January 7, 2025

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू क्यों बनाए जाते हैं, क्या है मान्यता?

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है. भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर ये त्योहार मनाया जाता है. मकर संक्रांति हिंदुओं का साल का पहला त्योहार होता है. मकर संक्रांति पर हर घर में तिल के लड्डू बनाए और खाए जाते हैं, लेकिन आपको पता है कि इस दिन तिल के लडडू बनाने और खाने की परंपरा क्यों शुरू हई. आइए जानते हैं… Makar Sankranti Til ke Laddu: मकर संक्रांति को हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में गिना जाता है. भगवान सूर्य जब धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान बहुत पुण्यकारी माना गया है. मकर संक्रांति पर तिल का दान करने और खिचड़ी खाने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस साल 14 जनवरी मंगलवार को 9 बजकर 3 मिनट पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी. इस दिन तिल के लड्डू बनाने की भी परंपरा है. इस दिन हर घर में तिल के लड्डू बनाएं जाते हैं. तिल के लड्डओं को भगवान सूर्य को भेंट किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाए और खाए क्यूं जाते हैं. क्यों बनाए जाते हैं मकर संक्रांति पर लिल के लड्डू? पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से काफी क्रोधित हो गए थे. क्रोध में उन्होंने अपने तेज से शनि देव का कुंभ राशि वाला घर जला दिया था. इसके बाद शनि देव ने अपने पिता से माफी मांगी. फिर जाकर भगवान सूर्य का क्रोध शांत हुआ. इसके बाद भगवान सूर्य ने शनि देव से कहा कि जब भी उनका प्रवेश मकर राशि में होगा, तो वो घर धन-धान्य और खुशियों भर जाएगा. मकर राशि शनि देव का एक और अन्य घर माना जाता है. इसके बाद जब भगवान सूर्य शनि देव के मकर राशि वाले घर में आए तो पुत्र ने तिल और गुड़ से अपने पिता की पूजा की. साथ ही शनि देव ने अपने पिता को तिल और गुड़ खाने के लिए दिया. शनि देव ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि भगवान सूर्य द्वारा उनका कुंभ राशि वाला घर जला दिए जाने के बाद उनके पास कुछ भी बाकी नहीं बचा था. भगवान सूर्य शनि देव द्वारा तिल और गुड़ भेंट किए जाने से बहुत प्रसन्न हुए. इसके बाद कहा कि जो भी लोग मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से उनकी पूजा करेंगे, उस पर शनि देव सहित उनका भी आर्शीवाद बना रहेगा. यही कारण है कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाने और खाने की परंपरा है. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Vaikuntha Ekadashi 2025: कब है बैकुंठ एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है? जानें इसका धार्मिक महत्व

