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Published October 7, 2023
Updated October 7, 2023

श्री गणेश दशोत्तर श्‍टनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान गणेश के 108 नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र बहुत ही सरल है, लेकिन यह बहुत शक्तिशाली भी है। यह स्तोत्र भगवान गणेश की सभी शक्तियों और गुणों की प्रशंसा करता है।

श्री गणेश दशोत्तर श्‍टनामावली का पाठ इस प्रकार है:

श्री गणेशाय नमः

शुक्लांम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशांतये।

अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजेतो य: सुरैरपि। सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः।

गणानामधिपश्चण्डो गजवक्त्रस्त्रिलोचनः। प्रसन्न भव मे नित्यं वरदातर्विनायक।।

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक।।

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः। द्वादशैतानि नामानि गणेशस्य य: पठेत्।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी विपुलं धनम्। व्यापारी लभते लाभं रोगी लभते शुश्रूषाम्।

नास्ति दुःखं तां पुरुषं यस्यास्ति गणेशस्मरणम्। सर्वत्र जयते गणेशः सर्वत्र पूज्यते गणेशः।

इति श्री गणेशाय दशोत्तर श्‍टनामावली समाप्तम्।

श्री गणेश दशोत्तर श्‍टनामावली का पाठ करने के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं:

  • भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।
  • सभी बाधाओं को दूर होता है।
  • सभी सिद्धियों को प्राप्त होता है।
  • आध्यात्मिक प्रगति होती है।
  • सफलता और खुशी प्राप्त होती है।

श्री गणेश दशोत्तर श्‍टनामावली को किसी भी समय और किसी भी स्थान पर पढ़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्तोत्र बुधवार या गुरुवार के दिन पढ़ना सबसे अच्छा माना जाता है।

श्री गणेश दशोत्तर श्‍टनामावली का सरलार्थ इस प्रकार है:

मैं भगवान गणेश को नमस्कार करता हूं।

मैं उस शुक्ल वस्त्र धारण करने वाले, चंद्रमा के समान वर्ण वाले, चार भुजाओं वाले, प्रसन्न मुख वाले भगवान गणेश का ध्यान करता हूं, जो सभी विघ्नों को दूर करते हैं।

जो व्यक्ति अपने अभीष्ट कार्य की सिद्धि के लिए भगवान गणेश की पूजा करता है, उसे देवता भी पूजते हैं। मैं ऐसे विघ्नहर्ता गणपति को नमस्कार करता हूं।

जो गणों के अधिपति हैं, जो वक्रतुंड हैं, जो हाथी के मुंह वाले हैं, जो तीन आंखों वाले हैं, मैं उनसे प्रार्थना करता हूं कि वे हमेशा मेरे अनुकूल रहें और मुझे वरदान दें।

जो सुंदर मुख वाले हैं, जो एकदंत हैं, जो पीले रंग के हैं, जो हाथी के कान वाले हैं, जो लंबोदर हैं, जो विकट हैं, जो विघ्नों को दूर करने वाले हैं, मैं उन गणपति को नमस्कार करता हूं।

जो धूम्रकेतु हैं, जो गणों के अध्यक्ष हैं, जो चंद्रमा के समान मुख वाले हैं, जो हाथी के सिर वाले हैं, मैं उन गणेश को नमस्कार करता हूं।

जो व्यक्ति भगवान गणेश के इन 108 नामों का पाठ करता है, वह विद्यार्थी को ज्ञान मिलता है, धनार्थी को बहुत सारा धन मिलता है, व्यापारी को व्यापार में लाभ होता है, और रोगी को रोग से मुक्ति मिलती है।

भगवान गणेश की याद रखने वाला पुरुष कभी दुःख नहीं पाता है। भगवान गणेश सर्वत्र जय करते हैं और सर्वत्र पूजे जाते हैं।

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