December 9, 2024

Sapne mein purvaj ko dekhna:सपने में पूर्वजों के नजर आने का क्या होता है अर्थ जानें संकेत..

Sapne mein purvaj ko dekhna:अक्सर लोगों को स्वप्न में मृत व्यक्ति दिखाई देते हैं, आइये जानते हैं सपने (Dreams) में किसी मृत व्यक्ति का दिखना आपके लिए अच्छा है या बुरा.. Sapne mein purvaj ko dekhna : हमारे सपने हमारे भूत, वर्तमान और भविष्य की जानकारी देते हैं। इससे यह पता चल सकता है कि आपकी शारीरिक और मानसिक स्थि‍ति क्या है। यदि आपके सपनों में आपके दिवंगत या पूर्वज आपको बार बार नजर आते हैं तो इसका क्या अर्थ हो सकता है? 1. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि किसी स्वस्थ व्यक्ति का स्वर्गवास हो चुका है और वह आपको सपने में दिखाई दे रहा है और वह बीमार लग रहा है तो इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति की कोई इच्छा है, Sapne mein purvaj ko dekhna जिसे वह पूरी करना चाहता है। वहीं एक अर्थ यह भी है कि आपके घर में कोई बीमार पड़ने वाला है। 2. यदि किसी व्यक्ति की बीमारी से मौत हुई है और वह सपने में आपको स्वस्थ दिखाई दे रहा है तो इसका अर्थ है कि उसे अच्छा जन्म या स्थान मिल गया है और अब वह खुश है।3. यदि आपके सपने में कोई मृत परिजन आपसे बात करते हुए दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि वह बहुत खुश है और अब आपके अटके कार्य पूरे होने वाले हैं। 4. सपने में कोई दिवंगत व्यक्ति आपको सलाह दे रहा है तो उसकी सलाह जरूर मानें, स्वप्न शास्त्र कहता है कि इसका आपको लाभ जरूर मिलेगा।5. यदि कोई परिचित या पहचान वाला मृत व्यक्ति सपने में क्रोधित या रोते हुए नजर आता है तो इसका अर्थ है कि उसकी कोई इच्छा अधूरी है। 6. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि सपने में कोई मृत व्यक्ति नजर आता है और आपको कुछ बताने का प्रयास करता है, लेकिन आपको कुछ समझ में नहीं आ रहा है तो इसका अर्थ है कोई संकट आने वाला है।7. आपके सपने में मृत परिजन दिखाई दे लेकिन वह चुप रहे तो इसका अर्थ है कि वह आपको यह बताना चाहता है कि आप या तो कुछ गलत कर रहे हैं या भविष्य में कुछ गलत करने वाले हैं। 8. सपने में पूर्वज आपको आशीर्वाद दें और कुछ कहे नहीं तो इसका अर्थ है कि भविष्य में आप किसी काम में सफल होने वाले हैं।9. सपने में स्वर्गवासी पूर्वज या परिजन उदास रहें तो इसका अर्थ है कि वे Sapne mein purvaj ko dekhna आप से खुश नहीं हैं। वहीं क्रोधित या रोते हुए दिखाई दें तो समझिए कि कोई संकट आने वाला है।10. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में आपको स्वर्गवासी परिजन आकाश में कहीं दूर दिखाई दें तो इसका अर्थ है कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो गई है। 12. यदि कोई मृत परिचित सपने में घर में ही या पास में ही दिखाई दे तो इसका अर्थ है कि उनका आपके प्रति मोहभंग नहीं हुआ है। Sapne mein purvaj ko dekhna उनकी आत्मा की शांति के लिए आपको कुछ करना चाहिए।13. स्वप्न शास्त्र के अनुसार मृत परिजनों का बार-बार सपने में आने का अर्थ है कि उनकी आत्मा भटक रही है। उन्हें दूसरा जन्म नहीं मिल पा रहा है या उन्हें मुक्ति नहीं मिल पा रही है। उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करना चाहिए। 14. स्वप्न में मृत परिजय अन्न या पानी मांग रहे हैं तो यह शुभ नहीं माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके लिए बुरा समय आने वाला है। उन्हें उचित स्थान नहीं मिला है और उनकी आत्मा की शांति के लिए कार्य करें।15. सपने में मृत पिता या कोई अन्य परिजन आपको कोई सामान देता हुए दिखाई दे तो यह शुभ है Sapne mein purvaj ko dekhna और लेता हुआ दिखाई दे तो यह अशुभ है। 16. सपने में मृत पिता का जिंदा दिखाई देना, इस बात का संकेत हैं कि वे चाहते हैं कि आप उनकी जगह किसी को पिता समान समझकर उसकी आज्ञा का पालन करें।17. सपने में मां या पिता को हंसते हुए देखने का अर्थ है कि वे चाहते हैं कि Sapne mein purvaj ko dekhna आप उनके प्रति निश्‍चिंत रहें और खुश रहें। उनको लेकर दु:खी न हों।

