“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ललिता त्रिपुर सुंदरी देव्यै नमः”
Lalita Jayanti 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में दश महाविद्याओं का सर्वोच्च स्थान है, और इन्हीं में से एक अत्यंत सौम्य, तेजस्वी और शीघ्र फल देने वाली शक्ति हैं—माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी। माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला Lalita Jayanti 2026 का पर्व केवल एक सामान्य पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा के अवतरण का उत्सव है जिसने देवताओं को भय से मुक्त किया और सृष्टि में पुनः प्रेम और सौंदर्य की स्थापना की।
वर्ष 2026 में यह पावन पर्व बहुत ही शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। यदि आप अपने जीवन में भौतिक सुख, वैवाहिक आनंद और आध्यात्मिक मोक्ष की कामना रखते हैं, तो Lalita Jayanti 2026 आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। आज के इस विस्तृत लेख में, हम जानेंगे कि इस वर्ष ललिता जयंती कब है, इसका पूजा मुहूर्त क्या है, और आप किस प्रकार माँ की आराधना करके अपनी कुंडली के ग्रह दोषों को शांत कर सकते हैं।
Lalita Jayanti 2026 Date And Time: ललिता जयंती सौंदर्य और शक्ति की अधिष्ठात्री माँ ललिता का प्राकट्य दिवस…..
Lalita Jayanti 2026: सही तिथि और पंचांग (Date and Tithi)
सबसे पहले भक्तों के मन में उठने वाले प्रश्न का निवारण करते हैं—आखिर Lalita Jayanti 2026 की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग और चंद्रमा की गति के अनुसार, ललिता जयंती माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है।
वर्ष 2026 में, Lalita Jayanti 2026 का पावन पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा।
पूर्णिमा तिथि का समय (Purnima Tithi Timings): पूजा और व्रत के लिए तिथि का सही ज्ञान होना आवश्यक है:
• पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 01 फरवरी 2026 को सुबह 05:52 बजे से।
• पूर्णिमा तिथि समाप्त: 02 फरवरी 2026 को सुबह 03:38 बजे तक।
चूँकि 1 फरवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त है, इसलिए उदयातिथि के नियमानुसार Lalita Jayanti 2026 का व्रत और पूजन 1 फरवरी को ही मान्य होगा। रविवार का दिन और पूर्णिमा का संयोग इसे सूर्य और चंद्रमा दोनों की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष बनाता है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Puja)
तंत्र साधना और श्रीविद्या उपासना में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। Lalita Jayanti 2026 पर पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ रहेंगे:
• ब्रह्म मुहूर्त (साधना के लिए सर्वोत्तम): सुबह 04:45 बजे से 05:30 बजे तक। यह समय ध्यान और मंत्र सिद्धि के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है।
• प्रातः काल पूजा: सूर्योदय के बाद सुबह 07:00 बजे से 09:00 बजे तक।
• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 बजे से 12:45 बजे तक।
• प्रदोष काल (संध्या पूजन): शाम 06:30 बजे से 08:15 बजे तक।
गृहस्थ लोग अभिजीत मुहूर्त या प्रातः काल में पूजा कर सकते हैं, जबकि तांत्रिक और विशेष साधक ब्रह्म मुहूर्त या मध्यरात्रि में माँ की गुप्त साधना करते हैं।
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कौन हैं माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी? (Who is Goddess Lalita?)
