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Bhaimi Ekadashi 2026

Jaya / Bhaimi Ekadashi 2026 Mein Kab Hai: हर हर महादेव! मेरे प्रिय शिष्यों, सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना-अपना महत्व है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे हम Bhaimi Ekadashi 2026 या जया एकादशी के नाम से जानते हैं, इसका स्थान अद्वितीय है। यह वह पावन तिथि है जो मनुष्य को न केवल पापों से मुक्त करती है, बल्कि उसे प्रेत और पिशाच जैसी नीच योनियों में जाने से भी बचाती है। आज मैं आपको इस पवित्र दिन के हर पहलू से अवगत कराऊंगा।

Jaya / Bhaimi Ekadashi 2026 Date And Time: जया/भैमी एकादशी पिशाच योनि से मुक्ति…..

1. Bhaimi Ekadashi 2026 का आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति Bhaimi Ekadashi 2026 का व्रत पूरी निष्ठा से करता है, उसे हजारों वर्षों तक स्वर्ग में वास करने का पुण्य प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिल सकती है। यह व्रत विशेष रूप से उन जीवात्माओं के लिए मोक्ष का द्वार खोलता है जो अपने कर्मों के कारण कष्टदायक योनियों में भटक रही हैं। यदि आपके जीवन में अशांति है या पितृ दोष का भय है, तोएकादशी का पालन आपके लिए रामबाण सिद्ध होगा।

2. Bhaimi Ekadashi 2026 की सही तिथि और वार

शिष्यों, तिथियों को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है, लेकिन पंचांग की सटीक गणना के अनुसार एकादशी का पर्व गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का दिन होता है और एकादशी भी उन्हीं को समर्पित है, इसलिए यह संयोग इस बार के व्रत को और भी अधिक शक्तिशाली और फलदायी बना रहा है।

3. शुभ मुहूर्त और पंचांग गणना

किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसे सही मुहूर्त में किया जाए। एकादशी के लिए तिथियों का विवरण इस प्रकार है:

एकादशी तिथि का प्रारंभ: 28 जनवरी 2026 को शाम 04 बजकर 35 मिनट पर।

एकादशी तिथि का समापन: 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर।

चूँकि हमारे धर्म में ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय वाली तिथि) को ही व्रत के लिए मान्य माना जाता है, इसलिए Bhaimi Ekadashi 2026 का उपवास 29 जनवरी को ही रखा जाएगा। वैष्णव और स्मार्त दोनों संप्रदायों के लिए यह व्रत इसी दिन है।

4. Bhaimi Ekadashi 2026 के व्रत पारण का समय

व्रत रखना जितना महत्वपूर्ण है, उसका विधिपूर्वक पारण (व्रत खोलना) करना भी उतना ही आवश्यक है। के व्रत का पारण अगले दिन, यानी शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा।

पारण का शुभ समय: सुबह 07 बजकर 10 मिनट से सुबह 09 बजकर 20 मिनट तक।

पारण की अवधि: 2 घंटे 10 मिनट।

वत्स, याद रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना अनिवार्य होता है, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है।

5. पूजा विधि: श्रीहरि को कैसे प्रसन्न करें: Method of worship: How to please Shri Hari ?

Bhaimi Ekadashi 2026 के दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।

1. स्नान: सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. संकल्प: हाथ में जल और पुष्प लेकर एकादशी के व्रत का संकल्प लें।

3. स्थापना: पूजा स्थान पर भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।

4. दीपक: घी का दीपक जलाएं। इस दिन 14 मुखी दीपक लगाकर श्रीहरि का ध्यान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

5. भोग: भगवान को पीले फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करें। याद रखें, विष्णु जी की पूजा बिना तुलसी के अधूरी है।

6. पाठ: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, यह इस दिन विशेष फलदायी होता है।

6. Bhaimi Ekadashi 2026 के लिए विशेष उपाय और टोटके

क्या आप आर्थिक तंगी या वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं? तो एकादशी पर ये उपाय अवश्य करें:

पीपल के पत्ते का उपाय: एकादशी के दिन एक पीपल का पत्ता लें (इसे एक दिन पहले तोड़ लें, एकादशी को नहीं)। इस पर दूध और केसर से बनी मिठाई रखकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं। मान्यता है कि इससे आर्थिक तंगी दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।

विवाह बाधा निवारण: यदि लव मैरिज में अड़चनें आ रही हैं या विवाह में देरी हो रही है, तो Bhaimi Ekadashi 2026 पर भगवान विष्णु को हल्दी की गाँठ अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।

7. क्या खाएं और क्या न खाएं:What to eat and what not to eat?

