Sridashashloki
श्रीदशश्लोकी एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक शिव के एक विशेष गुण या स्वरूप की प्रशंसा करता है।
श्लोक 1:
नमस्ते नमस्ते रुद्राय । नमस्ते नमस्ते शर्वाय ॥
अर्थ:
हे रुद्र, हे शर्व, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 2:
नमस्ते नमस्ते भवाय । नमस्ते नमस्ते शंभवे ॥
अर्थ:
हे भव, हे शंभु, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 3:
नमस्ते नमस्ते महेश्वराय । नमस्ते नमस्ते त्रिलोचनाय ॥
अर्थ:
हे महेश्वर, हे त्रिलोचन, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 4:
नमस्ते नमस्ते पशुपतिनाथाय । नमस्ते नमस्ते गौरीनाथाय ॥
अर्थ:
हे पशुपतिनाथ, हे गौरीनाथ, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 5:
नमस्ते नमस्ते योगिराजाय । नमस्ते नमस्ते योगेश्वराय ॥
अर्थ:
हे योगिराज, हे योगेश्वर, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 6:
नमस्ते नमस्ते लिंगरूपाय । नमस्ते नमस्ते शिवाय ॥
Sridashashloki
अर्थ:
हे लिंगरूप, हे शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 7:
नमस्ते नमस्ते सदाशिवाय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥
अर्थ:
हे सदाशिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 8:
नमस्ते नमस्ते सर्वेश्वराय । नमस्ते नमस्ते सर्वशक्तिमानाय ॥
अर्थ:
हे सर्वेश्वर, हे सर्वशक्तिमान, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 9:
नमस्ते नमस्ते जगन्नाथाय । नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥
अर्थ:
हे जगन्नाथ, मैं आपको नमस्कार करता हूं।
श्लोक 10:
इति श्रीदशश्लोकी समाप्तः ॥
अर्थ:
इस प्रकार श्रीदशश्लोकी समाप्त होती है।
श्रीदशश्लोकी एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र अक्सर प्रार्थना और ध्यान में किया जाता है।
श्रीदशश्लोकी के प्रमुख प्रसंग:**
- स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक भगवान शिव के प्रमुख नामों से उनकी महिमा का वर्णन करता है।
- स्तोत्र के अगले नौ श्लोक भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और गुणों की प्रशंसा करते हैं।
- स्तोत्र का अंतिम श्लोक भगवान शिव की सर्वोच्चता की घोषणा करता है।
श्रीदशश्लोकी का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए सहायक है। यह स्तोत्र मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है।
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