Lalita Jayanti 2026 मनाने से पहले हमें देवी के स्वरूप को समझना होगा। माँ ललिता, जिन्हें ‘त्रिपुर सुंदरी’ और ‘षोडशी’ भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी हैं।
• नाम का अर्थ: ‘ललिता’ का अर्थ है—जो लीला करती हैं या जो अत्यंत सुंदर और चंचल हैं। ‘त्रिपुर सुंदरी’ का अर्थ है—तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में सबसे सुंदर।
• स्वरूप: माँ का वर्ण उदीयमान सूर्य के समान कांतिवान (सिंदूरी लाल) है। वे 16 वर्ष की नित्य युवती (षोडशी) मानी जाती हैं, जो पंचप्रेतासन (ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव के आसन) पर विराजमान हैं। उनके हाथों में पाश, अंकुश, गन्ने का धनुष और फूलों के बाण होते हैं।
• श्रीविद्या: माँ ललिता श्रीचक्र (Shri Yantra) की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी साधना को ‘श्रीविद्या साधना’ कहा जाता है, जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती है।
ललिता जयंती का आध्यात्मिक महत्व (Significance)
Lalita Jayanti 2026 का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-जागृति का पर्व है।
1. शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक: यह पर्व याद दिलाता है कि शक्ति केवल उग्र नहीं होती, वह अत्यंत सौम्य और सुंदर भी हो सकती है। माँ ललिता ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का प्रतीक हैं।
2. ग्रह दोष निवारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ ललिता की पूजा से कुंडली के समस्त दोष दूर होते हैं। विशेषकर, यह दिन शुक्र ग्रह (Venus) को मजबूत करने के लिए सर्वोत्तम है। जो लोग प्रेम, विलासिता और कला के क्षेत्र में सफलता चाहते हैं, उनके लिए यह दिन वरदान समान है।
3. मोक्ष प्राप्ति: मान्यता है कि Lalita Jayanti 2026 पर ‘ललिता सहस्रनाम’ का पाठ करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और साधक शिव-शक्ति के मिलन को समझ पाता है।
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Lalita Jayanti 2026 Date And Time: ललिता जयंती सौंदर्य और शक्ति की अधिष्ठात्री माँ ललिता का प्राकट्य दिवस, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भंडासुर वध की कथा
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माँ ललिता के प्राकट्य की पौराणिक कथा (The Legend of Bhandasura)
Lalita Jayanti 2026 के दिन इस कथा को पढ़ने या सुनने का विशेष फल है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार कामदेव (प्रेम के देवता) को भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था। कामदेव की भस्म से चित्रकर्म नामक गण ने एक पुरुष की आकृति बनाई, जिसे शिव जी ने प्राण दान दिया। चूँकि उसका जन्म शिव के क्रोध और कामदेव की भस्म से हुआ था, वह ‘भंडासुर’ नामक राक्षस बना।
भंडासुर ने कठोर तपस्या करके यह वरदान प्राप्त कर लिया कि उसे कोई पुरुष नहीं मार सकता। वरदान पाकर उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया और ऋषियों का वध करने लगा।
हताश होकर सभी देवता और ऋषिगण ने महायज्ञ किया और आदिशक्ति की आराधना की। उनकी पुकार सुनकर यज्ञ की अग्नि (चिदग्निकुंड) से एक दिव्य तेज प्रकट हुआ। यह तेज और कोई नहीं, साक्षात् माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी थीं। उनका स्वरूप इतना दैदीप्यमान था कि करोड़ों सूर्यों की चमक भी फीकी पड़ जाए।
माँ ललिता ने भंडासुर की विशाल सेना के साथ युद्ध किया। अंत में, उन्होंने अपने ‘कामेश्वर अस्त्र’ और दिव्य मुस्कान से भंडासुर का वध कर दिया। भंडासुर अज्ञान और अहंकार का प्रतीक था, और माँ ललिता ने ज्ञान रूपी प्रकाश से उसका अंत किया। यही कारण है कि Lalita Jayanti 2026 बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है।
ललिता जयंती 2026 पूजा विधि (Step-by-Step Puja Rituals)
इस पवित्र दिन पर माँ की कृपा पाने के लिए निम्नलिखित विधि से पूजा करें:
1. स्नान और संकल्प: Lalita Jayanti 2026 की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। इस दिन सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ होता है।
2. वेदी की स्थापना: पूजा घर के ईशान कोण (North-East) में एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ ललिता की प्रतिमा या श्रीयंत्र (Shri Chakra) स्थापित करें।
3. अभिषेक: यदि आपके पास धातु की मूर्ति या श्रीयंत्र है, तो उसका पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से अभिषेक करें।
4. तिलक और पुष्प: माँ को कुमकुम, हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं। माँ ललिता को गुलाबी कमल या लाल गुड़हल के फूल अति प्रिय हैं।
5. नैवेद्य (भोग): माँ को खीर, दूध से बनी मिठाइयां, फल और मिश्री का भोग लगाएं।
6. मंत्र जाप: स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से माँ के मंत्रों का जाप करें। (मंत्र नीचे दिए गए हैं)।
