श्री अनंतकृष्णवरदाराजाष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था।
स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण अनंत हैं, और उनके पास सभी शक्तियाँ और गुण हैं। वे सभी के लिए वरदान हैं, और सभी की इच्छाओं को पूरा करते हैं।
स्तोत्र का अनुवाद इस प्रकार है:
shree anantakrshnavaradaarajaashtakam
- श्लोक 1:
हे अनंतकृष्णवरदाराज! आप अनंत हैं, और आपके पास सभी शक्तियाँ और गुण हैं। आप सभी के लिए वरदान हैं, और सभी की इच्छाओं को पूरा करते हैं।
- श्लोक 2:
आप दयालु और करुणामय हैं, और आप सभी के दुखों को दूर करते हैं। आप सभी के लिए भगवान हैं, और सभी को सुख और आनंद प्रदान करते हैं।
- श्लोक 3:
आप सभी के प्रिय हैं, और आप सभी के हृदय में निवास करते हैं। आप सभी की इच्छाओं को पूरा करते हैं, और आप सभी को आनंद देते हैं।
- श्लोक 4:
आप सभी के लिए आदर्श हैं, और सभी के लिए प्रेरणा हैं। आप सभी के लिए मार्गदर्शक हैं, और सभी को सही रास्ते पर ले जाते हैं।
- श्लोक 5:
आप सभी के लिए भगवान हैं, और सभी के लिए पालनहार हैं। आप सभी के लिए रक्षक हैं, और सभी को मोक्ष प्रदान करते हैं।
- श्लोक 6:
आप सभी के लिए आनंद हैं, और सभी को शांति प्रदान करते हैं। आप सभी के लिए जीवन हैं, और सभी को प्रकाश प्रदान करते हैं।
- श्लोक 7:
आप सभी के लिए प्रेम हैं, और सभी को मोक्ष प्रदान करते हैं। आप सभी के लिए सर्वस्व हैं, और सभी के लिए परम हैं।
श्री अनंतकृष्णवरदाराजाष्टकम् एक शक्तिशाली भक्ति मंत्र है। इसका पाठ करने से मन को शांति और आनंद मिलता है। यह स्तोत्र अक्सर मंदिरों और घरों में गाया और पढ़ा जाता है।
श्री अनंतकृष्णवरदाराजाष्टकम् के श्लोक इस प्रकार हैं:
1. अनंतकृष्णवरदाराज,
नमो नमो नमो नमः।
दयालु करुणामयाय,
नमो नमो नमो नमः।
2. सर्वप्रियाय,
सर्वहृदयवासिनाय।
सर्वकामप्रदायकाय,
नमो नमो नमो नमः।
3. आदर्शाय,
प्रेरणादायकाय।
मार्गदर्शकाय,
नमो नमो नमो नमः।
4. सर्वेश्वराय,
सर्वपालकाय।
सर्वरक्षकाय,
नमो नमो नमो नमः।
5. आनन्ददायकाय,
सुखदायकाय।
शांतिदायकाय,
नमो नमो नमो नमः।
6. जीवनदायकाय,
प्रकाशदायकाय।
प्रेमदायकाय,
नमो नमो नमो नमः।
7. सर्वस्वाय,
परमात्मने।
नमो नमो नमो नमः।
shree anantakrshnavaradaarajaashtakam
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