नहीं, श्रीकृष्ण स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण में सरस्वतीकृत नहीं है। श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना राधाजी ने की थी। राधाजी भगवान कृष्ण की प्रेमिका थीं। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं।
श्रीकृष्ण स्तोत्र की रचना का काल 16वीं शताब्दी माना जाता है। यह स्तोत्रम संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
Srikrishna Stotram Brahmavaivartapurane Saraswatikritam
ब्रह्मवैवर्त पुराण एक हिंदू धर्म का पवित्र ग्रंथ है। यह पुराण भगवान विष्णु के अवतारों की कहानियों का वर्णन करता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में एक स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करता है। इस स्तोत्रम को "श्रीकृष्ण स्तोत्र" के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह स्तोत्रम वही नहीं है जो राधाजी ने रचा था।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित श्रीकृष्ण स्तोत्रम 20 श्लोकों में विभाजित है। इस स्तोत्रम में, भगवान कृष्ण की सुंदरता, उनकी प्रेममयी लीलाओं और उनके गुणों की प्रशंसा की गई है।
राधाजी द्वारा रचित श्रीकृष्ण स्तोत्रम 17 श्लोकों में विभाजित है। इस स्तोत्रम में, राधाजी भगवान कृष्ण से अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं।
दोनों स्तोत्रम अलग-अलग हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित श्रीकृष्ण स्तोत्रम की रचना का श्रेय भगवान ब्रह्मा को दिया जाता है। लेकिन यह मत अधिक स्वीकृत नहीं है। अधिकांश विद्वानों का मानना है कि इस स्तोत्रम की रचना किसी अन्य संत या कवि ने की थी।
Srikrishna Stotram Brahmavaivartapurane Saraswatikritam
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