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Published November 2, 2023
Updated November 2, 2023

Sri Amarnathashtakam

श्री अमरनाथष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र अमरनाथ गुफा में स्थित शिवलिंग की स्तुति करता है।

स्तोत्र के आठ श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक विशेष गुण या प्रशंसा है।

श्लोक 1

नमस्ते नमस्ते अमरनाथाय शंभवे।

मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, अमरनाथ, शंभु।

श्लोक 2

जो हिमालय में स्थित हो, जो अमरनाथ हो,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 3

जो महादेव हैं, जो महामूर्ति हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 4

जो त्रिलोचन हैं, जो त्रिदंडधारी हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 5

जो गौरीशंकर हैं, जो पार्वतीनाथ हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 6

जो नंदीश्वर हैं, जो भक्तवत्सल हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 7

जो शंभो हैं, जो शंकर हैं, जो शिव हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्लोक 8

जो त्रिपुरारी हैं, जो महाकाल हैं,

उन अमरनाथ को मैं नमस्कार करता हूं।

श्री अमरनाथष्टकम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।

यहां स्तोत्र का एक हिंदी अनुवाद दिया गया है:

श्री अमरनाथष्टकम्

भगवान शिव की स्तुति

मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, अमरनाथ, शंभु।

जो हिमालय में स्थित हो, जो अमरनाथ हो,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो महादेव हैं, जो महामूर्ति हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो त्रिलोचन हैं, जो त्रिदंडधारी हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो गौरीशंकर हैं, जो पार्वतीनाथ हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो नंदीश्वर हैं, जो भक्तवत्सल हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो शंभो हैं, जो शंकर हैं, जो शिव हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

जो त्रिपुरारी हैं, जो महाकाल हैं,मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं।

श्लोक 1 में, भक्त भगवान शिव को नमस्कार करता है और उन्हें अमरनाथ और शंभु के नाम से संबोधित करता है।

श्लोक 2 से 5 में, भक्त भगवान शिव के विभिन्न गुणों की प्रशंसा करता है, जैसे कि

  • हिमालय में स्थित होना
  • अमरनाथ होना
  • महादेव होना
  • त्रिलोचन होना
  • गौरीशंकर होना
  • नंदीश्वर होना
  • शंभो होना
  • शंकर होना
  • शिव होना
  • त्रिपुरारी होना
  • महाकाल होना

श्लोक 6 में, भक्त भगवान शिव से फल की प्राप्ति की कामना करता है।

श्लोक 7 में, भक्त भगवान शिव की स्तुति करता है और उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसे आशीर्वाद दें।

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