September 16, 2024

श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam)

Shri Ganesha Pancharatnam:श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं Shri Ganesha Pancharatnam:आपने बहुत ही सुंदर स्तोत्र का नाम लिया है! श्री गणेशपञ्चरत्नम्, विशेषकर ‘मुदाकरात्तमोदकं’ से शुरू होने वाला स्तोत्र, भगवान गणेश की अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तुति है। Shri Ganesha Pancharatnam:स्तोत्र का अर्थ और महत्व श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam) श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥ अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥ नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥ महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥श्रीमत् शंकर भगित्पादकृत श्रीगणेशपञ्चरत्न स्तोत्रम् संपूणकम्। मूल रूप: श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र! मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकंकलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकंनताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरंनमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरंमहेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥ समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरंदरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करंमनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनंपुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४॥ नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजंअचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनांतमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥५॥ महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहंप्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतांसमाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥६॥ वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) Shri Ganesha Pancharatnam:हिंदी रूपांतरणमैं मुक्ति के दाता-प्रदाता श्री गणेश भगवान को बहुत ही विनम्रता के साथ अपने हाथों से मोदक प्रदान (समर्पित) करता हूँ। जिनके सिर पर चंद्रमा एक मुकुट के समान विराजमान है, जो राजाधिराज हैं और जिन्होंने गजासुर नामक दानव हाथी का वध किया था, जो सभी के पापों का आसानी से विनाश कर देते हैं, ऐसे गणेश भगवान जी की मैं पूजा करता हूँ।1 मैं उन श्री गणेश भगवान पर सदा अपना मन और ध्यान अर्पित करता हूँ जो हमेशा उषा काल की तरह चमकते रहते हैं, जिनका सभी राक्षस और देवता सम्मान करते हैं, जो भगवानों में सबसे सर्वोत्तम हैं।2 मैं अपने मन को उस चमकते हुए गणपति भगवान के समक्ष झुकाता हूँ, जो पूरे संसार की खुशियों के दाता हैं, जिन्होंने दानव गजासुर का वध किया था, जिनका बड़ा सा पेट और हाथी की तरह सुन्दर चेहरा है, जो अविनाशी हैं, जो खुशियां और प्रसिद्धि प्रदान करते हैं और बुद्धि के दाता-प्रदाता हैं।3 मैं उन भगवान की पूजा-अर्चना करता हूँ जो गरीबों के सभी दुःख दूर करते हैं, जो ॐ का निवास हैं, जो शिव भगवान के पहले पुत्र (बेटे) हैं, जो परमपिता परमेश्वर के शत्रुओं का विनाश करने वाले हैं, जो विनाश के समान भयंकर हैं, जो एक गज के समान दुष्ट और धनंजय हैं और सर्प को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं।4 मै सदा उस भगवान को प्रतिबिंबित करता हूँ जिनके चमकदार दन्त (दांत) हैं, जिनके दन्त बहुत सुन्दर हैं, स्वरूप अमर और अविनाशी हैं, जो सभी बाधाओं को दूर करते हैं और हमेशा योगियों के दिलों में वास करते हैं।5 जो भी भक्त प्रातःकाल में गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करता है, जो भगवान गणेश के पांच रत्न अपने शुद्ध हृदय में याद करता है तुरंत ही उसका शरीर दाग-धब्बों और दुखों से मुक्त होकर स्वस्थ हो जायगा, वह शिक्षा के शिखर को प्राप्त करेगा, जीवन शांति, सुख के साथ आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि के साथ सम्पन्न हो जायेगा।

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वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok)

Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र – गणेश जी की स्तुति Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। Vakratunda Mahakaya:यह मंत्र भगवान गणेश को समर्पित एक बहुत ही प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र है। इसका जाप करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और विघ्न दूर होते हैं। Vakratunda Mahakaya:मंत्र का अर्थ Vakratunda Mahakaya:मंत्र का महत्व श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) मंत्र का जाप कैसे करें यहाँ कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है: अगर आप गणेश जी के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आप इन विषयों पर खोज कर सकते हैं: वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।वक्रतुण्ड महाकायसूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देवसर्वकार्येषु सर्वदा ॥ हिन्दी रूपांतरण:वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंडमहाकाय: महा काया, विशाल शरीरसूर्यकोटि: सूर्य के समानसमप्रभ: महान प्रतिभाशालीनिर्विघ्नं: बिना विघ्नकुरु: पूरे करेंमे: मेरेदेव: प्रभुसर्वकार्येषु: सारे कार्यसर्वदा: हमेशा, सदैव घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥

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Sapne:सपने में अपनी या फैमिली (Family)मेंबर की मौत देखना शुभ या अशुभ! ज्योतिषी से जानें इसका मतलब

Sapne:सपने अक्सर रात में सोते समय हम सपने तो देखते ही हैं और कई बार सपने में कुछ ऐसे हादसे देखते हैं, जिसको देखते ही नींद में ही पसीने छूट जाते हैं. इसी में से एक सपना ऐसा है जिसे देखना किसी को पसंद नहीं होगा सपने और लोग डर भी जाते हैं. दरअसल, कई बार व्यक्ति नींद में खुद की मौत या फिर अपने परिजन की मौत देखता है तो वह घबरा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इस सपने का एक विशेष अर्थ बताया गया है. सपने में मौत देखना एक आम अनुभव है, और यह कई लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। सपने हालांकि, सपनों का अर्थ व्यक्तिगत और जटिल होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सपने में मौत देखने के कई अर्थ हो सकते हैं, जो सपने के विशिष्ट विवरणों और व्यक्ति के जीवन की स्थिति पर निर्भर करते हैं। Sapne:सपने इस तरह के सपने आना आम बात है और लगभग हर एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी ऐसा सपने आते ही हैं और ऐसे सपने को देखकर डरना स्वाभाविक है, पर लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यह एक शुभ सपना माना जाता है. Sapne:क्या होता है इस सपने का मतलब Sapne:सपने आप सपने में खुद को मृत अवस्था में देखते हैं तो आप समझ जाइए कि आपकी आयु बढ़ गई है और सिर्फ आयु ही नहीं बल्कि, अगर आपके ऊपर कोई बड़ी मुसीबत आने को है तो वह भी सोचिए टल गई. तो ऐसे सपने देखना काफी शुभ माना जाता है. मौत का मतलब है अशुभ चीजों का आपके जीवन से समाप्त होना. Sapne:आपने अपनी किसी अपने या फिर अपने परिवार के किसी सदस्य की मौत देखी है तो यह उनके आयु में वृद्धि होने का संकेत है. उनके लिए कोई नया प्रारंभ या कोई नई शुभ चीज इंतजार कर रही है. सपने इससे आपके घर परिवार और खानदान में खुशहाली का माहौल रहेगा. इसलिए ऐसे सपने को देखकर घबराने वाली बात नहीं है. बल्कि, ऐसे सपने को देखकर आप बिल्कुल निश्चित और खुश हो जाइए. मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी Sapne:सपने में मौत देखने के कुछ सामान्य अर्थ: Sapne:सपने में अपनी या परिवार के किसी सदस्य की मौत देखना: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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