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Akhuratha Sankashti Chaturthi:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024: महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Akhuratha Sankashti Chaturth:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । Akhuratha Sankashti Chaturth इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त (Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024 Shubh Muhurat) Akhuratha Sankashti Chaturth पंचांग के अनुसार, इस बार पौष महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 43 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 19 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर होगा। ऐसे में खुरथ संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर (Kab Hai Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024) को मनाई जाएगी। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से 02 बजकर 42 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक अमृत काल- सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 08 बजकर 07 मिनट तक गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2.ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ Sankashti Chaturthi puja method:संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें। ❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी Akhuratha Sankashti Chaturth की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:सभी संकष्टी चतुर्थी के नाम आश्विन मास – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थीकार्तिक मास – करवा चौथ, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थीमार्गशीर्ष मास – गणाधिप संकष्टी चतुर्थीपौष मास – अखुरथ संकष्टी चतुर्थीमाघ मास – सकट चौथ, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थीफाल्गुन मास – द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थीचैत्र मास – भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थीवैशाख मास – विकट संकष्टी चतुर्थीज्येष्ठ मास – एकदन्त संकष्टी चतुर्थीआषाढ़ मास – कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थीश्रावण मास – गजानन संकष्टी चतुर्थीअधिक मास – विभुवन संकष्टी चतुर्थीभाद्रपद मास – बहुला चतुर्थी, हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 का महत्व Akhuratha Sankashti Chaturth:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश भगवान की पूजा के साथ चन्द्रदर्शन का भी विशेष महत्व है। इस दिन चद्रोदय के समय चंद्र को अर्घ जरूर देना चाइये। धार्मिक मान्यता है की इस दिन गणेश जी की पूजा करने से जातक के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। और गणेश भगवान सुख शांति और आरोग्यता का वरदान  देतें है।

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International Gita Mahotsav:अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव

Gita Mahotsav:अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हिंदुओं के पवित्र ग्रन्थ श्रीमद्भगवद गीता के प्रादुर्भाव का उत्साहित उत्सव स्वरुप है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हरियाणा सरकार द्वारा कुरूक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर मनाया जाता है। कुरुक्षेत्र वह भूमि है जहाँ भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य ज्ञान अर्थात ‘भगवद गीता’ सुनाई थी। यह पवित्र ग्रंथ गीता जीवन की किसी भी समस्या का सभी समाधान प्रदान करता है। गीता महोत्सव कब मनाया जाता है?(When is Geeta Mahotsav celebrated) गीता महोत्सव का समापन हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन अर्थात गीता जयंती के साथ होता है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव Gita Mahotsav की सभी तिथियाँ एवं कार्यक्रम हरियाणा सरकार निर्धारित करती है। इस वर्ष, गीता महोत्सव 28 नवंबर से 15 दिसंबर मनाया जा रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा गीता जयंती को वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के रूप में घोषित किया गया था। गीता महोत्सव कहाँ मनाया जाता है? (Where is Geeta Mahotsav celebrated) गीता महोत्सव Gita Mahotsav मुख्य रूप से हरियाणा के कुरूक्षेत्र में आयोजित किया जाता है, परन्तु महोत्सव का महत्वपूर्ण स्थल एवं सभी कार्यक्रमों का केंद्र विन्दु ब्रह्म सरोवर ही होता है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने कुरूक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन को भगवद गीता सुनाई थी। यह स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रसिद्ध ऋषि मनु ने यहीं मनुस्मृति लिखी थी। ऋग्वेद और सामवेद की रचना भी यहीं हुई थी। गीता महोत्सव समारोह की प्रमुख गतिविधियाँ(Major activities of Geeta Mahotsav Celebrations)गीता महोत्सव Gita Mahotsav, कुरुक्षेत्र का एक लोकप्रिय उत्सव है जिसके अंतर्गत मेला, यज्ञ, गीता पाठ, भजन, आरती, नृत्य और नाटक जैसी विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। यह कार्यक्रम पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, जिसमें मानव जाति पर इस पवित्र ग्रन्थ के प्रभाव को विद्वानों, दार्शनिकों, पुजारियों एवं ऋषियों द्वारा चर्चाओं, सेमिनार एवं संगोष्ठियों द्वारा मंथन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंचीय नाटक और गीता जप प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें गीता के सार से युक्त पत्रक, पुस्तिकाएं और किताबें वितरित की जाती हैं।

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Annapurna Jayanti:अन्नपूर्णा जयंती 2024: पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और महत्त्व

