श्रीनृत्यगावल्ली एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की नृत्य लीलाओं की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी के कवि सूरदास द्वारा रचित है।
श्रीनृत्यगावल्ली की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
shreeanuraagavallih
श्रीनृत्यगावल्ली
व्रजपथ में क्रीड़ा करते, गोपकुमार मधुर गाते, वंशी बजाते, नृत्य करते, कृष्ण मुरलीधर मनमोहते।
गोपियों के साथ मिलकर, कृष्ण नृत्य करते हैं, उनका नृत्य देखकर, गोपियाँ मदन मोहित हैं।
कृष्ण का नृत्य देखकर, गोपियाँ प्रेम में डूब जाती हैं, वे कृष्ण के साथ नृत्य करने के लिए, अपने गहने और वस्त्र उतार देती हैं।
कृष्ण का नृत्य देखकर, गोपियाँ आनंद से भर जाती हैं, वे कृष्ण के साथ नृत्य करके, अपनी सारी वेदना भुला देती हैं।
कृष्ण का नृत्य देखकर, गोपियाँ प्रेम में पागल हो जाती हैं, वे कृष्ण के प्रेम में डूबकर, अपना सब कुछ कृष्ण को अर्पित कर देती हैं।
यह स्तोत्र भगवान कृष्ण की नृत्य लीलाओं का एक सुंदर वर्णन करता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक प्रेरणा है।
यहाँ स्तोत्र का एक और अनुवाद दिया गया है:
श्रीनृत्यगावल्ली
इस स्तोत्र में, सूरदास भगवान कृष्ण की नृत्य लीलाओं का एक सुंदर वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि कृष्ण का नृत्य देखकर गोपियाँ प्रेम में डूब जाती हैं, और वे कृष्ण के साथ नृत्य करके अपनी सारी वेदना भुला देती हैं। वे कहते हैं कि कृष्ण का नृत्य देखकर गोपियाँ प्रेम में पागल हो जाती हैं, और वे कृष्ण के प्रेम में डूबकर अपना सब कुछ कृष्ण को अर्पित कर देती हैं।
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