श्रीनारोत्तमष्टकम् एक वैष्णव स्तोत्र है जो श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य श्रीनारोत्तम दास ठाकुर को समर्पित है। यह स्तोत्र में, श्रीनारोत्तम दास ठाकुर के आठ गुणों की स्तुति की गई है। इन गुणों में से प्रत्येक श्रीनारोत्तम दास ठाकुर की आध्यात्मिक महानता और उनकी भक्ति की गहराई को दर्शाता है।
श्रीनारोत्तमष्टकम् की रचना श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने की थी। यह स्तोत्र श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके भक्तों द्वारा नियमित रूप से पढ़ा और गाया जाता है।
श्रीनारोत्तमष्टकम् के आठ गुण निम्नलिखित हैं:
- श्रीकृष्ण भक्ति: श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित
- अद्वैत ज्ञान: अद्वैत ज्ञान के ज्ञाता
- भक्तों के प्रति प्रेम: भक्तों के प्रति अत्यंत प्रेम
- भावुक भजन: भावपूर्ण भजनों के गायन में निपुण
- सत्संग का प्रचार: सत्संग के प्रचार में तत्पर
- धर्म का प्रचार: धर्म के प्रचार में तत्पर
- भक्ति मार्ग का पथ प्रदर्शक: भक्ति मार्ग का पथ प्रदर्शक
श्रीनारोत्तमष्टकम् की स्तुति से श्रीनारोत्तम दास ठाकुर की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद करता है।
श्रीनारोत्तमष्टकम् का पाठ हिंदी में इस प्रकार है:
श्रीनारोत्तमष्टकम्
श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित, अद्वैत ज्ञान में निपुण। भक्तों के प्रति प्रेम से, भावपूर्ण भजनों में निपुण। सत्संग का प्रचार करने वाले, धर्म का प्रचार करने वाले। भक्ति मार्ग का पथ प्रदर्शक, श्रीनारोत्तम को नमन।
अर्थ:
श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित, अद्वैत ज्ञान में निपुण, भक्तों के प्रति प्रेम से, भावपूर्ण भजनों में निपुण, सत्संग का प्रचार करने वाले, धर्म का प्रचार करने वाले, भक्ति मार्ग का पथ प्रदर्शक, श्रीनारोत्तम को बार-बार नमन।
श्रीनारोत्तमष्टकम् का पाठ संस्कृत में इस प्रकार है:
श्रीनारोत्तमष्टकम्
श्रीकृष्ण भक्ति समर्पितो, अद्वैत ज्ञान निपुणः। भक्तेषु प्रेमायतनो, भावभक्ति निपुणः। सत्संग प्रचारकः, धर्म प्रचारकः। भक्ति मार्ग पथ प्रदर्शकः, श्रीनारोत्तम नमो नमः।
अनुवाद:
श्रीकृष्ण भक्ति में समर्पित, अद्वैत ज्ञान में निपुण, भक्तों के प्रति प्रेम से, भावपूर्ण भजनों में निपुण, सत्संग का प्रचार करने वाले, धर्म का प्रचार करने वाले, भक्ति मार्ग का पथ प्रदर्शक, श्रीनारोत्तम को बार-बार नमन।
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