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व्रत के नियमों का पालन कठोरता से करना चाहिए। Bhaimi Ekadashi 2026 पर खानपान के नियम इस प्रकार हैं:

वर्जित भोजन (क्या न खाएं)

चावल का सेवन इस दिन पाप माना जाता है। यहाँ तक कि जो लोग व्रत नहीं भी रख रहे हैं, उन्हें भी घर में चावल नहीं पकाने चाहिए।

तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस, और मदिरा का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

बैंगन, मूली और मसूर की दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

फलाहार (क्या खाएं)

व्रती को केवल फलाहार करना चाहिए। दूध, दही, फल और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है।

नमक का त्याग करें, यदि आवश्यक हो तो सेंधा नमक का उपयोग एक समय किया जा सकता है।

8. दान का महत्व: पुण्य को अक्षय बनाएं:Importance of charity: Make virtue inexhaustible

सनातन धर्म में दान के बिना कोई भी पर्व पूर्ण नहीं होता। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि दान देने से धन कभी नहीं घटता। एकादशी पर अन्नदान को महादान कहा गया है। इस दिन आप गरीबों को भोजन कराएं, नारायण सेवा संस्थान जैसी संस्थाओं में सहयोग करें या किसी गौशाला में चारा दान करें। यह दान आपके और आपके पूर्वजों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करेगा।

9. भैमी एकादशी की पौराणिक कथा का सार:Essence of the mythological story of Bhaimi Ekadashi

इस एकादशी को ‘जया’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जीत (जय) दिलाती है। कथाओं के अनुसार, एक बार इंद्र की सभा में माल्यवान नामक गंधर्व और पुष्पवती नामक गंधर्व कन्या ने श्रापवश पिशाच योनि प्राप्त की थी। वे हिमालय पर कष्ट भोग रहे थे। माघ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने अनजाने में उपवास किया और रात्रि जागरण किया। इस पुण्य प्रभाव से अगले ही दिन वे पिशाच योनि से मुक्त होकर पुनः दिव्य शरीर प्राप्त कर स्वर्ग लौट गए। Bhaimi Ekadashi 2026 हमें यही संदेश देती है कि अनजाने में किया गया व्रत भी इतना फलदायी है, तो विधिपूर्वक किया गया व्रत कितना कल्याणकारी होगा।

10. Bhaimi Ekadashi 2026 और त्रिस्पृशा महायोग

कभी-कभी एकादशी पर विशेष योग बनते हैं। यदि एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी का स्पर्श एक ही दिन हो जाए तो उसे ‘त्रिस्पृशा’ कहते हैं। हालाँकि Bhaimi Ekadashi 2026 के लिए पंचांग में सामान्य एकादशी नियमों का ही उल्लेख है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि द्वादशी मिश्रित एकादशी हमेशा ग्राह्य होती है और दशमी मिश्रित एकादशी का त्याग करना चाहिए। इस बार 29 जनवरी को शुद्ध एकादशी है।

11. जीवन में बदलाव लाने वाला दिन:life changing day

आधुनिक जीवनशैली में हम तनाव और मानसिक अशांति से घिरे हुए हैं। एकादशी केवल एक धार्मिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन को डिटॉक्स (Detox) करने का एक वैज्ञानिक तरीका भी है। उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और सात्विक विचारों से मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस दिन झूठ बोलने और परनिंदा (दूसरों की बुराई) करने से बचना चाहिए।

12. गुरु मंत्र और निष्कर्ष

मेरे प्रिय शिष्यों, एकादशी एक ऐसा अवसर है जिसे हाथ से न जाने दें। 29 जनवरी 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ श्रीहरि के चरणों में खुद को समर्पित करें। चाहे आप व्रत रख सकें या नहीं, कम से कम चावल का त्याग करें और किसी जरूरतमंद की मदद अवश्य करें। यह छोटा सा प्रयास आपके भाग्य को बदल सकता है।

भगवान विष्णु आप सभी पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: Bhaimi Ekadashi 2026 की सही तारीख क्या है ? उत्तर: वर्ष 2026 में Bhaimi Ekadashi 2026 (जया एकादशी) 29 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी।

प्रश्न: Bhaimi Ekadashi 2026 का व्रत कब खोलना चाहिए ? उत्तर: व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे के बीच किया जाना चाहिए।

प्रश्न: Bhaimi Ekadashi 2026 पर क्या दान करना श्रेष्ठ है? उत्तर: इस दिन अन्नदान, वस्त्र दान और भूखे को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

प्रश्न: क्या Bhaimi Ekadashi 2026 के दिन तुलसी तोड़ सकते हैं ? उत्तर: नहीं, एकादशी और रविवार के दिन तुलसी पत्र नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।

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