हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् (सुदर्शनसंहितान्तर्गतम्) हनुमान जी के 1000 नामों का एक संग्रह है। यह स्तोत्र सुदर्शनसंहिता में वर्णित है, जो एक हिंदू ग्रंथ है जो हनुमान जी की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।
हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् के 1000 नाम इस प्रकार हैं:
- 1. हनुमान्
- 2. अंजनीसून
- 3. वायुपुत्र
- 4. महाबलाय
- 5. रामेष्टाय
- 6. फाल्गुनसखाय
- 7. पिंगाक्षाय
- 8. अमितविक्रमाय
- 9. उदधिक्रमणाय
- 10. सीताशोकविनाशकाय
हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् का पाठ करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:
- किसी भी शुभ दिन और शुभ समय पर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- हनुमान जी को धूप, दीप, फूल आदि अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा या अन्य हनुमान जी के भजनों का पाठ करें।
- अब, आप हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् का पाठ करें।
- पाठ को 108 बार, 1008 बार या अधिक बार किया जा सकता है।
- पाठ के बाद, हनुमान जी की आरती करें।
हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् का नियमित रूप से पाठ करने से भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और वे सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त होकर सुखी और समृद्ध जीवन जीते हैं।
हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् के कुछ नामों का अर्थ इस प्रकार है:
- हनुमान् - हनुमान जी का नाम
- अंजनीसून - अंजनी के पुत्र हनुमान जी
- वायुपुत्र - वायु देवता के पुत्र हनुमान जी
- महाबलाय - महान बल के स्वामी हनुमान जी
- रामेष्टाय - भगवान राम के सबसे वफादार भक्त हनुमान जी
- फाल्गुनसखाय - भगवान राम के भाई लक्ष्मण के मित्र हनुमान जी
- पिंगाक्षाय - लाल आंखों वाले हनुमान जी
- अमितविक्रमाय - अपार पराक्रम के स्वामी हनुमान जी
- उदधिक्रमणाय - समुद्र को लांघने वाले हनुमान जी
हनुमत्सहस्रनामस्तोत्रम् एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है जो हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए एक प्रभावी उपाय है।
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