धार्मिक मत है कि बैकुंठ एकादशी (Putrada Ekadashi 2025 Date) तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं मृत्यु उपरांत बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। साधक बैकुंठ एकादशी पर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। सनातन धर्म में बैकुंठ एकादशी का विशेष महत्व है। इस शुभ अवसर पर बैकुंठ के स्वामी भगवान bhagwan jagdish जगदीश की और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही बैकुंठ एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को भगवान विष्णु के लोक में स्थान मिलता है। साथ ही जन्म-मृत्यु के चक्र से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि बैकुंठ एकादशी तिथि पर बैकुंठ लोक का मुख्य द्वार (मुख्य दरवाजा) खुला रहता है। वैदिक गणना के अनुसार, यह पर्व सूर्य देव के धनु राशि में गोचर करने के दौरान मनाया जाता है। कई बार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाता है। साधक बैकुंठ एकादशी तिथि पर श्रद्धा भाव से भगवान श्रीहरि की पूजा करते हैं। आइए, बैकुंठ एकादशी की सही डेट शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं महत्व जानते हैं- Vaikuntha Ekadashi: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी का दिन बहुत विशेष माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के व्रत का एक विशेष महत्व है. आइए जानते हैं इस दिन भगवान विष्णु के व्रत से क्या लाभ मिलते हैं. Vaikuntha Ekadashi 2025 Vrat And Importance: हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी को बहुत ही पवित्र दिन माना गया है. ये दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु shri vishnu bhagwan को समर्पित किया गया है. इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के पूजन और व्रत का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु के व्रत और पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है. साथ ही हर काम में सफलता मिलती हैं. ES SAL KAB HAI Vaikuntha Ekadashi:इस साल कब है वैकुंठ एकादशी? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैकुंठ एकादशी की तिथि की शुरुआत 9 जनवरी दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के अनुसार, वैकुंठ एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा. Kyu rakha jata hai Vaikuntha Ekadashi : क्यों रखा जाता है वैकुंठ एकादशी का व्रत? हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी वैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करता है उस पर श्री हरि प्रसन्न होते हैं. इतना ही नहीं व्रत और पूजन करने वालों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि जो भी इस दिन व्रत करता है उसके सभी पापों का नाश हो जाता है. इस दिन व्रत करने वालों का मन शुद्ध हो जाता है. उन्हें जीवन में सभी प्रकार की सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं. जीवन के सभी सुखों को भोग कर उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. साथ ही वैकुंठ धाम में जगह मिलती है. वैकुंठ एकादशी का धार्मिक महत्व Vaikuntha Ekadashi ka dharmik mahetwa हिंदू धर्म शास्त्रों में वैकुंठ एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. बैकुंठ एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन व्रत और पूजन करने वालों को न सिर्फ संसार के सुख प्राप्त होते हैं, बल्कि उन्हें जन्म और मरण के चक्र से भी मुक्ति प्राप्त होती है. वैकुंठ एकादशी पर व्रत करने वालों का स्वर्ग प्राप्ति का रास्ता आसान हो जाता है. वैकुंठ एकादशी पूजा विधि Vaikuntha Ekadashi puja vidhi Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Swapna Shastra: सपने में घोडा देखना शुभ या अशुभ? जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne Me Ghoda Dekhna: सनातन धर्म में स्वप्न शास्त्र का बेहद खास महत्व है। कुछ सपने इंसान के जीवन के लिए शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में घोडा देखना बेहद अच्छा माना जाता है। हर सपने का कोई न कोई अर्थ जरूर होता है। ऐसा माना जाता है कि सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में संकेत देते हैं। Sapne Me Ghoda Dekhna: स्वप्नशास्त्र में हर एक सपने की व्याख्या की गई है. सपने में घोड़ा दिखाई देना खास संकेत देता है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि सपने में आपको किस तरह का घोड़ा दिखाई देता है. Sapne me Horse  dekhne ka matlab:सपने में घोड़ा देखने का मतलब रात में सोते समय ज्यादातर लोगों को सपने आते हैं. कुछ सपने अच्छे होते हैं तो कुछ बेहद खराब. स्वप्नशास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है. अगर आपको सपने में घोड़ा दिखाई देता है तो इसका भी एक खास मतलब है. सपने में घोड़े को देखना- सपने में घोड़ा देखना बहुत अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं और आने वाला समय आपके लिए बहुत शुभ रहने वाला है. इसका मतलब है कि आपको किसी काम में जल्दी कामयाबी मिल सकती है. सपने में घुड़सवारी करना- अगर आप सपने में खुद को घुड़सवारी करते देखते हैं को इसका मतलब है कि आपको जल्द अपने लक्ष्य की प्राप्ति होने वाली है. यह सपना बताता है कि आपको जल्द तरक्की मिलने वाली है. घायल घोड़ा देखना- घायल घोड़े का सपना देखना बहुत अशुभ माना जाता है. यह व्यापार या कार्यक्षेत्र में भारी नुकसान होने का संकेत देता है. ये सपना बताता है कि आपको अपने सेहत को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत है. सपने में घोड़े की तस्वीर देखना- सपने में घोड़े की तस्वीर देखने का सपना भी काफी अच्छा होता है. यह सपना संकेत देता है कि आने वाले दिनों में आपके मान सम्मान में बढ़ोतरी होने वाली है. समाज में आपको अच्छा दर्जा प्राप्त होने वाला है. पंखो वाले घोड़े का सपना- अगर आप सपने में पंखों वाले घोड़े देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपके घर जल्द कोई मांगलिक कार्य होने वाला है. यह सपना जल्द विवाह होने का भी संकेत देता है. यह सपना प्रेम बढ़ने का संकेत देता है.

