July 24, 2025

Putrada Ekadashi 2025: संतान प्राप्ति के लिए करें पुत्रदा एकादशी व्रत…

Putrada Ekadashi 2025:इस साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। जानें सावन पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, पारण का समय और महत्व.. Sawan Putrada Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसे में ही श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। बता दें कि साल में दो बार पुत्रदा एकादशी का व्रत पड़ता है। पहला श्रावण मास में, तो दूसरा पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। सावन मास में पड़ने वाले एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादशी के नाम से भी जानते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव जी की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ पूजा करने से हर एक दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, धार्मिक महत्व से लेकर व्रत के पारण का समय तक… Putrada Ekadashi 2025 Date: 4 या 5 अगस्त, कब है सावन की पुत्रदा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और महत्व.. पुत्रदा एकादशी 2025 का महत्व (Putrada Ekadashi 2024 Significnace) हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में कुल 2 बार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। पहला श्रावण मास और दूसरा पौष मास। श्रावण मास में पड़ने वाली एकादशी का व्रत अगस्त माह में रखा जा रहा है और पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी दिसंबर या फिर जनवरी में रखा जाएगा। श्रावण मास में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु के साथ शिव जी की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत रखने से हर तरह के दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है। इन राशियों पर होगी विशेष कृपा पौष पुत्रदा एकादशी इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस दिन शुक्ल योग बनेगा। ये एकादशी शुक्रवार को आएगी, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा कुछ राशियों पर विशेष रूप से पड़ेगी। मेष: मेष राशि वालों के लिए यह एकादशी बेहद शुभ साबित होगी। इस दिन रोजगार में तरक्की के योग बन रहे हैं, और जीवन की सारी समस्याएं, खासकर आर्थिक परेशानियां दूर होंगी। बिजनेस में भी लाभ के अवसर मिलेंगे। कर्क: कर्क राशि वालों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी बहुत ही लाभकारी मानी जा रही है। इस दिन वे किसी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। तुला:तुला राशि के लोगों के जीवन में इस एकादशी से खुशियों की शुरुआत होगी। पारिवारिक समस्याएं समाप्त होंगी और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। यह समय उनके लिए बहुत ही शुभ रहेगा। धनु: धनु राशि वालों को पौष पुत्रदा एकादशी से शुभ सूचनाएं मिल सकती हैं। धन लाभ के साथ आय में वृद्धि के योग बन रहे हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मीन: मीन राशि वाले इस दिन अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। उनकी सेहत भी बेहतर रहेगी और आर्थिक लाभ के नए अवसर प्राप्त होंगे। बिजनेस में मेहनत करने से फायदा होगा। श्री विष्णु मंत्र (Vishnu Mantra) ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || क्लेश नाशक श्री विष्णु मंत्र:कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। विष्णु गायत्री मंत्र:नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि ।तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

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Putrada Ekadashi 2025 Date: 4 या 5 अगस्त, कब है सावन की पुत्रदा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और महत्व..

