Shribhavabandhavimochanashivastutih
श्रीभवाबन्धविमोचनशिवस्तवन
श्री भवाबन्धविमोचनशिवाय नमः
त्रिगुणात्मने,
त्रिलोचनाय,
त्रिशूलधारिणे,
नमः शिवाय।
सर्वपापनाशकाय,
सर्वशत्रुनाशाय,
सर्वसुखदायकाय,
नमः शिवाय।
सर्वमोक्षदायकाय,
सर्वविघ्ननाशाय,
सर्वकार्यसिद्धये,
नमः शिवाय।
नित्यं शिवपूजां कुर्यात्,
नित्यं शिवं भजेत्,
नित्यं शिवं स्मरेत्,
तस्य सर्वं सिद्ध्यति।
Shribhavabandhavimochanashivastutih
अर्थ:
त्रिगुणात्म, त्रिलोचन, त्रिशूलधारी भगवान शिव को नमस्कार।
सभी पापों का नाश करने वाले, सभी शत्रुओं का नाश करने वाले, सभी सुखों को देने वाले भगवान शिव को नमस्कार।
सभी मोक्ष को देने वाले, सभी विघ्नों का नाश करने वाले, सभी कार्यों को सिद्ध करने वाले भगवान शिव को नमस्कार।
जो व्यक्ति नित्य शिव की पूजा करता है, नित्य शिव का भजन करता है, नित्य शिव का स्मरण करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
श्रीभवाबन्धविमोचनशिवस्तवन एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ाने में मदद करता है।
श्रीभवाबन्धविमोचनशिवस्तवन के पाठ का लाभ:
- यह स्तोत्र सभी पापों का नाश करता है।
- यह स्तोत्र सभी शत्रुओं का नाश करता है।
- यह स्तोत्र सभी सुखों को देता है।
- यह स्तोत्र सभी मोक्ष को देता है।
श्रीभवाबन्धविमोचनशिवस्तवन का पाठ कैसे करें:
- इस स्तोत्र का पाठ किसी भी दिन, किसी भी समय किया जा सकता है।
- इस स्तोत्र का पाठ करते समय, भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।
- इस स्तोत्र का पाठ करने से पहले, भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराना चाहिए।
- इस स्तोत्र का पाठ करने के बाद, भगवान शिव को फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करना चाहिए।
श्रीभवाबन्धविमोचनशिवस्तवन का पाठ करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इससे भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों के सभी भवबंधन (जन्म-मृत्यु के चक्र) से मुक्ति मिलती है।
KARMASU