Shritriguneshwarshivastotram
श्री त्रिगुणेश्वर शिवस्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के तीन गुणों, सत्, रज और तम की प्रशंसा करता है।
स्तोत्र के पांच श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक गुण होता है।
श्लोक 1
सत्त्वं शिवं त्रिगुणात्मिकां नमस्तुभ्यं त्र्यम्बके।
सत्त्व गुण से युक्त, शिवस्वरूप, तीन नेत्रों वाले, तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 2
रजस्त्वं त्रिपुरारी शंकरं नमस्तुभ्यं त्र्यम्बके।
रज गुण से युक्त, त्रिपुरारी शंकर, तीन नेत्रों वाले, तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 3
तमस्त्वं महाकालं नमस्तुभ्यं त्र्यम्बके।
तम गुण से युक्त, महाकाल, तीन नेत्रों वाले, तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 4
सत्त्वरजस्तमस्त्वं त्रिगुणात्मकं नमस्तुभ्यं त्र्यम्बके।
सत्त्व, रज और तम इन तीन गुणों से युक्त, तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
श्लोक 5
सर्वगुणात्मकं नमस्तुभ्यं त्र्यम्बके।
सभी गुणों से युक्त, तुम्हें मैं नमस्कार करता हूं।
श्री त्रिगुणेश्वर शिवस्तोत्रम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव के तीन गुणों को समझने और उन्हें अपने जीवन में लाने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।
यहां स्तोत्र का एक हिंदी अनुवाद दिया गया है:
श्री त्रिगुणेश्वर शिवस्तोत्रम
भगवान शिव की स्तुति
मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, सत्त्व गुण से युक्त, शिवस्वरूप, तीन नेत्रों वाले।
मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, रज गुण से युक्त, त्रिपुरारी शंकर, तीन नेत्रों वाले।
मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, तम गुण से युक्त, महाकाल, तीन नेत्रों वाले।
मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, सत्त्व, रज और तम इन तीन गुणों से युक्त।
मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं, सभी गुणों से युक्त।
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