बाहु, डरावनी सूरत वाले और मानो काल के भी काल हैं। लंका-रुपी गम्भीर वन को, जो जलाने योग्य नहीं था, उसे जिन्होंने निःसंक जलाया और जो टेढ़ी भौंहो वाले तथा बलवान् राक्षसों के मान और गर्व का नाश करने वाले हैं, Hanuman Bahuk तुलसीदास जी कहते हैं – वे श्रीपवनकुमार सेवा करने पर बड़ी सुगमता से प्राप्त होने वाले, अपने सेवकों की भलाई करने के लिये सदा समीप रहने वाले तथा गुण गाने, प्रणाम करने एवं स्मरण और नाम जपने से सब भयानक संकटों को नाश करने वाले हैं ।। 1 ।। स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रबि-तरुन-तेज-घन ।उर बिसाल भुज-दंड चंड नख-बज्र बज्र-तन ।। पिंग नयन, भृकुटी कराल रसना दसनानन ।कपिस केस, करकस लँगूर, खल-दल बल भानन ।। कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति बिकट ।संताप पाप तेहि पुरुष पहिं सपनेहुँ नहिं आवत निकट ।। 2 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक वे सुवर्ण-पर्वत (सुमेरु) – के समान शरीरवाले, करोड़ों मध्याह्न के सूर्य के सदृश अनन्त तेजोराशि, विशाल-हृदय, अत्यन्त बलवान् भुजाओं वाले तथा वज्र के तुल्य नख और शरीरवाले हैं, भौंह, जीभ, दाँत और मुख विकराल हैं, Hanuman Bahuk बाल भूरे रंग के तथा पूँछ कठोर और दुष्टों के दल के बल का नाश करने वाली है। तुलसीदासजी कहते हैं – श्रीपवनकुमार की डरावनी मूर्ति जिसके हृदय में निवास करती है, उस पुरुष के समीप दुःख और पाप स्वप्न में भी नहीं आते ।। 2 ।। झूलना – पञ्चमुख-छमुख-भृगु मुख्य भट असुर सुर,सर्व-सरि-समर समरत्थ सूरो ।बाँकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली,बेद बंदी बदत पैजपूरो ।। जासु गुनगाथ रघुनाथ कह, जासुबल,बिपुल-जल-भरित जग-जलधि झूरो ।दुवन-दल-दमनको कौन तुलसीस है,पवन को पूत रजपूत रुरो ।। 3 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक शिव, स्वामि-कार्तिक, परशुराम, दैत्य और देवता-वृन्द सबके युद्ध रुपी नदी से पार जाने में योग्य योद्धा हैं । वेदरुपी वन्दीजन कहते हैं – Hanuman Bahuk आप पूरी प्रतिज्ञा वाले चतुर योद्धा, बड़े कीर्तिमान् और यशस्वी हैं । Hanuman Bahuk जिनके गुणों की कथा को रघुनाथ जी ने श्रीमुख से कहा तथा जिनके अतिशय पराक्रम से अपार जल से भरा हुआ संसार-समुद्र सूख गया । तुलसी के स्वामी सुन्दर राजपूत (पवनकुमार) – के बिना राक्षसों के दल का नाश करने वाला दूसरा कौन है ? (कोई नहीं) ।। 3 ।। घनाक्षरी भानुसों पढ़न हनुमान गये भानु मन-अनुमानिसिसु-केलि कियो फेरफार सो ।पाछिले पगनि गम गगन मगन-मन,क्रम को न भ्रम, कपि बालक बिहार सो ।। कौतुक बिलोकि लोकपाल हरि हर बिधि,लोचननि चकाचौंधी चित्तनि खभार सो ।बल कैंधौं बीर-रस धीरज कै, साहस कै,तुलसी सरीर धरे सबनि को सार सो ।। 4 ।। भावार्थ:/हनुमान बाहुक सूर्य भगवान् के समीप में हनुमान् जी विद्या पढ़ने के लिये गये, सूर्यदेव ने मन में बालकों का खेल समझकर बहाना किया ( कि मैं स्थिर नहीं रह सकता और Hanuman Bahuk बिना आमने-सामने के पढ़ना-पढ़ाना असम्भव है) । हनुमान् जी ने भास्कर की ओर मुख करके पीठ की तरफ पैरों से प्रसन्न-मन आकाश-मार्ग में बालकों के खेल के समान गमन किया और उससे पाठ्यक्रम में किसी प्रकार का भ्रम नहीं हुआ । Hanuman Bahuk इस अचरज के खेल को देखकर इन्द्रादि लोकपाल, विष्णु, रुद्र और ब्रह्मा की आँखें चौंधिया गयीं तथा चित्त में खलबली-सी उत्पन्न हो गयी

