श्रीभुशुक्तम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए एक आशीर्वाद है। यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है। यह स्तोत्र वंशस्थल छंद में रचित है, जिसमें प्रत्येक चरण में 16 अक्षर होते हैं।
श्रीभुशुक्तम् की पहली दो पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
shreebhusuktam
श्रीभुशुक्तम्
श्रीकृष्ण भुशुक्त, श्रीकृष्ण भुशुक्त, हे मधुर रस के स्वामी, तेरी कृपा से, हम सबका जीवन सुखी हो।
इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण को "मधुर रस के स्वामी" कहते हैं, क्योंकि वे अपने भक्तों को मधुर भक्ति रस का पान कराते हैं। वे भगवान कृष्ण से प्रार्थना करते हैं कि वे अपनी कृपा से सभी भक्तों का जीवन सुखी करें।
इस स्तोत्र में, विद्यापति भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए विभिन्न आशीर्वादों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के भक्तों को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के भक्तों को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। वे कहते हैं कि भगवान कृष्ण के भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्रीभुशुक्तम् एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक अमूल्य निधि है।
यहाँ श्रीभुशुक्तम् की पूरी स्तोत्र दी गई है:
श्रीकृष्ण भुशुक्त, श्रीकृष्ण भुशुक्त, हे मधुर रस के स्वामी, तेरी कृपा से, हम सबका जीवन सुखी हो।
तेरे भक्तों को, सभी सुखों की प्राप्ति हो, उनके सभी पाप, तुमसे धुल जाएं।
तेरे भक्तों को, मोक्ष की प्राप्ति हो, और वे, तेरे चरणों में, सदा विराजें।
हे मधुर रस के स्वामी, हम सब तेरे चरणों में, सदा शीश झुकाते हैं।
श्रीभुशुक्तम् की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक आशीर्वाद है।
- यह स्तोत्र वंशस्थल छंद में रचित है।
- यह स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित है।
- यह स्तोत्र संत कवि विद्यापति द्वारा रचित है।
श्रीभुशुक्तम् एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है।
श्रीभुशुक्तम् के रचयिता, संत कवि विद्यापति, एक विख्यात मैथिली कवि थे। वे बिहार के दरभंगा के रहने वाले थे। वे अपनी भक्ति और प्रेम के गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। श्रीभुशुक्तम् इनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है।
KARMASU