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Published October 10, 2023
Updated October 10, 2023

श्री स्वामी समर्थ अष्टक एक मराठी भक्ति स्तोत्र है जो स्वामी समर्थ, महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत के लिए समर्पित है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में लिखा गया है, और प्रत्येक श्लोक में स्वामी समर्थ की एक अलग विशेषता या गुण का वर्णन किया गया है।

श्री स्वामी समर्थ अष्टक का पहला श्लोक इस प्रकार है:

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम्हारी कृपा से ही सब कार्य सिद्ध होते हैं तुम ही सबके मालिक, तुम ही सबके स्वामी तुम ही सबके सारथी, तुम ही सबके गुरु

इस श्लोक में, भक्त स्वामी समर्थ की कृपा की प्रार्थना करते हैं। वे कहते हैं कि स्वामी समर्थ की कृपा से ही सब कार्य सिद्ध होते हैं। वे स्वामी समर्थ को सबके मालिक, सबके स्वामी, सबके सारथी और सबके गुरु कहते हैं।

श्री स्वामी समर्थ अष्टक एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है जो भक्तों के दिलों में स्वामी समर्थ के लिए प्रेम और भक्ति को जगा सकता है। यह स्तोत्र भक्तों को स्वामी समर्थ की कृपा पाने और उनके मार्गदर्शन का पालन करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

श्री स्वामी समर्थ अष्टक की रचना 19वीं शताब्दी के मराठी संत और कवि सदाशिव महाराज दास ने की थी। यह स्तोत्र स्वामी समर्थ के भक्तों द्वारा अक्सर गाया और पढ़ा जाता है।

यहां श्री स्वामी समर्थ अष्टक के सभी 8 श्लोक दिए गए हैं:

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम्हारी कृपा से ही सब कार्य सिद्ध होते हैं तुम ही सबके मालिक, तुम ही सबके स्वामी तुम ही सबके सारथी, तुम ही सबके गुरु

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके रक्षक, तुम ही सबके सहायक तुम ही सबके नाथ, तुम ही सबके पति तुम ही सबके हितैषी, तुम ही सबके सखा

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके पिता, तुम ही सबके माता तुम ही सबके वरदानी, तुम ही सबके परमेशवर तुम ही सबके उद्धारक, तुम ही सबके त्राता

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके ज्योति, तुम ही सबके ज्ञान तुम ही सबके भक्ति, तुम ही सबके ध्यान तुम ही सबके साधन, तुम ही सबके सागर

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके भक्त, तुम ही सबके प्रिय तुम ही सबके हितैषी, तुम ही सबके सखा तुम ही सबके गुरु, तुम ही सबके नाथ

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके देवता, तुम ही सबके भगवान तुम ही सबके रक्षक, तुम ही सबके सहायक तुम ही सबके सारथी, तुम ही सबके गुरु

श्री स्वामी समर्थ, जय जय स्वामी समर्थ तुम ही सबके प्रिय, तुम ही सबके प्यारे तुम ही सबके स्वामी, तुम ही सबके नाथ तुम ही सबके पालनहार, तुम ही सबके रक्षक

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