हनुमत्स्तव एक संस्कृत स्तोत्र है जो हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र पुष्प श्रीवात्सेन द्वारा रचित है।
स्तोत्र का अर्थ इस प्रकार है:
हे हनुमान, आप भगवान राम के परम भक्त हैं। आप भगवान राम की भक्ति में लीन हैं। आप भगवान राम के कार्यों में हमेशा तत्पर रहते हैं। आप भगवान राम के भक्तों के लिए आदर्श हैं।
आपके पास सभी शक्तियां हैं। आप सभी बाधाओं को दूर कर सकते हैं। आप सभी भक्तों को उनकी इच्छाओं को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
मैं आपके चरणों में अपना सिर रखता हूं और आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप मुझे आपकी कृपा प्रदान करें। आप मुझे सभी बाधाओं से दूर रखें और मुझे भगवान राम की भक्ति प्राप्त करने में मदद करें।
हे हनुमान, आप मेरे लिए आदर्श हैं। मैं आपकी तरह भगवान राम का भक्त बनना चाहता हूं। कृपया मुझे आपकी कृपा प्रदान करें।
स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है:
**जय हनुमंत महावीर, राम भक्त हितकारी। अंजनि पुत्र पवनसुत, संकट हरणकारी।
**बल बुद्धि विद्या देहु, ज्ञान ज्योति प्रकासित। हृदय में राम बसावे, भक्ति रूपी पुष्प चढावे।
**सत्यवादी सदाचारी, नीतिवान वीर। दुष्ट दल हननकारी, धर्म की रक्षाकारी।
**महादेव के अवतार, शंकर सुवन केसरी। राम के दूत रूप में, त्रेता युग में अवतरित।
**लंका दहन कारी, सीता खोज कारी। राम लखन को मिलावे, रावण को मारावे।
**सर्व भक्तजनों के, संकट हरणकारी। कृपा करो हनुमान जी, दीन दुखियारी।
स्तोत्र का अनुवाद इस प्रकार है:
हे हनुमान, आप महावीर हैं। आप भगवान राम के भक्तों के लिए हितकारी हैं। आप अंजनी के पुत्र हैं और पवनसुत नाम से प्रसिद्ध हैं।
आप मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें। आप मेरे हृदय में भगवान राम को बसाएं।
आप सत्यवादी, सदाचारी और नीतिवान हैं। आप दुष्टों का विनाश करते हैं और धर्म की रक्षा करते हैं।
आप शंकर के अवतार हैं। आप शंकर के पुत्र हैं और केसरी के पुत्र हैं।
आप त्रेता युग में राम के दूत के रूप में अवतरित हुए थे। आपने लंका को जला दिया, सीता को खोजा और राम लखन को मिलाया।
आप सभी भक्तों के संकटों को दूर करते हैं। कृपा करके मुझ पर भी कृपा करें।
स्तोत्र का महत्व:
- यह स्तोत्र हनुमान जी की भक्ति और उनके गुणों का वर्णन करता है।
- यह स्तोत्र भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।
- यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक विकास में मदद कर सकता है।
स्तोत्र के प्रमुख बिंदु:
- हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं।
- वे भगवान राम की भक्ति में लीन हैं और हमेशा भगवान राम के कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं।
- वे सभी शक्तियों से संपन्न हैं और सभी बाधाओं को दूर कर सकते हैं।
- वे सभी भक्तों के लिए आदर्श हैं।
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