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Published October 3, 2023
Updated July 29, 2024

श्री सूर्यकवचस्तोत्रम् २

ॐ नमो भगवते सूर्याय

ध्यानम्

घृणिर्मे शीर्षकं पातु सूर्यः पातु ललाटकम् । आदित्यःपातु नेत्रे द्वे श्रोत्रे पातु दिवाकरः ॥ १ ॥

मूल मंत्रम्

ॐ नमो भगवते सूर्याय ।

प्रणव मंत्रम्

ॐ ह्रीं सूर्याय नमः ।

अर्थः

हे भगवान सूर्य, मैं आपको नमन करता हूं।

आपके सिर की रक्षा घृणि से होती है, आपके ललाट की रक्षा सूर्य से होती है, आपके दोनों नेत्र आदित्य से सुरक्षित हैं, और आपकी दोनों कान दिवाकर से सुरक्षित हैं।

फलश्रुतिः

इदमादित्यनामाख्यं कवचं धारयेत्सुधीः । सदीर्घायुस्सदा भोगी स्थिरसम्पद्विजायते ॥ ७ ॥

अर्थः

जो कोई भी इस सूर्य कवच का पाठ करता है, वह लंबी आयु, भोग और स्थिर धन प्राप्त करता है।

श्री सूर्यकवचस्तोत्रम् २ एक छोटा और सरल स्तोत्र है जो भगवान सूर्य की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त करने और सभी प्रकार के भय और खतरों से सुरक्षा प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

श्री सूर्यकवचस्तोत्रम् २ का पाठ करने के लिए विधि

  1. सबसे पहले, एक स्वच्छ स्थान पर बैठें और अपने सामने एक दीपक जलाएं।
  2. फिर, भगवान सूर्य के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  3. अब, स्तोत्र का पाठ करें।
  4. अंत में, भगवान सूर्य से अपनी रक्षा करने की प्रार्थना करें।

श्री सूर्यकवचस्तोत्रम् २ का पाठ करने के लिए कुछ अतिरिक्त बातें

  • पाठ करते समय, अपने मन को शांत और केंद्रित रखें।
  • पाठ को ध्यानपूर्वक और स्पष्ट रूप से करें।
  • यदि पाठ को याद नहीं कर सकते हैं, तो आप इसे एक पाठ से पढ़ सकते हैं।
  • पाठ के बाद, भगवान सूर्य को फूल, धूप, और नैवेद्य अर्पित कर सकते हैं।
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