Sridakshinamurthy navaratnamalikastotram
श्रीदक्षिणामूर्ती नवरत्नामालिकस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति रूप की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान दक्षिणामूर्ति के नौ रत्नों का वर्णन करता है।
स्तोत्र इस प्रकार है:
नमस्ते दक्षिणामूर्ति! नमस्ते शम्भो!नमस्ते रुद्ररूप! नमस्ते महेश्वर!
नव रत्नमय हार धारण किये हुएआपके दर्शन से भक्तों के मन आनंदित होते हैं।
पहला रत्न चंद्रमा है,जो आपकी ज्ञान और शीतलता का प्रतीक है।
दूसरा रत्न सूर्य है,जो आपकी शक्ति और तेज का प्रतीक है।
तीसरा रत्न अग्नि है,जो आपकी क्रियाशीलता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
चौथा रत्न गंगा है,जो आपकी पवित्रता और करुणा का प्रतीक है।
पांचवां रत्न कमल है,जो आपकी शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है।
छठा रत्न शेषनाग है,जो आपकी अनंत शक्ति और ज्ञान का प्रतीक है।
सातवां रत्न मणि है,जो आपकी समृद्धि और वैभव का प्रतीक है।
आठवां रत्न फूल है,जो आपकी सुंदरता और प्रेम का प्रतीक है।
नौवां रत्न पुस्तक है,जो आपकी ज्ञान और विद्या का प्रतीक है।
आपके इस नौ रत्नों के हार से,भक्तों को सभी प्रकार के सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
आपके इस हार से,भक्तों के सभी पाप नष्ट होते हैं और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।
इति श्रीदक्षिणामूर्ती नवरत्नामालिकस्तोत्रम्॥
Sridakshinamurthy navaratnamalikastotram
इस स्तोत्र के अनुसार, भगवान दक्षिणामूर्ति के नौ रत्न भक्तों को सभी प्रकार के सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं। वे भक्तों के सभी पापों को नष्ट करते हैं और उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।
यहां स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक का अर्थ दिया गया है:
- श्लोक 1: हे दक्षिणामूर्ति! आपको नमस्कार है, हे शंभो! आपको नमस्कार है, हे रुद्ररूप! आपको नमस्कार है, हे महेश्वर!
- श्लोक 2: आपके दर्शन से भक्तों के मन आनंदित होते हैं।
- श्लोक 3: चंद्रमा ज्ञान और शीतलता का प्रतीक है।
- श्लोक 4: सूर्य शक्ति और तेज का प्रतीक है।
- श्लोक 5: अग्नि क्रियाशीलता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
- श्लोक 6: गंगा पवित्रता और करुणा का प्रतीक है।
- श्लोक 7: कमल शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है।
- श्लोक 8: शेषनाग अनंत शक्ति और ज्ञान का प्रतीक है।
- श्लोक 9: मणि समृद्धि और वैभव का प्रतीक है।
- श्लोक 10: फूल सुंदरता और प्रेम का प्रतीक है।
- श्लोक 11: पुस्तक ज्ञान और विद्या का प्रतीक है।
- श्लोक 12: भक्तों को सभी प्रकार के सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
- श्लोक 13: भक्तों के सभी पाप नष्ट होते हैं और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।
श्रीदक्षिणामूर्ती नवरत्नामालिकस्तोत्रम् का पाठ करने से भक्त को सभी प्रकार के सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। यह भक्त के सभी पापों को नष्ट करता है और उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।
KARMASU