Srilalitambaparameshwarastavah
श्रीललिताम्बापरमेश्वरस्तव एक स्तोत्र है जो देवी ललिताम्बा को समर्पित है। यह स्तोत्र 15वीं शताब्दी के कवि और दार्शनिक श्री विद्यारत्न द्वारा रचित है। यह स्तोत्र में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा की महिमा का वर्णन करते हैं। वे देवी को ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति के रूप में दर्शाते हैं।
श्रीललिताम्बापरमेश्वरस्तव में कुल 10 श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा के एक विशेष गुण या रूप का वर्णन करते हैं।
प्रथम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "परमेश्वरी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी ही ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति हैं।
द्वितीय श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "त्रिगुणमयी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी ही सत्व, रज और तम तीनों गुणों का स्वरूप हैं।
तृतीय श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "चतुर्मुखी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी के चार मुख हैं, जो चार वेदों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
चतुर्थ श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टभुजी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी के आठ भुजाएं हैं, जो आठ सिद्धियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
पंचम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "नवरूपधारिणी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी नौ रूपों में प्रकट होती हैं, जो नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Srilalitambaparameshwarastavah
षष्ठ श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टादशभुजी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी के अठारह भुजाएं हैं, जो अठारह पुराणों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
सप्तम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टादशवर्णधारिणी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी अठारह रंगों में प्रकट होती हैं, जो अठारह सिद्धियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अष्टम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टादशनामधारिणी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी अठारह नामों से जानी जाती हैं, जो अठारह पुराणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नवम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टादशशक्तिधारिणी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी अठारह शक्तियों से संपन्न हैं, जो अठारह सिद्धियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
दशम श्लोक में, श्री विद्यारत्न देवी ललिताम्बा को "अष्टादशयोगिनीधारिणी" के रूप में नमस्कार करते हैं। वे कहते हैं कि देवी अठारह योगिनियों से घिरी हुई हैं, जो अठारह सिद्धियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
श्रीललिताम्बापरमेश्वरस्तव एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो देवी ललिताम्बा की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को देवी के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने में मदद करता है।
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