Hanuman Bahuk : हनुमान बाहुक Read More »

Tandav Stotram

Hanuman Tandav Stotram : श्री हनुमत तांडव स्तोत्र….

श्री हनुमत तांडव स्तोत्र हिंदी पाठ : Hanuman Tandav Stotram in Hindi वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् ।रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम् ॥ भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं,दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् ।सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं,समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥ १ ॥ सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितंवचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ।इति प्लवङ्गनाथभाषितं Tandav Stotram निशम्य वानराऽधिनाथआप शं तदा, स रामदूत आश्रयः ॥ २ ॥ सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना,भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।कृतौ हि कोसलाधिपौ, कपीशराजसन्निधौ,विदहजेशलक्ष्मणौ, स मे शिवं करोत्वरम् ॥ ३ ॥ सुशब्दशास्त्रपारगं, विलोक्य रामचन्द्रमाः,कपीश नाथसेवकं, Tandav Stotram समस्तनीतिमार्गगम् ।प्रशस्य लक्ष्मणं प्रति, प्रलम्बबाहुभूषितःकपीन्द्रसख्यमाकरोत्, स्वकार्यसाधकः प्रभुः ॥ ४ ॥ प्रचण्डवेगधारिणं, नगेन्द्रगर्वहारिणं,फणीशमातृगर्वहृद्दृशास्यवासनाशकृत् ।विभीषणेन सख्यकृद्विदेह जातितापहृत्,सुकण्ठकार्यसाधकं, नमामि यातुधतकम् ॥ ५ ॥ नमामि पुष्पमौलिनं, सुवर्णवर्णधारिणंगदायुधेन भूषितं, किरीटकुण्डलान्वितम् ।सुपुच्छगुच्छतुच्छलङ्कदाहकं सुनायकंविपक्षपक्षराक्षसेन्द्र-सर्ववंशनाशकम् ॥ ६ ॥ रघूत्तमस्य सेवकं नमामि लक्ष्मणप्रियंदिनेशवंशभूषणस्य Tandav Stotram मुद्रीकाप्रदर्शकम् ।विदेहजातिशोकतापहारिणम् प्रहारिणम्सुसूक्ष्मरूपधारिणं नमामि दीर्घरूपिणम् ॥ ७ ॥ नभस्वदात्मजेन भास्वता त्वया कृतामहासहा यता यया द्वयोर्हितं ह्यभूत्स्वकृत्यतः ।सुकण्ठ आप तारकां रघूत्तमो विदेहजांनिपात्य वालिनं प्रभुस्ततो दशाननं खलम् ॥ ८ ॥ इमं स्तवं कुजेऽह्नि यः पठेत्सुचेतसा नरःकपीशनाथसेवको Tandav Stotram भुनक्तिसर्वसम्पदः ।प्लवङ्गराजसत्कृपाकताक्षभाजनस्सदा नशत्रुतो भयं भवेत्कदापि तस्य नुस्त्विह ॥ ९ ॥ नेत्राङ्गनन्दधरणीवत्सरेऽनङ्गवासरे ।लोकेश्वराख्यभट्टेन हनुमत्ताण्डवं कृतम् ॥ १० ॥ ॥ इति श्री हनुमत तांडव स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Hanuman Tandav Stotram : श्री हनुमत तांडव स्तोत्र…. Read More »

Gupt Navratri

Gupt Navratri 2026 Date And Time : गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू, जानें घटस्थापना का सटीक मुहूर्त, माता का वाहन और दस महाविद्याओं का महा-रहस्य….