Putrada Ekadashi Shubh MUhurat: हर साल दो बार पुत्रदा एकादशी आती है , पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष मास में, लेकिन सावन में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस वर्ष पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व।  Sawan Putrada Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसे में ही श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। बता दें कि साल में दो बार पुत्रदा एकादशी का व्रत पड़ता है। पहला श्रावण मास में, तो दूसरा पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। सावन मास में पड़ने वाले एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादशी के नाम से भी जानते हैं। Putrada Ekadashi इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव जी की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ पूजा करने से हर एक दुख-दर्द से निजात मिल जाती है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। आइए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त, धार्मिक महत्व से लेकर व्रत के पारण का समय तक… हर साल दो बार Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी आती है ,  पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष मास में, लेकिन सावन में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है, का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस वर्ष पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और व्रत के पारण का सही समय, ताकि आप भी इस पावन व्रत से पूर्ण फल प्राप्त कर सकें। सावन पुत्रदा एकादशी तिथि: Sawan Putrada Ekadashi Tithi श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ – 04 अगस्त 2025 , प्रातः  11:41 से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त – 05 अगस्त 2025, दोपहर 01:12 पर उदयातिथि के अनुसार सावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त 2025 को मानी  जाएगी।  सावन पुत्रदा एकादशी 2025 मुहूर्त: Sawan Putrada Ekadashi 2025 Muhurta पूजन का ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:20 से प्रातः 05:02 बजे तकरवि योग – प्रातः 05:45 से प्रातः11:23 बजे तक अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक सायंकाल पूजन मुहूर्त – सायं 07:09 बजे से सायं 07:30 बजे तक श्रावण पुत्रदा एकादशी पारण का समय: Time of Shravan Putrada Ekadashi Paran सावन Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी के अगले दिन यानी 6 अगस्त को प्रातः  5 : 45 मिनट से 8 : 26 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं। पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 02:08 मिनट पर है। पुत्रदा एकादशी का महत्व : Importance of Putrada Ekadashi हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, और जब बात पुत्रदा एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस व्रत को हर साल दो बार रखा जाता है। पहली बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में। श्रावण महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का आयोजन इस वर्ष अगस्त में होगा, जबकि पौष मास की पुत्रदा एकादशी दिसंबर या जनवरी में पड़ सकती है। श्रावण की पुत्रदा एकादशी को पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इसके साथ ही इस एकादशी पर भगवान शिव की आराधना करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति, पारिवारिक खुशियाँ और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं। पुत्रदा एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप :Chant these mantras on Putrada Ekadashi श्री विष्णु मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय || क्लेश नाशक श्री विष्णु मंत्रकृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः | विष्णु गायत्री मंत्रनारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN नहीं है।

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What Is The Right Way to worship :पूजा करने का सही तरीका क्या है?

What Is The Right Way to worship: अगर आप गलत विधि और नियमों के साथ worship पूजा करते हैं तो इसका बहुत बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है। चलिए जानते हैं पूजा करने का सही तरीका क्या है, साथ ही जानिए पूजा खड़े होकर करनी चाहिए या बैठकर। Puja Vidhi Niyam in Hindi: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इसमें इतनी शक्ति होती है कि ये सभी मनोकामना पूरी कर सकती है। वहीं वास्तु में भी इसको लेकर कई नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है, तभी पूजा संपूर्ण मानी जाती है। हालांकि जाने-अनजाने में कुछ लोग पूजा के दौरान कई तरह की गलतियां कर बैठते हैं। जिसकी वजह से उन्हें पूजा का फल नहीं मिल पाता और पूजा अधूरी रह जाती है। ऐसे में अगर आप गलत विधि और नियमों के साथ पूजा करते हैं तो इसका बहुत बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है। चलिए जानते हैं पूजा करने का सही तरीका क्या है, साथ ही जानिए पूजा खड़े होकर करनी चाहिए या बैठकर।  Puja Kaise Karni Chahiye: बैठकर या खड़े होकर, कैसे करें पूजा?  मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में कभी भी खड़े होकर worship पूजा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि खड़े होकर पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है साथ ही कोई लाभ भी नहीं मिलता। इसलिए घर पर पूजा-पाठ के दौरान खड़े होकर पूजा न करें।  इस बात का भी ध्यान रखें कि जब भी आप पूजा-पाठ करें तो पहले फर्श पर आसन जरूर बिछाएं और इस पर बैठकर ही पूजा करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि कभी भी बिना सिर ढके पूजा नहीं करनी चाहिए। स्त्री हो या पुरुष पूजा करते समय हमेशा सिर को ढक कर ही रखें।   What is the correct method of worship: क्या है पूजा करने की सही विधि?  वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा के दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए और अपने दाहिने ओर घंटी, धूप, दीप, अगरबत्ती आदि रखनी चाहिए। इस दिशा में मुख करके पूजा-अर्चना करना श्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि पूर्व दिशा शक्ति व शौर्य की प्रतीक है। इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, प्रसन्नता और स्वास्थ लाभ मिलता है वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा के दौरान अपनी बाईं ओर पूजन सामग्री जैसे फल फूल, जल का पात्र और शंख रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस तरह पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस बात का भी ध्यान रखें कि worship पूजा करते समय अपने माथे पर तिलक जरूर लगाएं।  घर में पूजा स्थल हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बनाना चाहिए। वास्तु में इस दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, घर के भीतर पूजा घर बनवाते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि इसके नीचे या ऊपर या फिर अगल-बगल शौचालय नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही भूलकर भी घर की सीढ़ी के नीचे पूजा घर नहीं बनाना चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है।) 

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