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Published October 12, 2023
Updated October 12, 2023

श्री अवधमहिमा

दोहा

अयोध्यापुरी निज धाम, रामराज की ज्योति। सकल सुखों की खान, भक्तों की गति।।

चौपाई

अयोध्यापुरी है वह धाम, जहाँ श्री रामराज विराजते हैं। यह धाम सभी सुखों की खान है, और भक्तों के लिए यह गति है।

दोहा

मंगलमय है यह नगरी, त्रिभुवन की गति। यहाँ वास करते हैं राम, जनकसुता सीता।।

चौपाई

यह नगरी मंगलमय है, और यह त्रिभुवन की गति है। यहाँ श्री राम और जनकसुता सीता वास करते हैं।

दोहा

तुलसीदास कहते हैं, यह नगरी है अद्भुत। यहाँ निवास करते हैं राम, भक्तों के लिए हित।।

चौपाई

तुलसीदास कहते हैं कि यह नगरी अद्भुत है। यहाँ श्री राम निवास करते हैं, जो भक्तों के लिए हितकारी हैं।

अर्थ

श्री अवधमहिमा एक हिंदू भक्ति गीत है, जो अयोध्या नगरी की महिमा का वर्णन करता है। यह गीत तुलसीदास द्वारा लिखा गया है, जो भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख संत थे। श्री अवधमहिमा हिंदू धर्म में एक लोकप्रिय भजन है, और इसे अक्सर पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में गाया जाता है।

श्री अवधमहिमा का महत्व

श्री अवधमहिमा अयोध्या नगरी की आराधना का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यह गीत अयोध्या नगरी के गुणों और इसके महत्व को याद दिलाता है। श्री अवधमहिमा भक्तों को अयोध्या नगरी के प्रति प्रेम और भक्ति विकसित करने में मदद करती है।

श्री अवधमहिमा का प्रभाव

श्री अवधमहिमा का हिंदू धर्म पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह गीत अयोध्या नगरी को एक आदर्श नगरी के रूप में चित्रित करता है। श्री अवधमहिमा ने हिंदू धर्म में अयोध्या नगरी की पूजा को लोकप्रिय बनाने में मदद की है।

श्री अवधमहिमा के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  • अयोध्या नगरी श्री राम की निवास स्थान है।
  • यह नगरी सभी सुखों की खान है।
  • यह नगरी भक्तों के लिए गति है।
  • तुलसीदास कहते हैं कि यह नगरी अद्भुत है।
  • यह नगरी भक्तों के लिए हितकारी है।
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