सर्वमंगलाश्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान गणेश की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों से बना है, जो भगवान गणेश की विभिन्न रूपों और शक्तियों की प्रशंसा करते हैं।
सर्वमंगलाश्टकम को 12वीं शताब्दी के कवि और संत, वदिराज थेर द्वारा लिखा गया था। वदिराज थेर, रामानुजाचार्य के शिष्य थे, जो एक प्रमुख वैष्णव संत थे। सर्वमंगलाश्टकम को रामानुज संप्रदाय में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है।
सर्वमंगलाश्टकम के कुछ लाभों में शामिल हैं:
- भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना
- सभी बाधाओं को दूर करना
- सभी पापों को दूर करना
- सभी प्रकार के धन और समृद्धि प्राप्त करना
- सभी शत्रुओं को पराजित करना
- आध्यात्मिक प्रगति करना
- सफलता और खुशी प्राप्त करना
सर्वमंगलाश्टकम को रोजाना पढ़ने या सुनने से कहा जाता है, विशेष रूप से कठिन समय में। यह स्तोत्र लोगों को आध्यात्मिक प्रगति करने, अपने जीवन में बाधाओं को दूर करने और सफलता और खुशी प्राप्त करने में मदद करने के लिए कहा जाता है।
सर्वमंगलाश्टकम का एक उदाहरण:
श्लोक 1
लक्ष्मीर्यस्य परिग्रहः कमलभूः सूनुर्गरुत्मान् रथः पौत्रश्चन्द्रविभूषणः सुरगुरुः शेषश्च शय्यासनः । ब्रह्माण्डं वरमन्दिरं सुरगणा यस्य प्रभोः सेवकाः स त्रैलोक्यकुटुम्बपालनपरः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
अनुवाद
जिसका आलिंगन लक्ष्मी है, जो कमल के निवास हैं, जिनके पुत्र गुरु हैं, जिनका रथ है चंद्रमा, जिनके पोते हैं विभूषण, जिनका गुरु है शेष, जिनका आसन है ब्रह्मांड, जिनके सेवक हैं देवता, वे त्रिलोकी के परिवार की रक्षा करने के लिए सदा मंगल करें।
श्लोक 2
ब्रह्मा वायुगिरीशशेषगरुडा देवेन्द्रकामौ गुरुश्- चन्द्रार्कौ वरुणानलौ मनुयमौ वित्तेशविघ्नेश्वरौ । नासत्यौ निरृतिर्मरुद्गणयुताः पर्जन्यमित्रादयः सस्त्रीकाः सुरपुङ्गवाः प्रतिदिनं कुर्वन्तु वो मङ्गलम् ॥
अनुवाद
ब्रह्मा, वायु, गरुड़, शेष, गरुड़, देवेंद्र, कामदेव, गुरु, सूर्य, चंद्रमा, वरुण, अग्नि, मनु, यमदूत, कुबेर, गणेश, नासत्य, निरृति, मरुद्गण, पर्जन्य, मित्र आदि, और सभी देवता, उनके साथ उनकी पत्नियां, प्रतिदिन आपकी मंगल करें।
सर्वमंगलाश्टकम एक शक्तिशाली साधन है जो लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद कर सकता है। यदि आप इस स्तोत्र का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो आप आशा कर सकते हैं कि आप अपने जीवन में सफलता, खुशी और कल्याण प्राप्त करेंगे।
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