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Published November 8, 2023
Updated November 8, 2023

Srigyansambandhdhyanstutih

श्रीज्ञानसंबंध ध्यानस्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के ज्ञान स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र 10 श्लोकों में विभाजित है, प्रत्येक श्लोक ज्ञान के एक विशेष पहलू को संबोधित करता है।

श्लोक 1:

नमस्ते ज्ञानस्वरूपाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वज्ञाय नमस्ते नमस्ते ॥ १ ॥

अर्थ:

हे ज्ञान स्वरूप, हे सर्वज्ञ, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 2:

नमस्ते नमस्ते सत्यरूपाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते ब्रह्मरूपाय नमस्ते नमस्ते ॥ २ ॥

अर्थ:

हे सत्य स्वरूप, हे ब्रह्म स्वरूप, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 3:

नमस्ते नमस्ते अनंतरूपाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते अनादिरूपाय नमस्ते नमस्ते ॥ ३ ॥

अर्थ:

हे अनंत स्वरूप, हे अनादि स्वरूप, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 4:

नमस्ते नमस्ते सर्वशक्तिमते नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वकारणाय नमस्ते नमस्ते ॥ ४ ॥

अर्थ:

हे सर्वशक्तिमान, हे सर्व कारण, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

Srigyansambandhdhyanstutih

श्लोक 5:

नमस्ते नमस्ते सर्वज्ञानाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वकर्मफलप्रदाताय नमस्ते नमस्ते ॥ ५ ॥

अर्थ:

हे सर्वज्ञानी, हे सभी कर्मों के फल देने वाले, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 6:

नमस्ते नमस्ते सर्वसाक्षिणे नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वभूतेषु नमस्ते नमस्ते ॥ ६ ॥

Srigyansambandhdhyanstutih

अर्थ:

हे सर्व साक्षी, हे सभी प्राणियों में, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 7:

नमस्ते नमस्ते सर्वशक्तिस्वरूपाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वयोगिनामध्येष्ठाय नमस्ते नमस्ते ॥ ७ ॥

अर्थ:

हे सर्व शक्ति स्वरूप, हे सभी योगियों के आराध्य, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 8:

नमस्ते नमस्ते सर्वसाधकानामभिष्टसिद्धिदायकाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वभक्तानां प्रियाय नमस्ते नमस्ते ॥ ८ ॥

अर्थ:

हे सभी साधकों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले, हे सभी भक्तों के प्रिय, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 9:

नमस्ते नमस्ते सर्वलोकपालाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वजनरञ्जिनी नमस्ते नमस्ते ॥ ९ ॥

अर्थ:

हे सभी लोकों के पालक, हे सभी लोगों को आनंदित करने वाले, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्लोक 10:

नमस्ते नमस्ते सर्वशुभदायकाय नमस्ते नमस्ते । नमस्ते नमस्ते सर्वलोकैकनाथाय नमस्ते नमस्ते ॥ १० ॥

अर्थ:

हे सभी शुभों को देने वाले, हे सभी लोकों के एकमात्र स्वामी, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

श्रीज्ञानसंबंध ध्यानस्तुति एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान शिव के ज्ञान स्वरूप की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र अक्सर ध्यान और एकाग्रता में किया जाता है।

श्रीत्यागराजाष्टकम् Shrityageshstuti:

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