Kumar Purnima 2025: कुमार पूर्णिमा, अश्विन महीने के दौरान पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार ओडिशा के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। अविवाहित महिलाएं मुख्यतः यह त्यौहार का पालन करते हैं, एक सुंदर पति की कामना करती हैं, इसलिए वे कुमार कार्तिकेय की आराधना करती हैं। लेकिन, विशेष रूप से पर्याप्त भगवान के लिए कोई अनुष्ठान नहीं है, इसके बजाय सूर्य और चंद्रमा की पूजा की जाती है।
कैसे मनाया जाता है कुमार पूर्णिमा:How is Kumar Purnima 2025 celebrated?
प्रात:काल स्नान के बाद कन्याएं नये वस्त्र पहनती हैं और सूर्य को अन्नबलि चढ़ाती हैं।
अविवाहित महिलाएं दिन भर उपवास रखते हैं।
शाम को जब चंद्रमा उगता है तो वे फिर से एक विशेष किस्म के भोजन का प्रसाद बनाते हैं और अनुष्ठान समाप्त होने के बाद इसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं।
यह लड़कियों के लिए खुशी का त्योहार है, सभी गाते और नाचते हैं। गीत विशेष प्रकृति के होते हैं। वे एक तरह का खेल भी खेलते हैं जिसे ‘पुची’ के नाम से जाना जाता है।
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कुमार पूर्णिमा में लक्ष्मी पूजा उत्सव:Lakshmi Puja festival in Kumar Purnima
इस दिन को धन की देवी लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। Kumar Purnima 2025 इसलिए, कई लोग अपने घरों में देवी की पूजा करते हैं। जो की ओड़िसा और वेस्ट बंगाल में मशहूर है ।
कुमार पूर्णिमा Kumar Purnima 2025 के साथ कार्तिक महीने का प्रारम्भ होता है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। हिंदू संस्कृति में इसका बहुत महत्व है। Kumar Purnima 2025 भगवान जगन्नाथ और कृष्ण की ‘कार्तिक’ के पूरे महीने में प्रार्थना की जाती है जो Kumar Purnima 2025 कुमार पूर्णिमा के बाद से शुरू होकर ‘रस’ पूर्णिमा तक होती है।
शुभ मुहूर्त (अनुमानित):Auspicious time (approximate)
पूजा या विशेष अनुष्ठान करने के लिए शुभ मुहूर्त जानना महत्वपूर्ण है। चूँकि “(Kumar Purnima 2025) कुमार पूर्णिमा” एक क्षेत्रीय व लोकपारंपरिक उत्सव है, इसलिए मुहूर्त की जानकारी अलग-अलग स्रोतों और पंचांगों में भिन्न हो सकती है।
लेकिन कुछ सामान्य दिशानिर्देश इस प्रकार हो सकते हैं:
- सूर्योदय से पहले या सुबह‐पहले प्रहर एक शुभ समय माना जाता है
- यदि संभव हो, तो मध्याह्न से पहले या दोपहर 12 बजे से पहले पूजा करना शुभ होता है
- किसी भी शुभ कार्य में राहुकाल, यमघंट, गूगलाकाल आदि समय से बचना चाहिए — इनका समय स्थानीय पंचांग में देखें
- यदि आप विशेष रूप से इच्छित मुहूर्त जानना चाहें, तो आपके शहर का स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से पूछना उत्तम रहेगा
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पूजा विधि एवं अनुष्ठान:Worship method and rituals
नीचे एक संक्षिप्त पूजा विधि है जिसे आप “कुमार पूर्णिमा” के अवसर पर कर सकती/सकते हैं:
- प्रातःकाल स्नान
सुबह जल्दी उठकर शुद्ध वस्त्र धारण करें और शुद्ध पानी से स्नान करें। - घर की साफ-सफाई एवं पूजा स्थल तैयारी
पूजा स्थल को स्वच्छ करें। एक छोटी चौकी या मंच रखें, ऊँचे स्थान पर पीले रंग की चादर बिछाएं। - पूजा सामग्री तैयार करें
फूल, अक्षत (चावल), दीपक (घी या तेल), अगरबत्ती, नारंगी या अन्य फल, हल्दी-कुमकुम, नैवेद्य (भोग) सामग्री आदि। - सूर्य और चंद्र मान्यता
“कुमार पूर्णिमा” में कहा जाता है कि सूर्य और चंद्र की पूजा भी की जाती है।
आप सुबह सूर्य को अर्घ्य (जल अर्पण) कर सकते हैं।
रात को जब चंद्रमा दिखे, तब चंद्र को अर्घ्य दें और पूजा आरंभ करें। - मंत्रोच्चारण और प्रार्थना
आप निम्नमलिखित मंत्र या अन्य उचित मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
• “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः”
• अन्य चंद्र संबंधी या देवी-देवता संबंधी मंत्र आपके अनुकूल हो सकते हैं।
• मनोकामना बताते हुए प्रार्थना करें — विशेष रूप से विवाह/उच्च साझेदारी आदि।
- नैवेद्य अर्पण
पूजा अंत में पकवान (लड्डू, मेवा, फल, मीठा आदि) चढ़ाएँ।
प्रसाद सभी को बाँटें। - आरती एवं अंत
आरती कर दीपक जलाएँ। श्रद्धा भाव से आरती गाएँ।
अंत में सबको प्रसाद देना और भजनों, गीतों आदि के साथ अनुष्ठान समापन करें।




