Shri Vishnu Teertha Vir Chitam Shri Krishna Ashtakam
श्री विष्णु तीर्थ वीरचित श्री कृष्णाष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की स्तुति में रचित है। यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के भक्ति संत वीरचित द्वारा रचित है।
स्तोत्र के प्रारंभ में, वीरचित भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें कृष्ण की स्तुति करने की शक्ति प्रदान करें। इसके बाद, स्तोत्र में कृष्ण के अनेक गुणों की स्तुति की गई है। कृष्ण को प्रेम, करुणा, ज्ञान और शक्ति का अवतार माना जाता है। स्तोत्र में इन सभी गुणों की स्तुति की गई है।
स्तोत्र का अंत इस प्रकार है:
कृष्णस्तुतिं कृत्वा
विष्णु तीर्थ प्रसन्नाभवत्
कृष्णं स्तुतिं कुर्वता
विष्णु तीर्थ सदैव साक्षिणी भवेत्
इस प्रकार, यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की स्तुति करने का एक शक्तिशाली तरीका है। यह स्तोत्र प्रेम, करुणा, ज्ञान और शक्ति प्राप्त करने के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
Shri Vishnu Teertha Vir Chitam Shri Krishna Ashtakam
यहां स्तोत्र का हिंदी अनुवाद दिया गया है:
भगवान विष्णु, मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप मुझे कृष्ण की स्तुति करने की शक्ति प्रदान करें।
हे कृष्ण, आप प्रेम, करुणा, ज्ञान और शक्ति के अवतार हैं। आप पापियों का उद्धार करने वाले हैं।
आपके दर्शन से मनुष्य के सभी दुख दूर हो जाते हैं। आपके भजन से मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है।
मैं आपके गुणों की स्तुति करता हूं। मैं आपके चरणों में अपना सिर झुकाता हूं।
कृष्ण की स्तुति करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। कृष्ण की स्तुति करने से भगवान विष्णु सदैव साक्षी होते हैं।
श्री विष्णु तीर्थ वीरचित श्री कृष्णाष्टकम् एक भक्तिपूर्ण और प्रेरणादायक स्तोत्र है। यह स्तोत्र कृष्ण के प्रेम और करुणा को प्रकट करता है।
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