Srimalhari Mhalsakantpratahsmaranam
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो देवी महालक्ष्मी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है और इसमें देवी महालक्ष्मी के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन किया गया है।
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् की रचना का श्रेय आमतौर पर स्वामी मधुसूदन सरस्वती को दिया जाता है। स्वामी मधुसूदन सरस्वती एक महान विद्वान और दार्शनिक थे। उन्होंने कई संस्कृत ग्रंथों की रचना की, जिनमें श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् भी शामिल है।
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् को हिंदू धर्म में एक पवित्र स्तोत्र माना जाता है। इसे अक्सर पूजा और अनुष्ठानों में पढ़ा जाता है।
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् के कुछ प्रसिद्ध श्लोक:**
-
अर्थ: हे महालक्ष्मी, आप धन, समृद्धि, और सौभाग्य की देवी हैं। आप सभी प्राणियों की आराध्य हैं।
-
अर्थ: आप सभी कष्टों को दूर करने वाली हैं। आप सभी दुखों को मिटाने वाली हैं। आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
-
अर्थ: आप सभी ज्ञान के स्रोत हैं। आप सभी आनंद के स्रोत हैं। आप सभी मोक्ष की प्राप्ति का मार्गदर्शन करने वाली हैं।
Srimalhari Mhalsakantpratahsmaranam
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् एक शक्तिशाली और अर्थपूर्ण स्तोत्र है जो देवी महालक्ष्मी की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो धन, समृद्धि, और सौभाग्य की प्राप्ति चाहते हैं।
श्रीमलहरी महालक्ष्मीप्रातःस्मरणम् का पाठ:
नमस्ते महालक्ष्मी! धनधान्यसमृद्धिदायनी! सर्वसौभाग्यदायनी! सर्वप्राणिप्रिये!
सर्वदुःखविनाशिनी! सर्वकामधायके! ज्ञानसागरे! आनन्दसागरे!
मोक्षमार्गदर्शिके! त्वां शरणं गच्छामि।
अनुवाद:
हे महालक्ष्मी, आपको मेरा प्रणाम। आप धन, समृद्धि, और सौभाग्य की देवी हैं। आप सभी प्राणियों की आराध्य हैं।
आप सभी कष्टों को दूर करने वाली हैं। आप सभी दुखों को मिटाने वाली हैं। आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।
आप सभी ज्ञान के स्रोत हैं। आप सभी आनंद के स्रोत हैं। आप सभी मोक्ष की प्राप्ति का मार्गदर्शन करने वाली हैं।
मैं आपके चरणों में शरण लेता हूं।
KARMASU