Gupt Navratri 2026 Mein kab Se Start ho Rahi Hai : सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा पर्व नवरात्रि को माना जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो हम सभी बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं और इन्हें पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास, भव्य पंडालों और डांडिया के साथ मनाया जाता है। लेकिन, हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि अत्यंत रहस्यमयी, असीम शक्तिशाली और प्रभावशाली मानी जाती है। आम गृहस्थों के अलावा, सनातन धर्म में कठोर साधकों और तांत्रिकों के लिए Gupt Navratri 2026 का समय किसी बहुत बड़े और जाग्रत उत्सव से कम नहीं है। इस विशेष और पवित्र नवरात्रि में केवल देवी दुर्गा के नौ साधारण रूपों की ही नहीं, बल्कि दस महाविद्याओं की बहुत ही गहरी और गुप्त साधना की जाती है। इन दस महाविद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल हैं। Gupt Navratri 2026 Date And Time : गुप्त नवरात्रि जुलाई से शुरू, जानें घटस्थापना का सटीक मुहूर्त….. पंचांग की सटीक गणना: कब से है Gupt Navratri 2026 ? आइए सबसे पहले विस्तार से जानते हैं कि इस साल Gupt Navratri 2026 की एकदम सही और आधिकारिक तिथियां क्या हैं। पंचांग की एकदम सटीक गणनाओं के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ माह की यह गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 22 जुलाई तक पूरी अगाध श्रद्धा और सात्विक नियमों के साथ मनाई जाएगी। इस नौ दिनों के महाव्रत का विधिवत पारण 23 जुलाई को किया जाएगा। इस बार के पंचांग में एक बहुत ही खास और दुर्लभ बात यह सामने आ रही है कि तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही दिन यानी 17 जुलाई को पड़ रहा है। इसलिए Gupt Navratri 2026 का यह स्वर्णिम अवसर आपकी आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बेहद दुर्लभ और फलदायी माना जा रहा है। माता का वाहन (नौका) और इसका अत्यंत शुभ संकेत : The Mother Goddess’s vehicle (the boat) and its highly auspicious significance. धार्मिक शास्त्रों में यह नियम है कि नवरात्रि किस दिन से शुरू हो रही है, उसी वार के आधार पर यह तय होता है कि माता धरती पर किस वाहन से पधारेंगी। इस वर्ष Gupt Navratri 2026 की भव्य शुरुआत बुधवार के दिन से हो रही है। ज्योतिष और देवी भागवत पुराण के कड़े नियमों के अनुसार, जब भी नवरात्रि बुधवार से शुरू होती है, तो माता दुर्गा का धरती पर आगमन ‘नौका’ (Boat) यानी नाव पर होता है। नौका पर माता का आना संसार के लिए एक बेहद शुभ और कल्याणकारी संकेत माना गया है। यह इस बात का साक्षात प्रतीक है कि इस साल अच्छी वर्षा होगी, किसानों की कृषि में भारी उन्नति होगी और चारों ओर अपार सुख-समृद्धि का वास होगा। विशेष रूप से कृषि प्रधान क्षेत्रों (जैसे महाकौशल अंचल) के लिए इसे अत्यधिक शुभ माना जा रहा है। जो भी सच्चा भक्त Gupt Navratri 2026 में सच्चे मन से माता की पूजा करेगा, मान्यता है कि माता उसके जीवन के सारे कष्टों को अपनी नौका में बिठाकर हमेशा के लिए दूर ले जाएंगी। कलश स्थापना (घटस्थापना) का अत्यंत शुभ और दुर्लभ मुहूर्त : The extremely