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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी? जानें इसका पौराणिक महत्व

Makar Sankranti 2025:सनातन धर्म में मकर संक्रांति का त्योहार अपने आप में बहुत खास माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा होती है। इस साल यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य जैसे शुभ कार्य करने चाहिए। वहीं इस शुभ दिन (Makar Sankranti Rituals) पर खिचड़ी खाने का भी महत्व है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं। Makar Sankranti 2025:खिचड़ी का दान भी जरूर करें आपको बता दें, खिचड़ी बेहद ही पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन है। इसका संबंध सूर्य और शनि से है। कहते हैं, इसे (Makar Sankranti significance) खाने से परिवार में खुशहाली आती है। वहीं, मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इसलिए इस शुभ दिन पर खिचड़ी खाने के साथ-साथ दान भी करनी चाहिए, क्योंकि दान इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है। Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का त्योहार आने वाला है. इस बार 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसे सूर्य का संक्रमण काल कहा जाता है. इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. देश के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपने शरीर का त्याग किया था और उसी दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर्म किया गया था. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है.  खिचड़ी का महत्व (Significance of Khichadi) ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति की खिचड़ी चावल, काली दाल, हल्दी, मटर और हरी सब्जियों का विशेष महत्व है. खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति का महत्व है. काली दाल से शनि, राहू और केतु का महत्व है, हल्दी से बृहस्पति का संबंध है और हरी सब्जियों से बुध का संबंध है. वहीं जब खिचड़ी पकती है तो उसकी गर्माहट का संबंध मंगल और सूर्य देव से है. इस प्रकार लगभग सभी ग्रहों का संबंध खिचड़ी से है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान का महत्व अधिक होता है. खिचड़ी की पौराणिक कथा  ज्योतिषाचार्य ने बताया कि खिचड़ी से जुड़ी एक बाबा गोरखनाथ की कथा है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की ऐसी भी मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के दौरान बाबा गोरखनाथ के योगी खाना नहीं बना पाते थे और भूखे रहने की वजह से हर ढलते दिन के साथ कमजोर हो रहे थे. योगियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बाबा ने अपने योगियों को चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पकाने की सलाह दी. यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और इससे योगियों को ऊर्जा भी मिलती थी. बाबा गोरखनाथ ने इस दाल, चावल और सब्जी से बने भोजन को खिचड़ी का नाम दिया. यही कारण है कि आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखपुर में स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी का मेला लगता है. इस दौरान बाबा को खासतौर पर खिचड़ी को भोग लगाया जाता है.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) उदयातिथि के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी 2025 को ही मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य सुबह 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.

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Magha Kalashtami Vrat:माघ कालाष्टमी व्रत कब है

Magha Kalashtami Vrat:कालाष्टमी प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाला एक हिंदू त्यौहार है जोकि भगवान शिव के ही एक रौद्र रूप भगवान भैरव को समर्पित है। प्रत्येक माह में आने के कारण यह त्यौहार एक वर्ष में कुल 12 बार, तथा अधिक मास की स्थिति में 13 बार मनाया जाता है। काल भैरव को पूजे जाने के कारण इसे काल भैरव अष्टमी अथवा भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष को आने वाली मास में पड़ने वाली कालाष्टमी सबसे अधिक प्रसिद्ध है जिसे कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है। कालाष्टमी के रविवार अथवा मंगलवार के दिन पड़ने पर इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि साप्ताह के ये दिन भी भगवान भैरव को समर्पित माने जाते हैं। कालाष्टमी व्रत कब है? – Kalashtami Vrat Kab Hai मंगलवार, 21 जनवरी 2025माघ कृष्ण अष्टमी : 21 जनवरी 12:39 PM – 22 जनवरी 3:18 PM साल 2025 में माघ महीने में कालाष्टमी 21 जनवरी को है. कालाष्टमी, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव की पूजा की जाती है. कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालाष्टमी पर भोग में हलवा, खीर, गुलगुले, जलेबी, फल आदि शामिल किए जाते हैं. भगवान काल भैरव को पान, सुपारी, लौंग, इलायची, मुखवास आदि चीज़ें भी चढ़ाई जाती हैं. Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Sapne Me Shivling Dekhna: सपने में शिवलिंग की पूजा करने का मतलब…? Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

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