Sri Shivastotram - Swami Vivekananda Virchitam
श्री शिवस्तोत्रम एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 100 श्लोकों में विभाजित है और इसमें भगवान शिव के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन किया गया है।
श्री शिवस्तोत्रम की रचना का श्रेय आमतौर पर ऋषि भारद्वाज को दिया जाता है। हालांकि, कुछ विद्वानों का मानना है कि इसे ऋषि वशिष्ठ ने लिखा था।
श्री शिवस्तोत्रम को हिंदू धर्म में एक पवित्र स्तोत्र माना जाता है। इसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों में पढ़ा जाता है।
स्वामी विवेकानंद एक भारतीय दार्शनिक और धर्मगुरु थे। वे रामकृष्ण मिशन के संस्थापक थे। स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म के दर्शन और सिद्धांतों को दुनिया भर में प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Sri Shivastotram - Swami Vivekananda Virchitam
स्वामी विवेकानंद ने कई संस्कृत स्तोत्रों का अनुवाद और व्याख्या की, लेकिन उन्होंने कोई नया स्तोत्र नहीं लिखा।
श्री शिवस्तोत्रम के कुछ प्रसिद्ध श्लोक:
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अर्थ: हे शिव, आपके तीन नेत्र ब्रह्मांड के तीनों काल हैं: भूत, वर्तमान और भविष्य। आपका त्रिशूल तीन गुणों: सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व करता है। आपका त्रिशूल समस्त सृष्टि को नियंत्रित करता है।
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अर्थ: हे शिव, आपका डमरु सृष्टि की रचना और विनाश का प्रतीक है। आपका नृत्य सृष्टि की ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। आपका गले में लिपटा हुआ नाग समस्त विषों का प्रतिनिधित्व करता है।
ॐकारेश्वरमहात्म्यम् Omkareshwarmahatmyam
KARMASU