7. श्रीचक्र पूजन: यदि आप श्रीविद्या के साधक हैं, तो श्रीचक्र के नौ आवरणों की विधिवत पूजा करें। कुमकुम से अर्चन करना (श्रीयंत्र के हर कोने पर कुमकुम चढ़ाना) इस दिन बहुत फलदायी होता है।
8. आरती: अंत में माँ ललिता की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।
शक्तिशाली मंत्र (Lalita Devi Mantras)
Lalita Jayanti 2026 पर इन मंत्रों का जाप 108 बार अवश्य करें:
• बीज मंत्र: “ॐ ऐं क्लीं सौः श्री ललितायै नमः” (यह मंत्र आकर्षण, ऐश्वर्य और शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ है)।
• मूल मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं सौः ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नमः” (इसे पंचदशी मंत्र कहते हैं, इसका जाप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए)।
• सरल नाम मंत्र: “ॐ श्री ललिता त्रिपुर सुन्दर्यै नमः”
इसके अलावा, ‘ललिता सहस्रनाम’ (माँ के 1000 नाम) का पाठ करना इस दिन सबसे बड़ी पूजा मानी जाती है।
राशि और ग्रह दोष निवारण के उपाय
जैसा कि हमने चर्चा की, Lalita Jayanti 2026 ज्योतिषीय उपायों के लिए एक सिद्ध दिन है। Sadhanas.in के स्रोतों के अनुसार, आप विभिन्न ग्रह दोषों के लिए निम्न उपाय कर सकते हैं:
• शुक्र दोष (वैवाहिक सुख/धन): यदि विवाह में देरी हो रही है या पति-पत्नी में झगड़े होते हैं, तो इस दिन माँ को इत्र चढ़ाएं और शुक्रवार को कन्याओं को खीर खिलाएं। श्रीचक्र के सामने घी का दीपक जलाएं।
• चंद्र दोष (मानसिक शांति): यदि मन अशांत रहता है या डिप्रेशन है, तो पूर्णिमा की रात (1 फरवरी) को चंद्रमा की रोशनी में बैठकर माँ के मंत्रों का जाप करें और खीर का भोग लगाएं।
• राहु-केतु दोष: जीवन में अचानक आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए पूजा के दौरान धूप और लोबान जलाएं और माँ से रक्षा की प्रार्थना करें।
• मंगल दोष: मांगलिक दोष के निवारण के लिए माँ को लाल वस्त्र और सिंदूर अर्पित करें।
श्रीयंत्र (Sri Chakra) का रहस्य
माँ ललिता का निवास ‘श्रीचक्र’ या ‘श्रीयंत्र’ में माना जाता है। यह ज्यामितीय आकृति ब्रह्मांड का नक्शा है। Lalita Jayanti 2026 के दिन घर में प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र की स्थापना करना साक्षात् लक्ष्मी को निमंत्रण देने जैसा है।
श्रीचक्र में 9 आवरण (Layers) होते हैं, जो मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं। केंद्र बिंदु (Bindu) में स्वयं माँ ललिता शिव के साथ विराजमान रहती हैं। इस दिन श्रीयंत्र पर ‘कुंकुमार्चन’ (कुमकुम चढ़ाना) करने से घर से दरिद्रता हमेशा के लिए चली जाती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भक्तों, Lalita Jayanti 2026 हमें यह संदेश देती है कि जीवन केवल संघर्ष नहीं, बल्कि एक सुंदर लीला भी है। माँ ललिता हमें भोग (सांसारिक सुख) और मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) दोनों एक साथ प्रदान करती हैं।
इस 1 फरवरी 2026 को, अपने घर को पवित्र करें, मन से अहंकार रूपी भंडासुर का त्याग करें और माँ त्रिपुर सुंदरी का आवाहन करें। चाहे आप एक सामान्य गृहस्थ हों या एक गंभीर साधक, माँ की एक छोटी सी प्रार्थना भी आपके जीवन को खुशियों से भर सकती है।
आइए संकल्प लें कि इस Lalita Jayanti 2026 को हम पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएंगे।
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Lalita Jayanti 2026 कब मनाई जाएगी ?
उत्तर: वर्ष 2026 में ललिता जयंती 1 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह माघ मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है।
प्रश्न 2: ललिता जयंती पर व्रत में क्या खाना चाहिए ?
उत्तर: इस दिन सात्विक आहार लेना चाहिए। आप फलाहार, दूध, दही, और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का सेवन कर सकते हैं। अनाज और नमक का त्याग करना श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रश्न 3: माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की पूजा से क्या लाभ होता है ?
उत्तर: माँ की पूजा से सौंदर्य, ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति मिलती है। यह शत्रुओं पर विजय और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी अचूक है।
प्रश्न 4: क्या हम घर पर श्रीयंत्र की पूजा कर सकते हैं ?
उत्तर: हाँ, Lalita Jayanti 2026 के दिन घर पर श्रीयंत्र की स्थापना और पूजा करना बहुत शुभ है। बस ध्यान रहे कि यंत्र की पवित्रता बनी रहे।
प्रश्न 5: भंडासुर कौन था और उसका वध किसने किया ?
उत्तर: भंडासुर एक राक्षस था जो कामदेव की भस्म से उत्पन्न हुआ था। उसका वध माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी ने अपने दिव्य अस्त्रों और मुस्कान से किया था।