Annapurna Jayanti:धार्मिक मत है कि अन्नपूर्णा जयंती (Annapurna Jayanti 2024 Date) पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किचन को गंदा नहीं रखना चाहिए। साथ ही अन्न का सम्मान करें। अन्न की बर्बादी करने से मां अन्नपूर्णा अप्रसन्न हो जाती हैं। इससे गृह में अन्न एवं धन की कमी होने लगती है। इस शुभ अवसर पर अन्न का दान करना उत्तम होता है। मागर्शीष शुक्ल पूर्णिमा के दिन माँ पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप के अवतरण दिन को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता है। माता अन्नपूर्णा को अन्नपूर्णेश्वरी एवं अन्नदा नामो से भी जाना जाता है। इस दिन माँ अन्नपूर्णा की आराधना करनी चाहिए, माँ की कृपा से किसी भी घर में कभी भी अन्न की कोई कमी नही होती है। अन्नपूर्णा जयंती Annapurna Jayanti को अन्न दान की विशेष महिमा है। यदि इस दिन कोई भक्त अन्न दान करता है, तो उसे अगले जन्म में भी धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती है। अन्नपूर्णा जंयती पूजन में माँ अन्नपूर्णा चालीसा का पाठ करना चाहिए। जब पृथ्वी पर खाने के लिए कुछ नहीं बचा, तब माँ पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण कर सभी को इस संकट से उबारा। अन्नपूर्णा जयन्ती को मनुष्य के जीवन में अन्न के महत्व को समझाने हेतु मनाया जाता है। इस दिन रसोई की सफाई एवं अन्न के सदुपयोग को प्रचारित करना चाहिए। क्योंकि अन्न के सदुपयोग से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। अन्नपूर्णा जयंती तिथि और शुभ मुहूर्त (Annapurna Jayanti 2024 Date And Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि 14 दिसंबर को संध्याकाल 04 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, पूर्णिमा तिथि का समापन 15 दिसंबर दोपहर 02 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 15 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी। इसके साथ ही अन्नपूर्णा जयंती भी 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। Annapurna Jayanti Subh Yog:शुभ योग Annapurna Jayanti:ज्योतिषियों की मानें तो अन्नपूर्णा जयंती पर शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग दिन भर है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दुर्लभ शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही अन्न एवं धन में वृद्धि होती है। अन्नपूर्णा जयंती पूजा विधि (Annapurna Jayanti 2024 Puja Vidhi) मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद शिव-शक्ति को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें। दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। अब आचमन कर लाल या श्वेत रंग का वस्त्र धारण करें। इसके बाद सर्वप्रथम सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करें। पूजा गृह में पंचोपचार कर विधि-विधान से भगवान शिव एवं मां अन्नपूर्णा की पूजा करें। भगवान शिव एवं मां पार्वती को गृह में बने भोजन भोग में अर्पित करें। इस समय पार्वती चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में शिव पार्वती जी की आरती करें। इस दिन किचन में चूल्हे की पूजा अवश्य करें। इसके साथ ही चूल्हे पर कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाएं और धूप जलाकर मां अन्नपूर्णा से अन्न एवं धन में वृद्धि की कामना करें। अन्नपूर्ण जयंती का महत्व:Importance of Annapurna Jayanti ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की पूजा करने वालों और व्रत रखने वालों को मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है. उनके घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती. घर-परिवार में भी सुख-शांति बनी रहती है. पारिवारिक क्लेश भी दूर होता है. इस चीज का विशेष ध्यान रखें कि व्रत का पारण करने के बाद जरूरतमंद और गरीब लोगों कि अन्न, वस्त्र या धन की सहायता करें. Annapurna Jayanti इससे मां की कृपा आपके ऊपर बरसेगी. मां अन्नपूर्णा को भी इस दिन धनी की पंजीरी का भोग लगाएं, इससे वे प्रसन्न हो जाएंगी/ इस दिन पीले रंग के कपड़े पर ही मां की मूर्ति को स्थापति या विराजित करें, तभी आपको व्रत का फल मिल पाएगा. पौराणिक कथा एक समय पृथ्वी लोक पर जल और अन्न सभी कुछ समाप्त हो गया। सभी प्राणी अन्न और जल के न मिलने पर मरने लगे। इसके बाद पृथ्वीं पर लोग ब्रह्मा जी और विष्णु की आराधना करने लगे। ऋषियों ने ब्रह्म लोक और बैकुंठ लोक जाकर इस समस्या हल निकालने के लिए ब्रह्मा जी और विष्णु जी से कहा। जिसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी सभी ऋषियों के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की हे प्रभू पृथ्वी लोक बड़े ही संकट से गुजर रहा है। इसलिए अपना ध्यान तोड़िए और जाग्रत अवस्था में आइए। तब शिव आंखे खोलकर सभी के आने का कारण पूछा। तब सभी ने बताया की पृथ्वी लोक पर अन्न और जल की कमीं हो गई है। तब भगवान शिव ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि आप लोग धीरज रखिए। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने पृथ्वी लोक का भ्रमण किया। जिसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण किया और भगवान शिव ने एक भिक्षु का रूप धारण किया। इसके बाद भगवान शिव ने भिक्षा लेकर सभी पृथ्वी वासियों में भोजन वितरित किया। जिसके बाद पृथ्वी पर अन्न और जल की कमी पूरी हो गई और सभी ने माता अन्नपूर्णी की जय जयकार की।

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