श्रीकृष्णस्तवराज एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की स्तुति करता है। इस स्तोत्र में भगवान कृष्ण को एक ऐसे देवता के रूप में वर्णित किया गया है, जो सभी भक्तों के लिए एक आदर्श हैं।
श्रीकृष्णस्तवराज के छंद निम्नलिखित हैं:
Srikrishnastavraj:
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श्रीकृष्णस्तवराज
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श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव
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प्रसीद भगवन्मह्यमज्ञानात्कुण्ठितात्मने तवाङ्घ्रिपङ्कजरजोरागिणीं भक्तिमुत्तमाम्
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अज प्रसीद भगवन्नमितद्युतिपञ्जर अप्रमेय प्रसीदास्मद्दुःखहन्पुरुषोत्तम
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स्वसंवेद्य प्रसीदास्मदानन्दात्मन्ननामय अचिन्त्यसार विश्वात्मन्प्रसीद परमेश्वर
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प्रसीद तुङ्गतुङ्गानां प्रसीद शिवशोभन प्रसीद गुणगम्भीर गम्भीराणां महाद्युते
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प्रसीद व्यक्त विस्तीर्णं विस्तीर्णानामगोचर प्रसीदान्तान्तदायिनाम्प्रसीदान्तान्तदायिनाम्
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गुरोर्गरीयः सर्वेश प्रसीदानन्त देहिनाम्
श्रीकृष्णस्तवराज का अर्थ निम्नलिखित है:
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हे कृष्ण, हे गोविन्द, हे हरे, हे मुरारे, हे नाथ, हे नारायण, हे वासुदेव,
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हे भगवान, मैं अज्ञान से कुंठित आत्मा हूं। आपके चरणकमल के रजोरागिणी भक्ति को मुझे प्रदान करें।
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हे अज, हे भगवान, आप अनंत हैं। आप दुखों को नष्ट करने वाले पुरुषोत्तम हैं। मुझे प्रसन्न करें।
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हे स्वसंवेद्य, हे आनंदात्मन, हे अनामय, हे अचिन्त्यसार, हे विश्वात्मन, हे परमेश्वर, मुझे प्रसन्न करें।
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हे तुंगतुङ्ग, हे शिवशोभन, हे गुणगम्भीर, हे महाद्युते, मुझे प्रसन्न करें।
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हे व्यक्त, हे विस्तीर्ण, हे विस्तीर्णानामगोचर, हे अन्तान्तदायिने, हे अन्तान्तदायिने, मुझे प्रसन्न करें।
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हे गुरुर्गरीय, हे सर्वेश, हे अनंत देहिने, मुझे प्रसन्न करें।
श्रीकृष्णस्तवराज एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता को दर्शाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस स्तोत्र के कुछ अन्य संस्करण भी हैं, जिन्हें अन्य संतों और विद्वानों द्वारा रचित माना जाता है। इन संस्करणों में भी भगवान कृष्ण की स्तुति की जाती है, लेकिन वे अलग-अलग शब्दों और वाक्यों का उपयोग करते हैं।
श्रीकृष्णस्तवराज एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक बहुत ही प्रभावी तरीका है।
श्रीकृष्णस्तवराज के दो भाग हैं। पहले भाग में भगवान कृष्ण की सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता का वर्णन किया गया है। दूसरे भाग में भगवान कृष्ण से भक्ति प्राप्त करने की प्रार्थना की गई है।
श्रीकृष्णस्तवराज का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- भगवान कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- भक्ति में वृद्धि होती है।
- मन शांत और प्रसन्न होता है।
- दुख और कष्ट दूर होते हैं।
- सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
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