auspicious and rare auspicious moment (Muhurat) for Kalash Sthapana (Ghatasthapana): किसी भी वैदिक व्रत का पूर्ण और अचूक फल इंसान को तभी मिलता है जब कलश स्थापना एकदम सही मुहूर्त में की जाए। Gupt Navratri 2026 में आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 03:12 (3:14) बजे से ही आरंभ हो जाएगी और इसका पूर्ण समापन अगले दिन 15 जुलाई को सुबह 11:50 (11:52) बजे होगा। हमारे धर्म में उदया तिथि की महान परंपरा को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए कलश स्थापना 15 जुलाई को ही की जाएगी। घटस्थापना का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त 15 जुलाई 2026 को सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इसमें भी विशेष रूप से सुबह 08:02 बजे ‘हर्षण योग’ और ‘पुष्य नक्षत्र’ का एक अत्यंत ही दुर्लभ व चमत्कारी संयोग बन रहा है। हर्षण योग में Gupt Navratri 2026 की कलश स्थापना करने और अनुष्ठान शुरू करने से जीवन में भारी सुख, अपार आनंद और सभी रुकी हुई मनोकामनाओं की तुरंत पूर्ति होती है। Gupt Navratri 2026 का संपूर्ण 9-दिवसीय कैलेंडर : Complete 9-Day Calendar for Gupt Navratri 2026 भक्तों की सुविधा के लिए इस अत्यंत पावन Gupt Navratri 2026 का संपूर्ण और विस्तृत कैलेंडर कुछ इस प्रकार रहेगा: 15 जुलाई, बुधवार: पहला दिन – पवित्र घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा। 16 जुलाई, गुरुवार: दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी की शांत आराधना। 17 जुलाई, शुक्रवार: तीसरा व चौथा दिन (एक साथ) – मां चंद्रघंटा और मां कूष्माण्डा की पूजा। 18 जुलाई, शनिवार: पांचवां दिन – मां स्कंदमाता की पूजा। 19 जुलाई, रविवार: छठा दिन – मां कात्यायनी की पूजा। 20 जुलाई, सोमवार: सातवां दिन – मां कालरात्रि की प्रचंड पूजा। 21 जुलाई, मंगलवार: आठवां दिन (दुर्गा अष्टमी) – मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन। 22 जुलाई, बुधवार: नौवां दिन (महानवमी) – मां सिद्धिदात्री की आराधना और हवन। 23 जुलाई, गुरुवार: महाव्रत का विधिवत पारण। दस महाविद्याओं की तांत्रिक साधना और सिद्धपीठों का महत्व :The Tantric Sadhana of the Ten Mahavidyas and the Significance of Siddha Peethas प्राचीन काल में Gupt Navratri 2026 जैसे परम पावन और ऊर्जावान समय का ज्ञान केवल सिद्ध ऋषि-मुनियों और महान साधकों तक ही सीमित हुआ करता था। वे इस गुप्त काल में सांसारिक मोह माया से पूरी तरह दूर होकर दस महाविद्याओं की अत्यंत कठोर उपासना करते थे, ताकि उन्हें विशेष आध्यात्मिक और अलौकिक शक्तियां प्राप्त हो सकें। आज के आधुनिक समय में भी, इस पावन Gupt Navratri 2026 के दौरान देश के कई हिस्सों में विशेष अनुष्ठान होते हैं। उदाहरण के लिए, नर्मदा तट के कई प्राचीन मठों, भेड़ाघाट के प्रसिद्ध चौसठ योगिनी मंदिर, गौरीघाट, बाजनामठ और मदन महल स्थित शारदा देवी मंदिर जैसे प्रमुख सिद्धपीठों में बहुत ही विशेष तांत्रिक अनुष्ठान और गुप्त पूजा……

Gupt Navratri 2026 Date And Time : गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू, जानें घटस्थापना का सटीक मुहूर्त, माता का वाहन और दस महाविद्याओं का महा-रहस्य…. Read More »